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इस बीमारी का समय पर करिए इलाज नहीं तो ले सकते हैं खुद की जान

Thu, 05 May 2016 12:47 PM IST
टीम डीजिटल/ अमर उजाला
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- फोटो : getty images
दुख या कुछ अप्रिय हो जाना हर किसी की जिंदगी में समय के साथ आता-जाता रहता है और इसके साथ अकेलेपन का अहसास भी बढ़ने लगता है। दोस्तों और परिवार के बीच लगातार अकेलापन महसूस करना अवसाद की बीमारी का संकेत है।
 
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छोटो बच्चे तो कभी-कभी चिड़चिड़ा व्यवहार करते हैं लेकिन बड़ों का छोटी-छोटी बातों पर झुंझला जाना गुस्सा होना और हमेशा चिड़चिड़ा व्यवहार रहना भी डिप्रेशन की ही निशानी है।
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अगर आपका सेक्स, एक्सरसाइज और गेम्स खेलने का मन नहीं करता तो आपको डॉक्टर की सलाह की जरूरत है।
 

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नींद का ज्यादा आना या बिलकुल नहीं आना भी सेहत के लिए बहुत खतरनाक है अगर किसी को इस तरह की परेशानी है तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
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जब कोई अवसाद में होता है तो कभी-कभी उसका वजन घट जाता है या बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति भूक में परिवर्तन के कारण होती है। कभी ज्यादा भूक लगती है तो कभी खाना-खाने का मन ही नहीं होता।
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किसी व्यक्ति को अगर हमेशा बेचैनी रहती है और उसको किसी चीज की फिक्र सताए रहती है और चाहकर भी अगर वे उससे उबर नहीं पा रहा तो यह स्थिति अवसाद की हो सकती है।
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हर इंसान की जिंदगी में कुछ ऐसी दुखद घटनाएं होती हैं जिन्हें वे चाहकर भी नहीं भूल पाता। अपने आपको किसी घटना के लिए दोषी मान लेना और खुद को हमेशा अपराधी समझना भी अवसाद के ही कारण होता है। इसलिए जल्द से जल्द डॉक्टर से परामर्श लें।

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जब कोई व्यक्ति फिट होता है तो उसको हर वक्त आलस या नींद नहीं आती। अगर किसी को हमेशा नींद आती है, आलस रहता है या जिस्म में फुर्ती महसूस नहीं होती तो यह बढ़ते अवसाद का संकेत है।
 
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मन में लगातार मृत्यु और आत्महत्या के ख्याल आने का मतलब है कि अवसाद खतरनाक स्थिति तक पहुंच गया है। अगर ऐसे ख्याल किसी के मन में आऐं तो सबसे पहले किसी विश्वसनीय व्यक्ति को बताएं और मनोवैज्ञानिक से जरूर मिलें। 

 
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