स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 इन दिनों स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। राजधानी दिल्ली-एनसीआर से लेकर उत्तर प्रदेश-मध्य प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में भी इसके मामले लगातार रिपोर्ट किए जा रहे हैं। साल 2009 में आई महामारी के बाद से वैसे तो एच1एन1 को विशेषज्ञ गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों वाला नहीं मानते हैं, पर इस साल सामने आ रहे आंकड़े काफी चिंता बढ़ा रहे हैं।
अगस्त के अंत तक के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली-एनसीआर में स्वाइन फ्लू का प्रकोप इस बार काफी व्यापक है। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के डेटा के अनुसार राजधानी में 31 अगस्त तक स्वाइन फ्लू के मामलों की संख्या 3,218 तक पहुंच गई है। यह संख्या 2024 में पूरे साल सामने आए कुल मामलों से न सिर्फ ज्यादा है बल्कि 2019 के बाद से सबसे बड़ा उछाल भी है।
साल 2024 में दिल्ली में कुल 3,151 वहीं 2019 में 3,627 मामले दर्ज किए गए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि फिर भी यह इस साल का प्रकोप 2019 के बाद से राजधानी में सबसे बड़ा प्रकोप है। अगर शहर के अस्पतालों में इलाज करा रहे दिल्ली के बाहर के मरीजों को भी शामिल किया जाए, तो कुल संख्या और भी ज्यादा हो जाती है।
गौरतलब है कि इस साल 31 अगस्त तक, एच1एन1 के कुल मामले 3,828 थे, जिनमें से 3,218 दिल्ली के रहने वाले थे।