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Hernia: हार्निया से पीड़ित था आरसीबी का ये खिलाड़ी, कहीं आप भी न हो जाएं शिकार? जानिए क्या है ये बीमारी

Fri, 02 May 2025 05:26 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आरसीबी के गेंदबाज सुयश शर्मा दो साल तक हार्निया से पीड़ित थे, गुरुवार को टीम ने एक वीडियो जारी करके इसकी जानकारी दी है। हार्निया क्या बीमारी है, ये क्यों होती है और किन लोगों को इसका खतरा अधिक रहता है आइए जानते हैं।
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सुयश शर्मा को हार्निया की बीमारी - फोटो : ANI
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के गेंदबाज सुयश शर्मा दो साल तक हार्निया से पीड़ित थे, गुरुवार को टीम ने एक वीडियो जारी करके इसकी जानकारी दी है। वीडियो में सुयश ने हर्निया की समस्या से अपने लंबे संघर्ष के बारे में बताया। फ्रैंचाइजी ने उन्हें मौजूदा आईपीएल 2025 सीजन की शुरुआत से पहले ऑपरेशन के लिए लंदन भेजा था।

आरसीबी बोल्ड डायरीज पर बात करते हुए सुयश ने कहा कि 2023 तक वह हार्निया के दर्द को कम करने  के लिए इंजेक्शन लेते थे और मैच खेलते थे। उन्हें इस समस्या के बारे में तब तक पता नहीं था जब तक कि आरसीबी ने उन्हें सर्जरी के लिए लंदन नहीं भेजा। सुयश को तीन हर्निया थीं। सर्जरी के बाद अब वह पूरी तरह से ठीक हैं और इस सीजन अच्छा प्रदर्शन भी कर रहे हैं।

अब सवाल ये है कि हार्निया क्या बीमारी है, ये क्यों होती है और किन लोगों को इसका खतरा अधिक रहता है।
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हार्निया की समस्या - फोटो : freepik.com
क्या होती है हर्निया?

हर्निया तब होती है जब आपके पेट के अंदरूनी भाग का कोई हिस्सा किसी छिद्र से बाहर निकल जाता है या उस मांसपेशी या ऊतकों में कमजोरी आ जाती है। हर्निया धीरे-धीरे विकसित होता है।  हार्निया की समस्या के कारण पेट में उभार हो सकता है। इसके कारण आपको खांसने-छींकने, झुकने या भारी चीजों को उठाने आदि के कारण दर्द बढ़ सकता है। डॉक्टर बताते हैं, ऐसी कई दैनिक गतिविधियां और चिकित्सा समस्याएं है जो पेट की दीवार पर दबाव बढ़ाती हैं जिससे भी हर्निया हो सकती है।

सुयश से पहले कई अन्य सेलिब्रिटीज और खिलाड़ियों ने भी हार्निया की समस्या के बारे में बताया था। पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत के लिए रजत पदक जीतने वाले नीरज चोपड़ा भी इससे पीड़ित रह चुके हैं
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पेट की समस्या - फोटो : adobe stock images
क्यों होती है ये दिक्कत?

हर्निया जन्मजात हो सकता है या उन लोगों में विकसित हो सकता है जिनके पेट की दीवार में कमजोरी होती है। कुछ प्रकार की गतिविधियां और चिकित्सा समस्याएं पेट की दीवार पर दबाव बढ़ाती हैं, जिसके कारण भी हर्निया हो सकती हैं। लंबे समय तक कब्ज के कारण अगर शौच करते समय बार-बार और अधिक जोर लगाना पड़ता है तो इसके कारण ये समस्या हो सकती है।

लगातार खांसी, सिस्टिक फाइब्रोसिस, प्रोस्टेट की समस्या, अधिक वजन या मोटापा के अलावा पेट में तरल पदार्थ की अधिकता भी इस समस्या का कारण बन सकती है।

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कब्ज की समस्या - फोटो : Freepik.com
धूम्रपान करने वालों में दोबारा हार्निया का खतरा

अध्ययनों से पता चलता है कि एक बार भले ही आप हार्निया से ठीक हो जाते हैं पर आपकी धूम्रपान की आदत है तो इससे  दोबारा हर्निया होने की आशंका 20 गुना ज्यादा हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि निकोटिन व अन्य रसायन शरीर में कोलेजन (महत्वपूर्ण प्रोटीन) के उत्पादन को कम करते हैं। यह मांसपेशियों व ऊतकों को मजबूत बनाता है, इसमें पेट की दीवार भी शामिल है। कोलेजन कम होने से हर्निया की मरम्मत वाली जगह कमजोर हो जाती है और दोबारा हर्निया का खतरा बढ़ जाता है।
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आहार में करें सुधार - फोटो : Freepik.com
हार्निया का इलाज और बचाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, हार्निया के कारण सभी लोगों में लक्षण नजर आएं ऐसा जरूरी नहीं है। आमतौर पर इसमें पेट में गांठ या उभार दिखता है जो कुछ शारीरिक गतिविधियों के दौरान स्पष्ट नजर आता है। हर्निया के कारण पेट में दर्द या चुभन महसूस होती रह सकती है। पेट पर दबाव बढ़ने की स्थिति में दर्द और जटिलताएं अधिक महसूस हो सकती हैं। हर्निया के अधिकांश मामलों में सर्जरी की आवश्यकता होती है।

डॉक्टर कहते हैं, आप जन्मजात दोष को रोक नहीं सकते। हालांकि पेट की मांसपेशियों और ऊतकों पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए कुछ उपायों को प्रयोग में लाया जा सकता है। स्वस्थ वजन बनाए रखना, आहार में हाई फाइबर वाले खाद्य पदार्थों को शामिल कराना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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