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Health Tips: 'अचानक मौतों' का कोरोना वैक्सीन से नहीं है कोई संबंध, एम्स की स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा

Tue, 16 Dec 2025 02:53 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Risks Of Sudden Cardiac Death: एम्स की एक स्टडी में एक बड़ा खुलासा हुआ है, जिसमें ये पता चला है कि अचानक होने वाले मौतों से कोविड वैक्सीन का कोई सीधा संबंध नहीं है। साथ ही इस अध्ययन में भी पता चला है कि इसके पीछे की ऐसी घटनाओं के पीछे बड़ी वजहें क्या हैं?  
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अचानक मौत और कोरोना वैक्सीन एम्स स्टडी - फोटो : Amar Ujala
Corona Vaccine Link With Heart Attack: बीते कुछ वर्षों में युवाओं में अचानक होने वाली मौतों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। कुछ लोग इसे कोरोना वैक्सीन से जोड़कर देखा रहे थे। इस विषय पर चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए, एम्स दिल्ली ने एक विस्तृत स्टडी में बड़ा खुलासा किया है। एक साल तक चली इस गहन स्टडी में यह साफ हो गया है कि युवाओं में हो रही इन 'अचानक मौतों' का कोरोना वैक्सीन से कोई सीधा संबंध नहीं है। 

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल सहित देश की कई प्रमुख एजेंसियों द्वारा की गई जांचों ने भी इस तथ्य की पुष्टि की है कि भारत में COVID-19 वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावी हैं। एम्स की यह रिपोर्ट 'इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च' में प्रकाशित हुई है, जो इस बात पर मुहर लगाती है कि अचानक हुई मौतों के पीछे के कारण, कोविड वैक्सीन नहीं है बल्कि अन्य स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं हैं।
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वैक्सीन - फोटो : Freepik.com
वैक्सीन लेने और न लेने वालों में समान पैटर्न
एम्स की रिसर्च में 18 से 45 साल के युवाओं के डेटा की गहनता से जांच की गई। इस जांच में यह महत्त्वपूर्ण जानकारी सामने आई कि कोरोना वैक्सीन लेने वाले और वैक्सीन न लेने वाले लोगों में अचानक मौत का खतरा या पैटर्न एक जैसा ही था। यह तथ्य स्पष्ट रूप से स्थापित करता है कि युवाओं में हुई इन आकस्मिक मौतों का टीकाकरण से कोई प्रत्यक्ष कारण नहीं है, बल्कि इनके पीछे अन्य गंभीर कारण जिम्मेदार हैं।

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हार्ट अटैक - फोटो : Adobe stock
'कोरोनरी आर्टरी डिजीज' सबसे बड़ा कारण
स्टडी के अनुसार, युवाओं की अचानक मौत का सबसे बड़ा और प्रमुख कारण 'कोरोनरी आर्टरी डिजीज' CAD यानी दिल की नसों की बीमारी पाई गई है। CAD में हृदय की धमनियों में प्लाक जम जाता है, जिससे ब्लड फ्लो प्रभावित होता है। CAD के अलावा, सांस संबंधी गंभीर समस्याएं भी इन मौतों के लिए जिम्मेदार पाई गई हैं। इसके अलावा दिनचर्या की गलतियां, अनुवांशिक बीमारी, और शरीर में पहले से मौजूद बीमारियों को भी इसका कारण बताया गया है।

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वैक्सीन - फोटो : Freepik.com
वैज्ञानिक पद्धति से की गई स्टडी
यह स्टडी मई 2023 से अप्रैल 2024 के बीच की गई, जिसमें कुल 180 अचानक मौतों की जांच की गई। शोधकर्ताओं ने मौत के कारणों को समझने के लिए पोस्टमार्टम, वर्बल ऑटोप्सी (परिवार के सदस्यों से विस्तृत पूछताछ) और विस्तृत मेडिकल जांच जैसे वैज्ञानिक तरीकों का सहारा लिया। इस जांच में दुर्घटना या आत्महत्या के मामलों को शामिल नहीं किया गया था।
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हृदय रोग - फोटो : adobe stock photos
युवाओं में बढ़ता हृदय रोग का खतरा
स्टडी में एक गंभीर चेतावनी भी दी गई है, जांच किए गए कुल मामलों में से 57.2 % मामले युवाओं 18-45 वर्ष के थे, जो बुजुर्गों 42.8 % से अधिक हैं। यह रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि भारत में युवाओं के बीच दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जो एक गंभीर जन-स्वास्थ्य चिंता का विषय है और इस पर तुरंत ध्यान देने तथा जीवनशैली में आवश्यक बदलाव लाने की जरूरत है।
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मानसिक तनाव से बचें - फोटो : adobe stock images
जीवनशैली पर दें ध्यान
इस स्टडी में अचानक मौतों का बड़ा कारण कोरोनरी आर्टरी डिजीज को बताया गया है, इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं को अपनी जीवनशैली कुछ सकारात्मक सुधार करना बहुत जरूरी है। तनाव प्रबंधन, धूम्रपान और शराब से दूरी, पौष्टिक आहार और नियमित व्यायाम हृदय रोगों के जोखिम को कम करने के लिए बहुत जरूरी है। इसके साथ ही डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर जैसी पूर्व-मौजूदा स्थितियां भी CAD के जोखिम को कई गुना बढ़ा देती हैं।
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वैक्सीन - फोटो : Adobe Stock Images
टीकाकरण और सार्वजनिक विश्वास का महत्व
एम्स की यह स्टडी लोगों के बीच टीकाकरण के प्रति विश्वास को मजबूत करने के लिए बहुत जरूरी है। सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि COVID-19 टीके ने लाखों लोगों की जान बचाई है। यह शोध लोगों को अवैज्ञानिक दावों पर ध्यान न देकर, बल्कि हृदय स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने और आवश्यक टीकाकरण प्राप्त करने के लिए प्रेरित करेगा।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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