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Covid19: मिल गई कोरोना की असरदार दवा? अध्ययन में दावा- इससे अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम 85% तक हो सकेगा कम

Mon, 04 Mar 2024 12:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना संक्रमण की गंभीरता - फोटो : iStock
कोरोना संक्रमण पिछले चार साल से अधिक समय से वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम बना हुआ है। वर्ल्डोमीटर कोरोना अपडेट्स के अनुसार अब तक दुनियाभर में 70 करोड़ से अधिक लोग इस संक्रामक रोग के शिकार हो चुके हैं। संक्रमण और इसके गंभीर जोखिमों के कारण 70 लाख से अधिक लोगों की मौत भी हो चुकी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ, कोरोना के कारण गंभीर रोगों के खतरे को लेकर लोगों को सावधान करते रहे हैं। अध्ययनकर्ता बताते हैं, कोमोरबिडीटी के शिकार और बुजुर्गों में गंभीर रोग और इसके कारण होने वाली जटिलताओं को जोखिम अधिक हो सकता है।

महामारी की शुरुआत से ही कोरोना के खतरों को कम करने के लिए प्रभावी उपचार को लेकर शोध किया जा रहा है। इसी क्रम में एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि संक्रमण की स्थिति में एक दवा के उपयोग से गंभीर रोग विकसित होने और अस्पताल में भर्ती होने के खतरे को कम किया जा सकता है। अमेरिका में इस दवा का इस्तेमाल 12 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए किया जा रहा है।
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कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम - फोटो : iStock
अस्पताल में भर्ती होने से बचाने वाली दवा

हालिया अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार, पैक्सलोविड दवा का उपयोग करने वाले रोगियों में कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम 84% कम देखा गया। इस दवा को संयुक्त राज्य अमेरिका में 12 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, जिन्हें संक्रमण होने का खतरा है उनके लिए प्रयोग में लाया जा रहा है।

जर्नल ऑफ एंटीमाइक्रोबियल कीमोथेरेपी में प्रकाशित शोध की रिपोर्ट में इस दवा की प्रभाविकता को लेकर दावा किया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर संक्रमितों का इलाज कर रहे डॉक्टर्स को लगता है कि रोग गंभीर रूप ले रही है तो इस दवा को इलाज में शामिल करके खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
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कोरोना की दवा - फोटो : iStock
अध्ययन में क्या पता चला?

अध्ययन के लेखकों ने जनवरी से अगस्त 2022 तक लगभग 45,000 रोगियों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड की जांच की, जिनकी कोविड-19 की रिपोर्ट पॉजिटिव थी। अध्ययन में शामिल रोगियों की औसत आयु 47 थी, जिसमें 62% श्वेत और 24% अश्वेत थे। 51 फीसदी लोगों को अध्ययन शुरू होने से पहले वैक्सीन की दो या अधिक टीके लग चुके थे।

अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों में से 201 लोगों को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के 28 दिनों के भीतर अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

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संक्रमण की गंभीरता कम करने वाली दवा - फोटो : iStock
90 फीसदी तक कम हो सकता है गंभीर रोग का खतरा 

शोध के दौरान अध्ययन समूह में लगभग 5,000 लोगों को पैक्स्लोविड दिया गया। मिनेसोटा यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में बताया गया, जिन मरीजों को इलाज के दौरान पैक्सलोविड दिया गया उनमें अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम कम था। 

अध्ययन के लेखकों ने कहा, यह शोध तब किया गया जब दुनियाभर में ओमिक्रॉन प्रमुख रूप से कोरोना वैरिएंट था। इस दवा ने संक्रमितों में गंभीर रोग की स्थिति में अस्पताल में भर्ती होने के खतरे को 85-90 फीसदी तक कम कर दिया। इन परिणामों से पता चलता है कि पैक्सलोविड की मदद से संक्रमण की गंभीरता को कम करने में मदद मिल सकती है।
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कोरोना की दवा (सांकेतिक) - फोटो : Pixabay
क्या है विशेषज्ञों की सलाह?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस दौरान इस दवा पर अध्ययन किया गया है उस समय ओमिक्रॉन और इसके अन्य सब-वैरिएंट्स सक्रिय थे। ओमिक्रॉन वैरिएंट्स की संक्रामकता दर तो अधिक रही है पर इसके कारण गंभीर रोगों का खतरा कम देखा जाता रहा है। ये दवा गंभीर रोगकारक वैरिएंट्स जैसे डेल्टा और अन्य पर कितनी असरदार हो सकती है, इसपर शोध किया जाना शेष है।

अध्ययनकर्ताओं ने सलाह दी है कि इन दवाओं का इस्तेमाल कोविड मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों की सलाह पर ही किया जाना चाहिए। खुद से या बिना किसी प्रिस्क्रिप्शन के इनका उपयोग बिल्कुल न करें। फिलहाल कोरोना की स्थिति में गंभीर रोगों का खतरा सिर्फ उन्हीं लोगों में देखा जा रहा है जो या तो कोमोरबिडीटी के शिकार हैं या फिर जिनका वैक्सीनेशन नहीं हुआ है।


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स्रोत और संदर्भ
COVID-19 hospitalization risk after outpatient nirmatrelvir/ritonavir use, January to August 2022, North Carolina

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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