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Diabetes: टाइप-1 या टाइप-2, कौन-सा डायबिटीज है ज्यादा खतरनाक? यहां जानिए सबकुछ विस्तार से

Sun, 19 Jul 2026 11:35 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज में कौन ज्यादा खतरनाक है? कई लोग मानते हैं कि टाइप-2 डायबिटीज ज्यादा गंभीर है क्योंकि यह अधिक लोगों में होती है, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि टाइप-1 ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इसमें जीवनभर इंसुलिन लेनी पड़ती है।
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डायबिटीज की समस्या - फोटो : Adobe Stock
डायबिटीज दुनियाभर में तेजी से बढ़ती गंभीर बीमारियों में से एक है। भारत में इसका खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक यहां 10 करोड़ से अधिक वयस्क इस बीमारी से पीड़ित हैं। देश की वयस्क आबादी का 11% से ज्यादा हिस्सा डायबिटीज का शिकार है और 13.6 करोड़ लोग प्री-डायबिटिक हैं। डायबिटीज के शिकार आधे से ज्यादा लोगों को अपनी बीमारी का पता ही नहीं चल पाता है।

डायबिटीज वैसे तो कई प्रकार की होती है पर टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज में की सबसे ज्यादा चर्चा की जाती है। कई लोग मानते हैं कि टाइप-2 डायबिटीज ज्यादा गंभीर है क्योंकि यह अधिक लोगों में होती है, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि टाइप-1 ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इसमें जीवनभर इंसुलिन लेनी पड़ती है। 

अगर आपके मन में भी ये सवाल है कि कौन सी डायबिटीज सबसे खतरनाक है तो आइए इसका जवाब जान लेते हैं।
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डायबिटीज हो सकता है खतरनाक - फोटो : Freepik.com
टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज

डॉक्टर बताते हैं,  टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज दोनों अलग-अलग बीमारियां हैं।
 
  • टाइप-1 डायबिटीज में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अग्न्याशय की उन कोशिकाओं को नष्ट कर देती है जो इंसुलिन बनाती हैं। इससे शरीर में इंसुलिन बनना लगभग पूरी तरह बंद हो जाता है और मरीज को जीवित रहने के लिए इंसुलिन इंजेक्शन लेना अनिवार्य हो जाता है।
  • वहीं, टाइप-2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन तो बनाता है, लेकिन कोशिकाएं उसका सही तरीके से उपयोग नहीं कर पातीं। इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। समय के साथ इंसुलिन का उत्पादन भी कम हो सकता है। बढ़ती उम्र, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और आनुवंशिक कारणों से इसका खतरा हो सकता है।
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डायबिटीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
कौन सी ज्यादा खतरनाक?

वरिष्ठ एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ एम.आर खान कहते हैं, कोई भी डायबिटीज कम  या ज्यादा खतरनाक नहीं होती। असली खतरा तब पैदा होता है जब ब्लड शुगर लंबे समय तक कंट्रोल में नहीं रहती है। शुगर कंट्रोल न रहने से आंखों, किडनी, नसों, हृदय और मस्तिष्क को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
 
  • टाइप-1 डायबिटीज में इंसुलिन न लेने पर मरीज में तेजी से डायबिटिक कीटोएसिडोसिस जैसी जानलेवा समस्याओं का जोखिम हो सकता है। 
  • वहीं टाइप-2 डायबिटीज अक्सर वर्षों तक बिना लक्षण के रहती है, जिससे कई मरीजों में बीमारी का पता तब चलता है जब आंख, किडनी, हृदय या नसों को नुकसान शुरू हो चुका होता है। इसलिए दोनों के जोखिम अलग-अलग हैं और दोनों ही गंभीर हो सकती हैं।
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खान-पान में गड़बड़ी से डायबिटीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
टाइप-2 डायबिटीज को कंट्रोल रखना आसान

डॉक्टर कहते हैं, अधिकांश मामलों में टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम किया जा सकता है। 

वजन कंट्रोल रखना, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार जैसी आदतें शुगर कंट्रोल रखने में आपके लिए मददगार हो सकती हैं। वहीं प्रीडायबिटीज की स्थिति में समय रहते जीवनशैली में बदलाव करने से कई लोगों में डायबिटीज की शुरुआत को टाला या धीमा किया जा सकता है। हालांकि जिन लोगों में आनुवंशिक जोखिम अधिक है, उन्हें नियमित जांच कराते रहना चाहिए।

वहीं टाइप-1 डायबिटीज में इंसुलिन इंजेक्शन जरूरी हो जाता है। लाइफस्टाइल में बदलाव से इसे पूरी तरह कंट्रोल नहीं किया जा सकता।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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