ऑस्ट्रेलिया में मोनाश विश्वविद्यालय में प्रोफेसर युमिंग गुओ ने कहा, 'पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) और मृत्युदर के बीच संबंध के लिए कोई सीमा नहीं है, जिससे वायु प्रदूषण के निम्न स्तर से मौत का खतरा बढ़ सकता है।' गुओ ने कहा, 'जितने छोटे कण होते हैं, उतनी ही आसानी से वे फेफड़ों में गहराई तक प्रवेश कर सकते हैं और अधिक टॉक्सिक कॉम्पोनेंट ग्रहण करने के चलते मौत की संभावना बढ़ जाती है।'