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क्या संक्रमण के बाद भी नहीं बन पा रही हैं पर्याप्त एंटीबॉडी? अध्ययन में शोधकर्ताओं ने किए चौंकाने वाले खुलासे

Sat, 01 May 2021 08:31 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
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संक्रमण का मतलब आप दोबारा संक्रमण के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं - फोटो : Pixabay
देश इस समय स्वास्थ्य संबंधी सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। कोरोना वायरस के बदलते स्ट्रेनों को कारण लोगों को तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस दूसरी लहर में सबसे ज्यादा शिकार युवा हो रहे हैं। पिछले साल कोरोना की पहली लहर में विशेषज्ञ मान रहे थे कि जिन लोगों को एक बार संक्रमण हो गया है वह इस वायरस से आगे के लिए सुरक्षित माने जा सकते हैं। इसी आधार पर कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना था कि देश में जल्द ही हर्ड इम्यूनिटी भी विकसित हो सकती है। लेकिन हाल ही में हुए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने ऐसे सभी विचारों को सिरे से खारिज कर दिया है।
आइए जानते हैं इस अध्ययन में शोधकर्ताओं नें किस बारे में लोगों को सचेत किया है?
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संक्रमण के बाद भी युवा सुरक्षित नहींं - फोटो : Pixabay
युवाओं में नहीं कम होता है खतरा
माउंट सिनाई के इकन स्कूल ऑफ मेडिसिन और नेवल मेडिकल रिसर्च सेंटर के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन में कोरोना वायरस संक्रमण और इससे बनने वाली एंटीबॉडी को लेकर कई मुद्दों पर प्रकाश डाला गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि कोरोना वायरस से एक बार संक्रमित हो चुके युवा स्वयं को वायरस के अगले हमले से पूरी तरह सुरक्षित नहीं मान सकते हैं। एक बार संक्रमित होने के बाद भी युवाओं में दोबारा संक्रमण का खतरा कम नहीं होता है।
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कोरोना वायरस को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : पेक्सेल्स
द लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि मई से लेकर नवंबर 2020 के बीच शोधकर्ताओं ने 18-20 साल की आयु वाले 2346 लोगों पर यह अध्ययन किया। मई 2020 में अध्ययन की शुरुआत में 189 लोग सीरोपॉजिटिव जबकि 2247 सीरोनेगेटिव थे। अध्ययन के अंत में नवंबर 2020 में जब शोधकर्ताओं ने इनकी दोबारा जांच की तो 189  सीरोपॉजिटिव लोगों में से 19 को दोबारा संक्रमित पाया गया।

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दोबारा संक्रमित लोगों में कम पाई गईं एंटीबॉडीज - फोटो : Social media
नहीं बन पा रही हैं पर्याप्त एंटीबॉडीज
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को दोबारा कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया उनमें वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी का स्तर कम था। विशेषज्ञों ने पाया कि संक्रमण के बाद शरीर में वायरस के खिलाफ बनी एंटीबॉडीज जल्द ही खत्म हो जाती हैं जिससे लोगों में दोबारा संक्रमण का खतरा हो सकता है।
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वैक्सिनेशन ही सबसे प्रभावी उपाय - फोटो : Social Media
क्या हो सकते हैं संक्रमण से बचने के पुख्ता उपाय?
इस बारे में बात करते हुए कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष सिंघल बताते हैं कि कोरोना के नए स्ट्रेनों के कारण वह लोग भी दोबारा से संक्रमित हो रहे हैं जिनके शरीर में पहले संक्रमण के बाद एंटीबॉडीज बन चुकी हैं। ऐसी स्थिति में जब वायरस बार-बार अपना रूप बदल रहा है, संक्रमण से बचने के लिए वैक्सीन ही सबसे प्रभावी उपाय हो सकता है। भारत में तैयार दोनों वैक्सीन कोरोना के सभी स्ट्रेनों के खिलाफ अब तक प्रभावी साबित हुई हैं। 
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स्रोत और संदर्भ: 
SARS-CoV-2 seropositivity and subsequent infection risk in healthy young adults: a prospective cohort study
https://www.thelancet.com/journals/lanres/article/PIIS2213-2600(21)00158-2/fulltext

अस्वीकरण नोट:  यह लेख द लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। अमर उजाला राउटर्स के इस रिपोर्ट को लेकर कोई दावा नहीं करता है।
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