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Covid-19 के हैरान करने वाले आंकड़े: वीक डेज की तुलना में वीकेंड पर ज्यादा रिपोर्ट हो रही है मौत, जानिए इसके कारण?

Thu, 21 Apr 2022 02:04 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के कारण मौत के मामले - फोटो : istock
कोरोना संक्रमण वैश्विक स्तर पर पिछले दो साल से अधिक समय से चिंता का कारण बना हुआ है। हालिया रिपोर्ट्स में जिस तरह से एक्सई और ओमिक्रॉन BA.2 (स्टील्थ) वैरिएंट्स की संक्रामता को लेकर दावे किए जा रहे हैं, वह निश्चित ही परेशानी बढ़ाने वाले हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक रिपोर्ट में बताया है कि हाल ही में सामने आया कोरोना का एक्सई वैरिएंट, अब तक सबसे संक्रामक माने जा रहे स्टील्थ ओमिक्रॉन से भी 10 फीसदी तेजी से लोगों को संक्रमित कर सकता है। संक्रमण के अलावा वैश्विक स्तर पर कोरोना से होने वाली मृत्यु अब भी विशेषज्ञों के लिए बड़ी मुसीबत का कारण बनी हुई है।

डेल्टा वैरिएंट को छोड़ दिया जाए तो कोरोना के अन्य दूसरे वैरिएंट से मृत्यु का जोखिम कम माना जाता रहा है। इस बीच कैनेडियन अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बड़ा चौंकाने वाला दावा किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सप्ताह के दिनों की तुलना में वीकेंड यानी कि शनिवार और रविवार को कोरोना से मृत्युदर अधिक हो सकता है। आइए इस बारे में आगे विस्तार से समझते हैं कि शोधकर्ताओं का यह दावा किस आधार पर है और इससे संबंधित आंकड़े क्या कहते हैं?
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कोरोना से मृत्युदर को लेकर अध्ययन - फोटो : Pixabay
मौत के आंकड़ों में अंतर

कोरोना वायरस में लगातार हो रहा म्यूटेशन इसे काफी अप्रत्याशित बनाता जा रहा है, यही कारण है अभी तक इस बारे में वैज्ञानिक स्पष्ट दावा नहीं कर पा रहे हैं कि आखिर यह महामारी कब तक जारी रहेगी? कनाडा स्थित टोरंटो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि वैश्विक स्तर पर कोरोना वायरस महामारी के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा सप्ताह के दिनों (सोमवार से शुक्रवार) की तुलना में वीकेंड (शनिवार और रविवार) को अधिक रहा है। 
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कोरोना से वीकेंड पर मृत्यु अधिक - फोटो : Pixabay
अध्ययन में क्या पता चला?

इस अध्ययन के लिए विशेषज्ञों की टीम ने मार्च 2020 से मार्च, 2022 के बीच डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी वैश्विक मृत्यु के आंकड़ों की समीक्षा की। अध्ययन के दौरान पाया कि सप्ताह के दिनों (8,083) की तुलना में सप्ताहांत (8,532) पर मौत के आंकड़ों में 6 फीसदी की वृद्धि देखी गई। विशेषज्ञों ने इसके कारणों को जानने के लिए कई मापदंडों पर विस्तार से समीक्षा की जिससे कई बाते सामनें आईं। फिलहाल पहले यह जानते हैं कि दुनिया के देशों में वीकेंड और वीक डेज में मौत का आंकड़ा कैसा रहा?

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कोरोना के गंभीर मामलों में मृत्यु का खतरा - फोटो : iStock
क्या कहता है डेटा?

आंकड़ों की समीक्षा के दौरान विशेषज्ञों ने कई देशों में वीकेंड और वीक डेज में मौत के आंकड़ों में अंतर दर्ज किया। संयुक्त राज्य अमेरिका में सप्ताह के दिनों में औसतन जहां 1,220 लोगों की मौत हुई वहीं वीकेंड पर यह आंकड़ा 22% की वृद्धि के साथ 1,483 रहा। इसी तरह ब्राजील में सप्ताह के दिनों में 823 की तुलना में वीकेंड पर 29% की वृद्धि के साथ मौत का आंकड़ा औसत 1,061 दर्ज  किया गया। ब्रिटेन के भी आंकड़े कुछ ऐसे ही रहे, यहां सोमवार से शुक्रवार के बीच जहां 215 लोगों की जान गई, वहीं वीकेंड पर यह आंकड़ा 11 प्रतिशत बढ़कर 239 पहुंच गया। 
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दुनियाभर में जारी कोरोना के मामले - फोटो : pixabay
मौत के आंकड़ों में अंतर का कारण?

अध्ययन के बारे में शोधकर्ताओं में से एक डॉ फिज़ा मंजूर कहते हैं, ऐसा नहीं है कि वैश्विक स्तर का ट्रेड भी ऐसा ही रहा। जैसे जर्मनी में सप्ताह के दिनों में जहां औसत 187 मौतें हुईं वहीं सप्ताहांत में यह घटकर 137 रह गई। डॉ मंजूर कहते हैं, अलग-अलग देशों के आंकड़े अलग हैं, ऐसे में किसी एक कारक को मौतों के अंतर के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता है। हालांकि जो एक बात सभी जगह से आम पाई गई है वह यह है कि वीकेंड के दिनों छुट्टी के कारण स्टाफिंग, अस्पतालों की क्षमता और रोगियों को इलाज की कमी संभवत: इसका एक कारण हो सकती है। 
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कोरोना संक्रमण और मृत्यु का जोखिम - फोटो : pixabay
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अध्ययन के निष्कर्ष इस महीने के अंत में पुर्तगाल में यूरोपियन कांग्रेस ऑफ क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी एंड इंफेक्शियस डिजीज (ECCMID) में प्रस्तुत किए जाएंगे। वीकेंड और वीक डेज में मौत के अंतर के लिए विशेषज्ञ छुट्टी के कारण इलाज से संबंधित सेवाओं की कमी को मानते हैं। इस अध्ययन को अभी प्रमाणिकता मिलना बाकी है।

फिलहाल, विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से वैश्विक स्तर पर कोरोना के नए वैरिएंट्स सामने आ रहे हैं, ऐसे में बचाव के उपाय करते रहना हम सभी के लिए आवश्यक है, तभी इस महामारी के प्रकोप को कम किया जा सकेगा।  



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नोट:
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। अमर उजाला इस दावे की पुष्टि नहीं करता है। अध्ययन का अभी रिव्यु होना शेष है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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