कोरोना के नए वैरिएंट्स को विशेषज्ञ तीसरी लहर के मुख्य कारण के रूप में देख रहे हैं। कई रिपोर्टस में दावा किया जा रहा है कि, चूंकि बच्चों का अब तक वैक्सीनेशन नहीं हुआ है, ऐसे में तीसरी लहर के दौरान इनमें संक्रमण का खतरा सबसे अधिक हो सकता है। बच्चों को संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए वैक्सीनों का परीक्षण जारी है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि अगर बच्चे कोरोना से संक्रमित हो जाते हैं, तो क्या उनसे अन्य लोगों को भी संक्रमण का खतरा हो सकता है?
बच्चों से अन्य लोगों को कोरोना के संक्रमण का खतरा कितना अधिक हो सकता है? इसी को लेकर हाल ही में किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बड़ा खुलासा किया है। कैनेडियन पब्लिक हेल्थ एजेंसी द्वारा किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि किशोरों की तुलना में शिशुओं और बच्चों से कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा अधिक हो सकता है। संक्रमित बच्चे संक्रमण का वाहक हो सकते हैं और इनसे परिवार के अन्य लोगों में तेजी से संक्रमण फैलने का डर हो सकता है। आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि आखिर बच्चों से कोरोनावायरस के संक्रमण का खतरा इतना अधिक क्यों माना जा रहा है? इस बारे में शोधकर्ताओं ने किन महत्वपूर्ण विषयों पर जोर दिया है?