स्ट्रोक, दुनियाभर में तेजी से बढ़ते जानलेवा जोखिमों में से एक है। विशेषकर युवा आबादी में इसके बढ़ते खतरे को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंतित हैं। स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह में बाधित हो जाता है। रक्त के माध्यम से ही मस्तिष्क कोशिकाओं को ऑक्सीजन और पोषक तत्व मिलता रहता है। यदि इसमें कोई बाधा आ जाए तो जिन कोशिकाओं को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है, उनके डेड होने का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लगभग सभी प्रकार के स्ट्रोक के 10 से 15 प्रतिशत मामले 18 से 50 वर्ष की आयु में होते हैं।
शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को पहले एक स्ट्रोक हो चुका है, उनमें अगले स्ट्रोक का खतरा 25 फीसदी अधिक हो सकता है। स्ट्रोक के कारण कई और भी जोखिम हो सकते हैं, इसलिए कम उम्र से ही इससे बचाव के तरीकों को अपनाते रहना बहुत आवश्यक हो जाता है। आइए इसके जोखिम कारकों के बारे में जानते हैं।