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Johns Hopkins: पहले स्ट्रोक के बाद दूसरे का खतरा 25% अधिक, सभी लोगों के लिए बचाव के ये तीन उपाय जरूरी

Mon, 10 Jul 2023 02:02 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ब्रेन स्ट्रोक की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : istock
स्ट्रोक, दुनियाभर में तेजी से बढ़ते जानलेवा जोखिमों में से एक है। विशेषकर युवा आबादी में इसके बढ़ते खतरे को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंतित हैं। स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह में बाधित हो जाता है। रक्त के माध्यम से ही मस्तिष्क कोशिकाओं को ऑक्सीजन और पोषक तत्व मिलता रहता है। यदि इसमें कोई बाधा आ जाए तो जिन कोशिकाओं को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है, उनके डेड होने का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लगभग सभी प्रकार के स्ट्रोक के 10 से 15 प्रतिशत मामले 18 से 50 वर्ष की आयु में होते हैं। 

शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को पहले एक स्ट्रोक हो चुका है, उनमें अगले स्ट्रोक का खतरा 25 फीसदी अधिक हो सकता है। स्ट्रोक के कारण कई और भी जोखिम हो सकते हैं, इसलिए कम उम्र से ही इससे बचाव के तरीकों को अपनाते रहना बहुत आवश्यक हो जाता है। आइए इसके जोखिम कारकों के बारे में जानते हैं।
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स्ट्रोक के कारण स्थाई विकलांगता का खतरा - फोटो : Pixabay
स्ट्रोक के कारण होने वाली समस्याएं

जॉन्स हॉप्किंस के विशेष बताते हैं स्ट्रोक के कारण स्थाई विकलांगता होने का खतरा भी रहता है, यह इस पर निर्भर करता है कि मस्तिष्क में कितने समय तक रक्त प्रवाह की कमी होती है और कौन सा हिस्सा प्रभावित है। इसके कारण शरीर का एक हिस्सा लकवाग्रस्त हो सकता है या मांसपेशियों पर आप नियंत्रण खो सकते हैं। स्ट्रोक से पीड़ित कई लोगों को याददाश्त में कमी का भी अनुभव हो सकता है। सोचने, तर्क करने, निर्णय लेने और चीजों को समझने में कठिनाई हो सकती है। 

इन सबसे भी बड़ा जोखिम आपको फिर से स्ट्रोक होने का खतरा हो सकता है। आइए जानते हैं कि इसके जोखिमों से बचाव के लिए किन बातों का ध्यान रखना सबसे आवश्यक माना जाता है?
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ब्लड प्रेशर बढ़ने से हो सकता है स्ट्रोक - फोटो : istock
ब्लड प्रेशर-शुगर लेवल दोनों को रखें कंट्रोल

स्ट्रोक का सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों में देखा जाता है, जिनका ब्लड प्रेशर अक्सर बढ़ा हुआ रहता है। उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करना, सबसे महत्वपूर्ण है जो आपके स्ट्रोक के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है। इसके लिए अस्वास्थ्यकर जीवनशैली में बदलाव और दवाओं का नियमित रूप से सेवन करना सबसे जरूरी है।

ब्लड प्रेशर की ही तरह शुगर को कंट्रोल करना भी आवश्यक है, इसके बढ़ने के कारण भी ब्लड प्रेशर से संबंधित समस्याएं होने लग जाती हैं।

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आहार को स्वस्थ और पौष्टिक रखें - फोटो : iStock
आहार में कोलेस्ट्रॉल और सेचुरेटेड फैट की मात्रा कम करें

स्ट्रोक के खतरे से बचाव के लिए जरूरी है कि आपका ब्लड प्रेशर-शुगर लेवल दोनों कंट्रोल रहे, और इसके लिए जरूरी है कि आप स्वस्थ और पौष्टक चीजों का सेवन करें। लो-कोलेस्ट्रॉल और लो-फैट वाली चीजों को खाने से धमनियों में जमाव कम हो सकता है। स्वस्थ भोजन करने से वजन को कंट्रोल बनाए रखना भी आसान होता है और यह स्ट्रोक के जोखिम कारकों से भी आपको सुरक्षित रखने में सहायक है।
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व्यायाम करना सेहत के लिए बहुत जरूरी - फोटो : Istock
नियमित रूप से व्यायाम जरूरी

एरोबिक व्यायाम को स्ट्रोक के खतरे को कम करने वाला पाया गया है। व्यायाम रक्तचाप को कम करता है, गुड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाता है और रक्त वाहिकाओं और हृदय के समग्र स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है। यह आपको वजन कम करने, मधुमेह को नियंत्रित करने और तनाव के स्तर को भी कंट्रोल करने में मदद करता है।

रोजाना कम से कम 30 मिनट तक मध्यम शारीरिक गतिविधि  जैसे वॉकिंग, जॉगिंग, तैराकी या साइकिल चलाने का अभ्यास करें। ये आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होगा। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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