बच्चों में ऑटिज्म, वैश्विक स्तर बढ़ती हुई समस्या है जो उनके क्वालिटी ऑफ लाइफ के लिए समस्याएं बढ़ा देती है। इससे प्रभावित बच्चों के लिए दूसरों के साथ बातचीत करना, सीखने और चीजों को समझने की क्षमता कम हो सकती है, यह व्यवहार में परिवर्तन का भी कारण बन सकती है। मसलन ऑटिज्म के शिकार बच्चों के लिए सामान्य जीवन के कई कार्यों को करने में समस्या हो सकती है।
विशेषज्ञों ने तकनीकी के माध्यम से बच्चों में इस समस्या की पहचान को आसान बना दिया है। ऑटिज्म दुनिया की तीसरी सबसे आम विकासात्मक विकलांगता की समस्या है। अनुमान है कि भारत में लगभग 18 मिलियन लोग ऑटिज्म से पीड़ित हैं।
एक ऐप के साथ किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि इसकी मदद से बच्चों में ऑटिज्म और संबंधित न्यूरोडेवलपमेंटल विकारों की आसानी से पहचान की जा सकेगी। गौरतलब है कि ऑटिज्म के निदान और पुष्टि के लिए प्रशिक्षित पेशेवरों की आवश्यकता होती है, लेकिन अधिकांश ऑटिस्टिक लोग ऐसे हिस्सों में रहते हैं जहां ऑटिज्म विशेषज्ञ बहुत कम या बिल्कुल नहीं हैं। ऑटिज्म के बारे में जागरूकता भी बहुत कम है। इस स्थिति में ऐप के माध्यम से समय रहते इस समस्या का पता लगाया जा सकेगा।