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सेहत की बात: ब्रेन स्टोक तो सुना होगा पर क्या स्पाइनल स्ट्रोक के बारे में जानते हैं? गंभीर होते हैं इसके लक्षण

Mon, 26 Jun 2023 12:50 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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स्पाइन स्ट्रोक की समस्या - फोटो : istock
ब्रेन स्ट्रोक की समस्या पिछले एक-दो दशकों में काफी तेजी से बढ़ी है, अकेले अमेरिका में ही ब्रेन स्ट्रोक के कारण हर साल 1.40 लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। इसके जोखिम, कारण और होने वाली समस्याओं के बारे में आप भी जरूर वाकिफ होंगे, पर क्या आप स्पाइनल स्ट्रोक के बारे में जानते हैं? ब्रेन स्ट्रोक की तरह ही इस समस्या का खतरा भी काफी तेजी से बढ़ता देखा जा रहा है। यह ब्रेन स्ट्रोक की तरह जानलेवा तो नहीं है पर आपके जीवन के लिए कई प्रकार की कठिनाइयों को बढ़ाने वाली जरूर हो सकती है।

ब्रेन स्ट्रोक, मस्तिष्क में रक्त प्रवाह के बाधित हो जाने के कारण होने वाली दिक्कत है, स्पाइनल स्ट्रोक में भी समस्या ऐसे ही शुरू होती है। रीढ़ की हड्डी को ठीक से काम करने के लिए निरंतर रक्त आपूर्ति की आवश्यकता होती है। यह आपके शरीर के बाकी हिस्सों में नर्व इंपल्स (तंत्रिका आवेग) भेजने में मदद करती है। यही संकेत बुनियादी शारीरिक गतिविधियों में मदद करते हैं जैसे कि आपके हाथ और पैर हिलाना, और यह सुनिश्चित करना कि आपके सभी अंग ठीक से काम कर रहे हैं। स्पाइनल स्ट्रोक के कारण यह प्रक्रिया बाधित हो सकती है।

आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं।
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रीढ़ की हड्डी में रक्त प्रवाह बाधित होने की समस्या - फोटो : istock
स्पाइन स्ट्रोक की समस्या के बारे में जानिए

यदि रीढ़ की हड्डी में रक्त का प्रवाह प्रभावित हो जाती है या कोई चीज इसे अवरुद्ध कर देती है, तो इसे अपना काम करने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाता है। इस समस्या को स्पाइनल स्ट्रोक या स्पाइन कार्ड इफ्रैक्शन कहा जाता है।

आमतौर पर रक्त के थक्के बनने (इस्केमिक स्पाइनल स्ट्रोक) या रक्तस्राव (हेमोरेजिक स्पाइनल स्ट्रोक) के कारण रीढ़ को पोषक तत्व और ऑक्सीजन युक्त रक्त की आपूर्ति बाधित हो सकती है, ऐसी स्थिति में रीढ़ की हड्डी के ऊतकों और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने लगता है, वे डेड हो सकते हैं। हालांकि स्पाइनल स्ट्रोक के मामले काफी दुर्लभ माने जाते हैं।
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स्पाइन स्ट्रोक की समस्याएं - फोटो : iStock
स्पाइन स्ट्रोक के क्या होते हैं लक्षण?

स्ट्रोक होने के बाद आपको कुछ मिनटों या घंटों में लक्षण दिखाई दे सकते हैं और समय बीतने के साथ-साथ  ये बदतर होते जाते हैं। हर व्यक्ति में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे आपकी रीढ़ का कौन सा हिस्सा प्रभावित है।
  • मांसपेशियों की ऐंठन-चलने में कठिनाई
  • अंगों का सुन्न हो जाना।
  • मूत्राशय पर नियंत्रण न होना।
  • लकवा मार जाना
  • सांस लेने में दिक्क्त।
  • गंभीर मामलों में, स्पाइनल स्ट्रोक से मृत्यु भी हो सकती है।

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स्पाइनल स्ट्रोक की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : iStock
किन वजहों से हो सकती है ये समस्या?

अधिकांश मामलों में स्पाइनल स्ट्रोक की समस्या रक्त वाहिकाओं के आकार में परिवर्तन के कारण होती हैं। रक्त वाहिकाओं की दीवारें मोटी होने के कारण ये संकीर्ण हो सकती हैं, जिससे खून का संचार बाधित हो जाता है। यह उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या भी है।

कुछ स्थितियां हैं जो आपमें इसके जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती हैं जैसे हाई कोलेस्ट्रॉल- हाई ब्लड प्रेशर की समस्या, हृदय रोग, मोटापा, मधुमेह, अधिक धूम्रपान या शराब का सेवन और शारीरिक निष्क्रियता की समस्या।
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स्पाइनल स्ट्रोक की समस्या - फोटो : iStock
स्पाइन स्ट्रोक का इलाज और बचाव के तरीके

स्पाइनल स्ट्रोक की समस्या में इसके इलाज के लिए पहले उन कारणों को जानने की कोशिश की जाती है जो रक्त के प्रवाह को बाधित करने वाली होती हैं। इसके आधार पर कुछ दवाओं और गंभीर स्थिति में सर्जरी की भी आवश्यकता हो सकती है।

रीढ़ की हड्डी के स्ट्रोक के मामले बहुत दुर्लभ हैं लेकिन ये बहुत गंभीर भी हो सकते हैं। कुछ मामलों में यह लकवा का कारण बन सकती है जिससे जीवन की गुणवत्ता पर असर देखा जाता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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