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क्या 'इम्यूनिटी' बढ़ाने वाले मसाले हमारे लिए दवाओं का विकल्प हो सकते हैं?

Fri, 12 Jun 2020 09:33 PM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
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बहुत से मसाले तो एशिया से ही सारी दुनिया को नसीब हुए हैं
इंसान सदियों से मसालों का इस्तेमाल करता आया है। हल्दी और मिर्च के बिना तो भारत में किसी पकवान की कल्पना भी नहीं की जा सकती। बहुत से मसाले तो एशिया से ही सारी दुनिया को नसीब हुए हैं। मसाले न सिर्फ खाने को स्वादिष्ट बनाते हैं बल्कि हमारी सेहत के लिए भी मुफीद बताए जाते हैं। इस दावे को लेकर हर तरह के मसालों पर रिसर्च भी खूब हुई है।

हाल के दिनों में मसालों को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। जैसे, नींबू का रस पानी में मिलाकर पीने से वजन कम हो जाता है। हल्दी वाला दूध पीने से किसी भी तरह के दर्द में आराम मिलता है। गला खराब हो तो अदरक वाली चाय इसका रामबाण इलाज है..... वगैरह-वगैरह।
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बताया जाता है कि 2016 में अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव में प्रचार के दौरान हिलरी क्लिंटन खुद को बीमारियों से बचाने के लिए हर रोज एक लाल मिर्च खाती थीं। हल्दी, जो एशिया में सदियों से इस्तेमाल हो रही है, अब सुपरफूड की श्रेणी में आ गई है। दुनिया भर के कॉफी शॉप में 'गोल्डन लाते' के नाम से हल्दी वाली कॉफी परोसी जाने लगी है।
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sadf - फोटो : Getty Images
मसालों का असल में कितना फायदा?
इन दिनों तो हल्दी के गुणों को लेकर ये मैसेज खूब वायरल भी हो रहा है कि हल्दी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का सबसे अच्छा माध्यम है। क्या सच में मसाले हमारे खाने को स्वादिष्ट बनाने के साथ-साथ हमें बीमारियों से भी बचाते हैं? या कोई मसाला हमें नुकसान भी पहुंचा सकता है?

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मसालों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होनी वाली चीज है -लाल मिर्च। बहुत सी रिसर्च में मिर्च से सेहत को होने वाले फायदों पर भी चर्चा हुई है। लेकिन इसके फायदे और नुकसान दोनों हैं। लाल मिर्च में सबसे अहम तत्व है- कैपसाइसिन। जब हम मिर्च खाते हैं तो कैपसाइसिन शरीर में तापमान का तालमाल बैठाने वाली कोशिकाओं के संपर्क में आता है और दिमाग को गर्मी महसूस करने का सिग्नल देता है। कुछ रिसर्च का ये भी दावा है कि कैपसाइसिन इंसान को लंबे समय तक जीवित रखने में सहायक है।
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turmeric
लाल मिर्च के फायदे
2019 में इटली में हुई रिसर्च के मुताबिक, जो लोग हफ्ते में चार दिन, लाल मिर्च में बना खाना खाते हैं, उनकी समय से पहले मौत का खतरा कम होता है। इसी तरह की एक और रिसर्च 2015 में चीन में की गई थी। यहां ये रिसर्च लाल मिर्च का सेवन करने वाले करीब पांच लाख सेहतमंद लोगों पर की गई थी।
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turmeric
रिसर्च में पाया गया कि जो लोग हफ्ते में एक दिन मिर्च खाते हैं, उनकी तुलना में हर रोज मिर्च का सेवन करने वालों की उम्र ज्यादा होती है। यानी ऐसे लोगों में कैंसर, दिल की बीमारियां और सांस संबंधी बीमारियां काफी कम होती हैं। मगर इस बात का ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि सेहत बचाने के लिए ज्यादा से ज्यादा लाल मिर्च का इस्तेमाल शुरू कर दिया जाए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कहने का मतलब ये है कि मिर्च वाले खानों का सेवन करने से मेटाबॉलिक एक्टिविटी यानी खाना पचाने की क्रिया दुरुस्त रहती है। कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है जिससे दिल की बीमारियों की आशंका कम हो जाती है। एक रिसर्च में ये भी कहा गया है कि कैपसाइसिन शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ा देती है जो कि हमारा शरीर किसी काम के दौरान जलाता रहता है। ये हमारी भूख को भी कम रखता है।

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हल्दी में औषधीय गुण हैं
बहुत ज्यादा मिर्च खाने से भी बचें
कतर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर जुमिन शी कहती हैं कि मिर्च मोटापे की शिकायत दूर करता है और हाई ब्लड प्रेशर वालों के लिए भी सहायक है। लेकिन प्रोफेसर जुमिन शी ये भी कहती हैं कि जो लोग मिर्च का सेवन ज्यादा करते हैं उनका दिमाग़ बहुत तेज काम नहीं करता।

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lal mirch
खास तौर से याददाश्त के मामले तो हालत और भी खराब हो जाते हैं। वो कहती हैं जो लोग हर रोज 50 ग्राम मिर्च खाते हैं उनके लिए खतरा बहुत ज्यादा है। इसके अलावा मिर्च खाने के बाद अक्सर लोगों को जलन की शिकायत होती है। ये बात भी रिसर्चरों के लिए काफी दिलचस्प है। थोड़ी बहुत जलन का होना स्वाभाविक है।

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Shimla mirch - फोटो : pexels.com
जैसा कि हम कैफीन के मामले में देखते हैं। कैफीन का सेवन के साथ ही हमारे मेटाबोलिज्म को बढ़ा देता है, जिसकी वजह से हमें लगता है कि हम काम के लिए फिर से तरोताजा हो गए हैं। 2014 की एक रिसर्च रिपोर्ट कहती है कि अभी तक ये साफ नहीं है कि अगर हम कम मात्रा में मिर्च लेते हैं तो उसका हमें कितना फायदा होता है।

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turmeric
हल्दी के कितने फायदे?
इसी तरह हल्दी को सर्वगुणसंपन्न कहा जाता है। हल्दी में क्योरक्यूमिन नाम का तत्व बड़ी मात्रा में पाया जाता है। इसके छोटे-छोटे अणु जलन, तनाव, दर्द और भी कई तरह की तकलीफें दूर करने में काफी सहायक होते हैं। हल्दी के अनेक गुण गिनाए जाते हैं। लेकिन इससे जुड़े दावों कई खामियां हैं।

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टरमरिक लेमन टी
लैब में किए गए कई अध्ययनों में पाया गया है कि क्योरक्यूमिन में कैंसर जैसी घातक बीमारी से लड़ने की क्षमता होती है। लेकिन लैब का वातावरण मानव शरीर से अलग होता है। क्योरक्यूमिन पानी में आसानी से नहीं घुलती। इसका मतलब है कि जितनी हल्दी हम खाते हैं, उसका पूरा फायदा हमारे शरीर को नहीं मिलता।

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मछली - फोटो : Pixabay
रिसर्चर फ्रीडमेन के मुताबिक लोगों को ऐसा खाना पसंद आता है जो गर्म, ठंडा, सूखा और नमी वाला हो। वो इन सभी के बीच संतुलन चाहता है और खाने में यही काम करती है हल्दी। मिसाल के लिए मछली ठंडा और गीला आहार है लेकिन उसे गर्म और सूखा बनाने का काम करते हैं मसाले। इसके अलावा मसालों का आयुर्वैदिक महत्व भी है। भारत में तो हजारों साल से मसालों के इस महत्व को प्राथमिकता दी गई है। पश्चिमी देशों के लिए ये खोज बिल्कुल नई है। लिहाजा वो इसे नए दौर की दवाओं के तौर पर देख रहे हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दवा का विकल्प नहीं हैं मसाले
फ्रीडमेन कहते हैं कि नए समाज का मसालों के प्रति बढ़ता रुझान हमें मध्यकाल के उस दौर में ले जा रहा है जहां आधुनिक दवाओं और पारंपरिक दवाओं के बीच एक मोटी दीवार थी। उस दौर में खुद को आधुनिक कहने वाले आयुर्वेद और घरेलू नुस्खों को अंधविश्वास समझे जाते थे।

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turmeric
एक वक्त में हल्दी के औषधीय गुणों के लेकर बहुत हल्ला मचा तो रिसर्चर कैथरीन नेल्सन ने इस पर रिसर्च की। रिसर्च में उन्होंने पाया कि जब हल्दी खाने में अन्य मसालों के साथ पकती है तो उसके रासायनिक गुण बदल जाते हैं। साथ ही अगर हल्दी में औषधीय गुण हैं भी तो वो क्योरक्यूमिन की वजह से नहीं हैं। हल्दी का ज्यादा इस्तेमाल करने से नुकसान नहीं होगा लेकिन इसे एक दवा के तौर पर इस्तेमाल करने की सलाह भी वो नहीं देतीं। मिर्च और हल्दी के औषधीय पहलुओं पर जितनी भी रिसर्च हुई हैं वो सभी लैब में हुई हैं।
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मसाले
मानव शरीर में इनका असर कुछ और होता है। लिहाजा इन दोनों के आपसी संबंध और कारणों के बीच ताल्लुक में कोई सीधा रिश्ता तलाशना मुश्किल है। साथ ही ये देखना भी जरुरी है कि हम हल्दी और मिर्च का इस्तेमाल किस शक्ल में कर रहे हैं। किसी भी मसाले का इस्तेमाल स्वाद और इच्छानुसार किया जा सकता है। लेकिन दवा समझकर इसका सेवन बिल्कुल ना करें।
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