स्पेनिश फ्लू
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इस बीमारी की शुरुआत 29 मई, 1918 को हुई थी जब पहले विश्व युद्ध के मोर्चे से लौट रहे भारतीय सैनिकों का जहाज बंबई बंदरगाह पर आकर लगा था और करीब 48 घंटों तक वहां लंगर डाले खड़ा था। मेडिकल इतिहासकार और 'राइडिंग द टाइगर' पुस्तक के लेखक अमित कपूर लिखते हैं, "10 जून, 1918 को पुलिस के सात सिपाहियों को जो बंदरगाह पर तैनात थे, नजले और जुकाम की शिकायत पर अस्पताल में दाखिल कराया गया था। ये भारत में संक्रामक बीमारी स्पेनिश फ्लू का पहला मामला था। तब तक ये बीमारी पूरी दुनिया में फैल चुकी थी।"
एक अनुमान है कि इस बीमारी से पूरी दुनिया में 10 से 20 करोड़ लोगों की मौत हुई थी। जॉन बैरी अपनी किताब 'द ग्रेट इनफ्लुएंजा - द एपिक स्टोरी ऑफ द डेडलिएस्ट पेंडेमिक इन हिस्ट्री' में लिखते हैं, ''साढ़े 10 करोड़ की आबादी वाले अमेरिका में इस बीमारी से करीब 6 लाख 75 हजार लोग मारे गए थे। 1918 में इस बीमारी से पूरी दुनिया में इतने लोग मर चुके थे जितने पहले किसी बीमारी से नहीं मरे थे। 13वीं सदी में फैली ब्यूबोनिक प्लेग में यूरोप की 25 फ़़ीसदी आबादी जरूर खत्म हो गई थी लेकिन तब भी 1918 में फैले स्पेनिश फ्लू से मरने वालों की संख्या उससे भी अधिक थी।''