फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महिला स्वास्थ्य: गर्भपात की दवाओं को लेकर बड़ा फैसला, 2027 में पहली बार यहां बदलने जा रहा है नियम

Sat, 19 Sep 2026 03:03 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दक्षिण कोरिया 2027 की शुरुआत में नौ सप्ताह तक की गर्भावस्था के लिए गर्भपात की दवाओं को मंजूरी देने की तैयारी कर रहा है। सरकार इसे सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा की दिशा में कदम बता रही है, जबकि धार्मिक और डॉक्टर संगठनों ने सुरक्षा और कानूनी सुरक्षा की मांग की है।
विज्ञापन
1 of 4
गर्भपात को लेकर बड़ा फैसला - फोटो : Adobestock
गर्भपात को लेकर लोगों के मन में कई सारे सवाल रहते हैं। किन स्थितियों में गर्भपात कराया जा सकता है, इसके कानूनी अधिकार क्या हैं और गर्भ के कितने महीनों तक गर्भपात के लिए डॉक्टर के पास जा सकते हैं?

भारत में 'मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट, 1971' और इसके 2021 के संशोधन के तहत गर्भपात लीगल है। 20-24 हफ्ते के गर्भ को कुछ नियमों और जरूरतों के तहत नष्ट कराया जा सकता है। इसके लिए दवाएं, सर्जरी जैसे उपाय प्रयोग में लाए जाते हैं। हालांकि दक्षिण कोरिया जैसे कई देशों में गर्भपात को लेकर नियम-कानून काफी सख्त रहे हैं। कुछ दशकों पहले तक इसे अपराध तक माना  जाता रहा था। हालांकि इस दिशा में सरकार ने अब बड़ा फैसला लिया है। 

दक्षिण कोरियाई सरकार पहली बार गर्भपात की दवाओं को आधिकारिक मंजूरी देने की तैयारी कर रही है। प्रस्ताव के मुताबिक, 2027 की शुरुआत में नौ सप्ताह तक की गर्भावस्था वाली महिलाओं के लिए दवा से गर्भपात की सुविधा शुरू हो सकती है। लेकिन शुरुआत में यह दवा सीधे मेडिकल स्टोर से नहीं मिलेगी। इसे डॉक्टर की निगरानी में ही उपलब्ध कराई जाएगी।

असल में दक्षिण कोरिया में गर्भपात को लेकर कानून और समाज के बीच लंबे समय से खींचतान रही है। 2019 में वहां की संवैधानिक अदालत ने दशकों पुराने गर्भपात प्रतिबंधों में ढील देने का रास्ता साफ किया था। इसके बाद गर्भपात अपराध की श्रेणी से बाहर तो हो गया, लेकिन उससे जुड़े नियमों को लेकर कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी।
विज्ञापन

2 of 4
दक्षिण कोरिया में गर्भपात की दवाओं को मंजूरी - फोटो : Adobe Stock Photos
दक्षिण कोरिया में गर्भपात को लेकर नियम-कानून

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक  सख्त नियमों के चलते कुछ महिलाओं ने ऑनलाइन माध्यमों से गर्भपात की दवाएं लेना शुरू कर दी। ऐसे में दवा असली है या नहीं, उसकी गुणवत्ता कैसी है और जरूरत पड़ने पर इलाज कहां मिलेगा, इन सवालों का जवाब हमेशा चिंता का विषय रहा है।

अब सरकार जिस व्यवस्था की तैयारी कर रही है, उसमें दवा को मंजूरी देने की योजना है। महिला अधिकार संगठन इसे सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा की दिशा में कदम बता रहे हैं, जबकि धार्मिक संगठनों ने इसका विरोध किया है। डॉक्टरों का कहना है कि दवा को मंजूरी देने के साथ-साथ मरीजों की सुरक्षा और डॉक्टरों की कानूनी सुरक्षा के लिए भी स्पष्ट नियम जरूरी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि 2027 में होने वाला यह बदलाव सिर्फ एक नई दवा की मंजूरी नहीं, बल्कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था और गर्भपात कानूनों में बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकता है।
विज्ञापन

3 of 4
गर्भपात और इससे जुड़े कानून - फोटो : Freepik.com
सरकार ने क्या फैसला लिया है?

रिपोर्ट्स के मुताबिक दक्षिण कोरिया, महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के अधिकार को ध्यान में रखते हुए पहली बार गर्भपात की दवाओं को मंजूरी देने की तैयारी कर रहा है। 
 
  • 2019 में दक्षिण कोरिया की संवैधानिक अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कई दशकों से चले आ रहे गर्भपात प्रतिबंधों में ढील देने का आदेश दिया था। 
  • उस समय दक्षिण कोरिया विकसित देशों में गर्भपात को लेकर सबसे सख्त नियमों वाले देशों में शामिल था। 
  • इसके बाद गर्भपात को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया। हालांकि, संसद अभी तक इससे जुड़े कानूनों में जरूरी बदलाव नहीं कर पाई है। कई धार्मिक और रूढ़िवादी समूह आज भी गर्भपात का विरोध करते हैं।

सरकार ने इसी हफ्ते घोषणा की है कि वह 2027 की पहली तिमाही के बीच दवाओं के जरिए गर्भपात की अनुमति देने का लक्ष्य पर काम कर रही है। यह सुविधा उन महिलाओं के लिए होगी जो गर्भावस्था के नौ सप्ताह तक की स्थिति में होंगी। 

लैंगिक समानता और परिवार मंत्री वॉन मिन-क्योंग ने कहा कि दवा से गर्भपात की शुरुआत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे गर्भावस्था समाप्त करने की प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित तरीके से और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के भीतर किया जा सकेगा। 

जुलाई में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यंग ने अधिकारियों को दो दवाओं- मिफेप्रिस्टोन और मिसोप्रोस्टोल के संयोजन वाली किट को महिलाओं के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराने के रास्ते तलाशने का निर्देश दिया था। लैंगिक समानता मंत्रालय के अनुसार, 2024 तक दुनिया के करीब 100 देशों में गर्भपात की दवाओं के इस्तेमाल की अनुमति दी जा चुकी थी।
विज्ञापन

4 of 4
गर्भपात को लेकर नियम - फोटो : Adobe Stock
फैसले का अब भी विरोध

दूसरी ओर, कोरिया के कैथोलिक बिशप्स सम्मेलन ने सरकार की योजना पर गंभीर चिंता जताई। संगठन का कहना है कि इससे समाज में मानव जीवन के प्रति अनदेखी की प्रवृत्ति और मजबूत हो सकती है।
 
  • दक्षिण कोरिया के प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञों के संगठन ने भी कहा कि केवल गर्भपात की दवाओं को मंजूरी देना पर्याप्त नहीं होगा। संगठन ने ऐसे कई मुद्दों पर स्पष्ट कानून बनाने की मांग की है, जो आगे चलकर सामने आ सकते हैं।
  • वहीं डॉक्टरों के संगठन ने खास तौर पर उन स्थितियों के लिए व्यवस्था बनाने की बात कही है, जब दवा लेने के बाद गर्भाशय में गर्भावस्था के कुछ हिस्से रह जाते हैं और गर्भपात पूरा न हो पाए। इसे अपूर्ण गर्भपात कहा जाता है। इसके अलावा ज्यादा खून बहने जैसी गंभीर स्थिति से निपटने के लिए भी अस्पतालों और डॉक्टरों के लिए स्पष्ट व्यवस्था जरूरी बताई गई है।



--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें