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SAD Disorder: अनजान लोगों से बातचीत में लगता है डर, कांपने लगते हैं हाथ-पैर? कहीं आप SAD का शिकार तो नहीं

Thu, 19 Mar 2026 08:08 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है जिसमें व्यक्ति को सामाजिक परिस्थितियों जैसे लोगों के सामने बोलना, नई जगह जाना या किसी से बातचीत करने से डर लगता है। उसे लगता है कि लोग उसे जज करेंगे या उसका मजाक उड़ाएंगे।
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एंग्जाइटी की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : Amarujala.com
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत पर ध्यान देते रहना जरूरी हो जाता है। अक्सर हम सभी अपनी शारीरिक सेहत पर तो ध्यान दे लेते हैं, पर मेंटल हेल्थ को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है।

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि काम के बढ़ते दबाव, सोशल मीडिया पर लोगों से अपनी तुलना, असुरक्षा की भावना और अकेलेपन के कारण स्ट्रेस और एंग्जाइटी की समस्या सभी उम्र के लोगों में बढ़ती जा रही है। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने पहले ही बताया था कि अकेलापन किस तरह से गंभीर बीमारियों, यहां तक कि कैंसर के खतरे तक को बढ़ाने वाला हो सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ के अनुसार दुनियाभर में करोड़ों लोग एंग्जाइटी डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं। कई मामलों में डर और चिंता इतनी बढ़ जाती है कि रोजमर्रा की जिंदगी, पढ़ाई, नौकरी या रिश्तों पर असर डालने लगती है। सैड यानी सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर भी  ऐसी ही समस्या है जिसका खतरा युवाओं में काफी तेजी से बढ़ता देखा जा रहा है। 
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सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर की समस्या - फोटो : Freepik.com
सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर के बारे में जानिए

सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर या सोशल फोबिया ऐसी समस्या है जिसकी अक्सर लोगों में पहचान ही नहीं हो पाती है।  इस समस्या के शिकार लोगों को अनजान लोगों से बात करने, नई जगह जाने या लोगों से मिलने में डर लगने लगता है। अक्सर लोग इसे शर्मीलापन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, हालांकि कुछ लोगों में ये समस्या इतनी बढ़ सकती है कि इसका असर उनके दैनिक जीवन को भी प्रभावित करने लग जाता है।
 
  • सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर को विशेषज्ञ मानसिक स्वास्थ्य स्थिति मानते हैं, जिसकी पहचान और इलाज जरूरी है।
  • इस डिसऑर्डर के कारण रोगी को लगने लगता है कि लोग उसे जज करेंगे या उसका मजाक उड़ाएंगे। 
  • अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन की गाइडलाइन यह डर अगर छह महीने तक बना रहे और दैनिक जीवन को प्रभावित करने लगे तो इसे डिसऑर्डर माना जाता है।
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सोशल फोबिया के लक्षण - फोटो : adobe stock images
कैसे की जाती है इस डिसऑर्डर की पहचान?

सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर के कारण आपको कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं, जिसका असर सामाजिक जीवन पर भी पड़ने लग जाता है।
 
  • ऐसी स्थितियों से डर लगना जहां आपका नकारात्मक रूप से मूल्यांकन हो सकता है
  • शर्मिंदा या अपमानित महसूस करने की चिंता।
  • अजनबियों से बातचीत करने में डर लगना।
  • यह भी डर रहना कि दूसरे लोग भांप लेंगे कि आप घबराए हुए दिख रहे हैं।
  • इसमें शारीरिक लक्षण भी हो सकते हैं जैसे कि दूसरों से बातचीत में चेहरा लाल होना, पसीना आना, कांपना या आवाज का लड़खड़ाना।
  • ऐसी स्थितियों से बचना जहां आप सबकी नजरों में हो सकते हैं।

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मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के बारे में जानिए - फोटो : freepik
ये दिकक्त होती क्यों है?

अध्ययनों से पता चलता है कि सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर के लिए कई जेनेटिक फैक्टर, बचपन का ट्रॉमा, अत्यधिक आलोचना और दिमाग में सेरोटोनिन हार्मोन का असंतुलन होना एक कारण हो सकता है। 
 
  • अगर आपके माता-पिता या भाई-बहनों को यह समस्या है, तो आपको भी सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • जिन बच्चों को चिढ़ाया जाता है, तंग किया जाता है और सामाजिक रूप से अक्सर नकारा जाता है, उनमें भी खतरा अधिक होता है।
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तनाव की समस्या को कैसे ठीक करें? - फोटो : Adobe stock
किसी को ये डिसऑर्डर हो तो क्या करें?

सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर किसी को भी हो सकती है। जिन लोगों में डॉक्टर इस समस्या की पहचान करते हैं उन्हें साइकोथेरेपी जैसे मनोवैज्ञानिक परामर्श या टॉक थेरेपी की सलाह दी जाती है। इसके अलावा कुछ दवाओं के इस्तेमाल से दिमाग के कैमिकल इंबैलेंस और लक्षणों को ठीक करने में मदद मिल सकती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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