फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mental Health: भीड़ देखते ही आने लगता है पसीना, लोगों से मिलने-जुलने में लगता है डर? आपको SAD डिसऑर्डर तो नहीं

Sat, 17 Jan 2026 08:13 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर (एसएडी) एक मानसिक विकार है जिसमें व्यक्ति को सामाजिक परिस्थितियों में अत्यधिक चिंता और डर महसूस होता है। इसके कारण लोगों से मिलने-जुलने तक में डर लगने लगता है
विज्ञापन
1 of 5
सोशल फोबिया का खतरा - फोटो : Freepik.com
शरीर को स्वस्थ रखना मौजूदा समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। जिस तरह से बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी में गंभीर और क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है, इसने दिक्कतों को और भी बढ़ा दिया है। जब बात संपूर्ण स्वास्थ्य को ठीक रखने की आती है तो अक्सर हम सभी शारीरिक सेहत पर ज्यादा ध्यान देते हैं, हालांकि आंकड़े बताते हैं कि मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं भी तेजी से बढ़ती जा रही हैं।

स्ट्रेस-एंग्जाइटी हो या डिप्रेशन, ये सभी बीमारियां न सिर्फ आपके क्वालिटी ऑफ लाइफ को प्रभावित करती हैं, बल्कि शरीर की समस्याओं को भी बढ़ावा दे सकती हैं। यही कारण है कि हमें शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की सेहत को लेकर अलर्ट रहना चाहिए।

क्या आपको या आपके बच्चों को लोगों से मिलने-जुलने, बात करने में डर लगता है? इसके कारण आपके दैनिक जीवन के कई काम प्रभावित हो रहे हैं तो सावधान हो जाइए, ये सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर (SAD) का संकेत हो सकता है।
विज्ञापन

2 of 5
स्ट्रेस, डिप्रेशन और मेंटल हेल्थ की समस्या - फोटो : Freepik.com
सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर की समस्या क्या है?

सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर, जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि इसमें लोगों को सामाजिक भय बना रहता है। इसमें लोगों के बीच जाने, बोलने या किसी सामाजिक स्थिति का सामना करने में अत्यधिक डर और घबराहट महसूस होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर दुनिया भर में सबसे आम एंग्जायटी डिसऑर्डर्स में से एक है।

यह समस्या अक्सर किशोरावस्था या युवावस्था में शुरू होती है और अगर समय पर पहचान और इलाज न हो तो यह पढ़ाई, करियर, रिश्तों और आत्मविश्वास पर गहरा असर डाल सकती है। 
  • सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर के कारण लोग स्कूल, कॉलेज, ऑफिस मीटिंग, इंटरव्यू या सामाजिक कार्यक्रमों तक में जाने से बचने लगते हैं। 
  • लिहाजा इसका असर करियर ग्रोथ, रिश्तों और सामाजिक विकास में भी पड़ सकता है। 
  • अगर समय रहते इस समस्या की पहचान न हो पाए या इसका इलाज न मिले तो यह डिप्रेशन और नशे की लत का कारण भी बन सकती है।
विज्ञापन

3 of 5
मेंटल हेल्थ की समस्याएं - फोटो : Adobe stock photos
क्यों होती है सोशल फोबिया की दिक्कत?

सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर के लिए कई कारणों को जिम्मेदार माना जाता है।
  • कुछ लोगों में एंग्जाइटी की यह समस्या आनुवांशिक हो सकती है। हालांकि, यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि सोशल फोबिया में आनुवंशिकी की कितनी भूमिका है।
  • मस्तिष्क का हिस्सा-अमिगडाला डर की प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने में भूमिका निभाती है। जिन लोगों में यह अति सक्रिय स्थिति में होता है उनमें डर की प्रतिक्रिया बढ़ सकती है।
  • बचपन के तनावपूर्ण या दर्दनाक अनुभव जैसे दुर्व्यवहार या सार्वजनिक अपमान का शिकार हुए लोगों में इस तरह की दिक्कतें अधिक देखी जाती हैं।

4 of 5
सोशल फोबिया का शिकार तो नहीं हैं आप - फोटो : Freepik.com
कहीं आपको भी तो नहीं है SAD की समस्या, कैसे पहचानें?

सोशल फोबिया की ये समस्या आम तौर पर मध्य-किशोरावस्था में शुरू होती है, हालांकि छोटे बच्चे भी इसका शिकार हो सकते हैं। कुछ संकेतों के माध्यम से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी को सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर तो नहीं है? अगर ऐसे लक्षण दिख रहे हों तो सावधान हो जाइए।
  • उन स्थितियों से डरना जिनमें आपको नकारात्मक रूप से आंका जा सकता है।
  • अजनबियों या कभी-कभी अपने रिश्तेदारों से भी बातचीत करने में डर लगना।
  • डर लगना कि दूसरे यह नोटिस करेंगे कि आप चिंतित दिख रहे हैं।
  • शारीरिक लक्षण- जैसे कि शरमाना, किसी को देखकर पसीना आना, कांपना या कर्कश आवाज होना।
  • शर्मिंदगी के डर से लोगों से बातें करने या बोलने से बचना।
  • उन स्थितियों से बचना जहां आप पर लोगों का ध्यान केंद्रित हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
मेंटल हेल्थ का रखें ध्यान - फोटो : Adobe stock
इसका क्या इलाज है?

मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं, सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर में दवाओं और थेरेपी के माध्यम से लोगों के डर को कम करने में मदद मिल सकती है। कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी, काउंसलिंग और जरूरत पड़ने पर दवाएं इसमें प्रभावी मानी जाती हैं। एंग्जाइटी की इस समस्या का समय रहते इलाज जरूरी है क्योंकि इसके कारण डिप्रेशन और नशे की लत का जोखिम हो सकता है।



--------------
नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें