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Coronavirus: सिगरेट पीने वाले लोगों को कोरोना वायरस का ज्यादा खतरा, जानें क्या कहती है स्टडी

Fri, 27 Mar 2020 08:25 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फेफड़े - फोटो : अमर उजाला
दुनियाभर में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने और साफ-सफाई का ध्यान रखने की अपील की जा रही है। भारत समेत कई देशों में लॉकडाउन की घोषणा की गई है। इस बीच लोगों से भीड़ जमा करने या फिर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचने को कहा गया है। कोरोना वायरस के बारे में लोग सावधान तो हैं ही, लेकिन सशंकित भी हैं कि कहीं उन्हें इसका ज्यादा खतरा तो नहीं! कई स्टडी में यह बात तो साबित हो चुकी है कि इम्यून सिस्टम कमजोर रहने पर कोरोना संक्रमण का ज्यादा खतरा है, वहीं यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार धूम्रपान करने वाले को भी कोरोना संक्रमण का बहुत ज्यादा खतरा है। कुछ अन्य रिपोर्ट में भी ऐसी बात कही गई है। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से: 
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स्मोकिंग यानी धूम्रपान आपके फेफड़ों पर बुरा असर करता है। कोरोना वायरस के बारे में विशेषज्ञ बताते हैं कि यह यह वायरस हमारे फेफड़ों तक पहुंचता है और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या होता है। फेफड़ों में पहुंचकर यह ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित करता है और हमारे अंगों तक पहुंचने से रोक देता है। ऐसे में फेफड़ों का कमजोर होना कोरोना संक्रमण की स्थिति में खतरनाक हो सकता है। कोरोना वायरस के सीधे फेफड़ों पर वार करने का मतलब यह है कि आपके फेफड़े मजबूत नहीं हों तो वायरस का मुकाबला कैसे कर पाएंगे। 
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No Smoking
यूरोपियन यूनियन हेल्थ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, धूम्रपान करने वाले लोगों का शरीर अतिसंवेदनशील बन जाता है और गंभीर बीमारियों से लड़ नहीं पाता है। स्मोकिंग करने वाले लोगों को कोरोना संक्रमण जल्दी होता है और रिकवरी के चांस स्वस्थ लोगों की अपेक्षा कम रहते हैं।यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक स्मोकिंग करने वाले लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण का बहुत ज्यादा खतरा होता है।

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No Smoking
एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में 80 फीसदी लोग जो इस बीमारी की चपेट में थे, उनमें वायरस के बहुत कम लक्षण दिखाई दिए थे, जबकि यूरोप में यह आंकड़ा 70 फीसदी होते हुए भी 10 में से 3 मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत थी। 70 साल से ज्यादा उम्र वाले मरीजों को हाइपटेंशन, डायबिटीज, कॉर्डियो वास्कुलर की शिकायत थी, वे करोना से ज्यादा सबसे ज्यादा पीड़ित थे और इनमें भी पुरुषों की संख्या ज्यादा थी। 
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No Smoking
यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कारोलीना की एक अन्य स्टडी में बताया गया कि धूम्रपान करने से फेफड़ों में एंजाइम की क्रियाशीलता बढ़ जाती है, ऐसा होने से एसीई-2 (Angiotensin-Converting Enzyme-2) कोविड-19 के मरीजों की संख्या बढ़ती है। यह एसीई-2(ACE2) उम्र और हाइपरटेंशन जैसे कुछ अन्य कारकों के इलाज से भी बढ़ता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि ये दोनो खतरनाक तथ्य हैं। धूम्रपान करने वाले अधिकतर लोगों में इस महामारी के लक्षण के रूप में सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायत देखी गई। 
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चीन के चिकित्सकों ने जांच के लिए कोरोना वायरस के 99 मरीजों का सैंपल लिया, जिसमें पाया कि बुजुर्गों की तुलना में धूम्रपान करने वाले लोगों की मौत का आंकड़ा ज्यादा था। बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग ज्यादा धूम्रपान करते हैं तो उन्हें खतरे को कम करने के लिए धूम्रपान छोड़ देना चाहिए। पब्लिक हेल्थ चैरिटी एश के चीफ एग्जिक्यूटिव देबोराह आरनॉट का कहना है कि स्वस्थ लोगों के मुकाबले धूम्रपान करने वालों को निमोनिया होने का खतरा दुगना होता है। कोरोना वायरस पीड़ित का इलाज इस बात पर आधारित होता है कि मरीज के शरीर को सांस लेने में मदद की जाए और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जाए ताकि व्यक्ति का शरीर खुद वायरस से लड़ने में सक्षम हो जाए। इसलिए विशेषज्ञ धूम्रपान छोड़ने की सलाह देते हैं।
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