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Anosmia: कोविड के दौरान देखी गई थी गंध न आने की समस्या, आप अब भी तो नहीं हैं इसका शिकार?

Mon, 20 Jan 2025 07:16 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कोरोना महामारी के दौरान कई लोगों में स्वाद और गंध न आने की दिक्कत देखी गई थी। क्या आप जानते हैं कि आपको बिना कोरोनावायरस संक्रमण के भी ये समस्या हो सकती है? आइए इस स्थिति के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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गंध न आने की समस्या - फोटो : Amarujala.com
कोरोनावायरस के संक्रमण की दर अब भले ही काफी नियंत्रित हो गई है पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं ये वायरस अब भी हमारे बीच ही है, जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की जरूरत है। ये आरएनए वायरस खुद को जीवित रखने के लिए लगातार म्यूटेट होता रहता है जिस वजह से भविष्य में एक नए स्ट्रेन के आने का खतरा बना हुआ है।

महामारी के दौरान कई लोगों में स्वाद और गंध न आने की दिक्कत देखी गई थी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसे गंभीर संक्रमण का एक लक्षण माना था। पर क्या आप जानते हैं कि आपको बिना कोरोनावायरस संक्रमण के भी ये समस्या हो सकती है?

स्वाद-गंध न आने की दिक्कत को 'एनोस्मिया' के नाम से जाना जाता है, इसे स्मेल ब्लांइडनेस भी कहा जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि ये कुछ प्रकार के संक्रामक रोगों की स्थिति में ट्रिगर हो सकता है। इतना ही नहीं बिना किसी संक्रमण या फिर कुछ प्रकार की स्वास्थ्य स्थितियों के कारण भी आप इस समस्या का शिकार हो सकते हैं। आइए इसके बारे में आगे विस्तार से समझते हैं।
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गंध महसूस न होना - फोटो : Freepik.com
स्वाद-गंध न आने की दिक्कत

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, हमें किसी चीज का गंध महसूस होना शरीर के मैकेनिज्म (रचनातंत्र) का महत्वपूर्ण हिस्सा है। येल स्कूल ऑफ मेडिसिन के विशेषज्ञ कहते हैं गंध महसूस होना हमारे समग्र स्वास्थ्य और पोषण के लिए भी महत्वपूर्ण है। संवेदनाओं की कमी की स्थिति भूख और कुपोषण का कारण बन सकती है। इतना ही नहीं जिन लोगों को एनोस्मिया की समस्या होती है ऐसे लोग पाचन तंत्र की समस्याओं के भी शिकार देखे जाते हैं क्योंकि गंध न आने के कारण खट्टे या बासी खाद्य पदार्थों की पहचान कठिन हो जाती है। 

कोरोना के दौरान ये समस्या काफी चर्चा में रही थी, आइए इसके अन्य कारणों के बारे में भी जानते हैं।
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सर्दी-जुकाम की समस्या - फोटो : Freepik.com
एनोस्मिया के बारे में जानिए

एनोस्मिया तब होता है जब आप किसी चीज के गंध का पता नहीं लगा पाते। यह आमतौर पर सर्दी-जुकाम या साइनस के कारण होने वाली अस्थायी समस्या है, हालांकि कुछ लोगों में लंबे समय तक ये दिक्कत बनी रह सकती है। गंध की भावना का आपके ब्रेन से सीधा संबंध है। कई मामलों में मस्तिष्क में गंभीर चोट लगने के कारण भी आपको चीजों के गंध न आने की दिक्कत हो सकती है। 

डॉक्टर कहते हैं, कुछ कारणों की वजह से आप अपनी गंध की भावना को कुछ समय के लिए या पूरी तरह से खो सकते हैं। अगर आपको बिना किसी श्वसन संक्रमण के भी ये दिक्कत हो रही है तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। 

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मस्तिष्क की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
एनोस्मिया होने के क्या कारण हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ एनोस्मिया की समस्या को कुछ प्रकार के संक्रमण के साइड-इफेक्ट के रूप में देखते हैं जो आपकी नाक (विशेष रूप से गंध कोशिकाओ) को बंद कर देती हैं। सर्दी-जुकाम, फ्लू के संक्रमण, साइनस संक्रमण (साइनसाइटिस), हे फीवर या अन्य एलर्जी के कारण भी आपको ये दिक्कत हो सकती है। कोविड-19 के कारण ये समस्या काफी बढ़ती हुई देखी गई थी। 

अध्ययनों में पाया गया है कि अल्जाइमर रोग, ब्रेन ट्यूमर, मल्टीपल स्केलेरोसिस, हाइपरटेंशन, पार्किंसंस रोग जैसी गंभीर बीमारियां आपकी नाक में रिसेप्टर्स को प्रभावित करने वाली हो सकती हैं जिसके कारण भी आपको एनोस्मिया की दिक्कत हो सकती है। 
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गंध न आने पर क्या करें? - फोटो : Freepik
गंध न आती हो तो क्या करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, एनोस्मिया ज्यादातर मामलों में गंभीर नहीं माना जाता है। जिस संक्रामक रोग के कारण ये दिक्कत हुई है उसका इलाज करने से आपकी गंध की भावना में सुधार हो सकता है। उदाहरण के लिए, अगर आपको साइनसाइटिस है तो एंटीबायोटिक्स के माध्यम से संक्रमण को ठीक किया जाता है। संक्रमण के साथ-साथ ये दिक्कत भी दूर हो जाती है। 

अगर कोई चीज आपकी नाक को अवरुद्ध कर रही है तो इसके लिए सर्जरी की आवश्यकता भी हो सकती है। चूंकि ये अल्जाइमर रोग या ब्रेन ट्यूमर का भी संकेत हो सकता है इसलिए समय रहते इसका निदान और इलाज किया जाना जरूरी हो जाता है। 



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स्रोत और संदर्भ
Loss of Smell (Anosmia)


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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