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क्या 'स्लीप ट्रैकर बैंड' पहनकर सोते हैं आप? जान लें कहीं आपकी नींद में खलल तो नहीं डाल रहा ये गैजेट

Thu, 27 Jun 2019 07:01 AM IST
पंखुड़ी सिंह लाइफस्टाइल डेस्क अमर उजाला
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टेक्नोलॉजी से भरी इस दुनिया में आजकल हर चीज के लिए गैजैट आ गए हैं। रोजमर्रा से जुड़े काम हो या सेहत से जुड़ी बात। इन गैजैट के बगैर किसी का काम नहीं चलता है। कलाइयों पर बांधने वाले बैंड जो सेहत से जुड़े रहते हैं आजकल हर किसी के हाथ पर नजर आ जाएंगे। फिटनेस बैंड के नाम से मशहूर इन बैंड को पहन कर आप अपने शरीर से जुड़ी हर तरह की गतिविधियों का पता लगा सकते हैं। आपने खाने में कितना कैलोरी लिया या फिर एक्सरसाइज करके कितना वजन कम किया, ये सब चुटकियों में पता चल जाता है। यहां तक कि कैसी नींद ली ये भी पता चल जाता है लेकिन ठहरिए कहीं ये नुकसान तो नहीं पहुंचा रहा। 
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इन स्लीप ट्रैकर की मदद से आपके सोने के घंटे या सोने के तरीके पर नजर रखी जाती है। क्या आप जानते है इन स्लीप ट्रैकर का काम भले ही आपके फोन से दूर कर दे लेकिन ये उपकरण आपको आदी बना रहा है।लगातार स्लीप ट्रैकर के इस्तेमाल से आपको चिंता और अवसाद की समस्या हो सकती है। क्योंकि इस डिवाइस की मदद से हमेंशा आप अच्छी नींद लेने के लिए परेशान रहेंगे और इस समस्या को ऑर्थोसोमेनिया कहते हैं।
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जब आप लगातार अच्छी और गहरी नींद में सोने के लिए परेशान रहेंगे तो आपको नींद की समस्या होगी और चिंता, तनाव के कारण इंसोमनिया की बीमारी हो जाएगी। नार्थ वेस्टर्न यूनीवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसिन ने अपने शोध में इसका पता लगाया है। बहुत सारे शोध आठ से दस घंटे की नींद लेने के लिए कहते हैं लेकिन सबके साथ यह सोने का नियम लागू हो ऐसा जरूरी नहीं।
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अपने ट्रैकर का डाटा बनाने के लिए बहुत से लोग बिस्तर पर नींद न आने के बावजूद लेटे रहते हैं। बेहतर नींद के लिए जरुरी है कि आप बिना किसी डिवाइस की मदद के अपने शरीर के संकेतों के आधार पर सोएं। जब आपका शरीर थका हुआ होगा तो आपको स्वयं नींद आ जाएगी और आपको किसी स्लीप ट्रैकर की मदद की जरुरत नही पड़ेगी।
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