कम उम्र में डिमेंशिया का बढ़ता खतरा
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अध्ययन में क्या पता चला?
शोधकर्ताओं ने करीब 800 मरीजों और 7,000 स्वस्थ लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। नतीजों में सामने आया कि जिन लोगों को बाद में अर्ली-ऑनसेट डिमेंशिया हुआ, उनको कई साल पहले से ही अपने साथियों की तुलना में नौकरी के दौरान दिक्कतें होने लगी थीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में डिमेंशिया की पहचान करना आसान नहीं होता, क्योंकि डॉक्टर भी शुरुआती दौर में इस बीमारी की आशंका कम मानते हैं। यही वजह है कि मरीजों को सही निदान मिलने में कई साल लग जाते हैं। इस दौरान बीमारी चुपचाप आगे बढ़ती रहती है और व्यक्ति की नौकरी, आर्थिक स्थिति, परिवार और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
शोध का नेतृत्व करने वाले न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. ईनो सोल्जे कहते हैं, अर्ली-ऑनसेट डिमेंशिया लोगों को उनकी जिंदगी के सबसे सक्रिय और कमाई वाले दौर में प्रभावित करता है।
- इससे काम करने की क्षमता घटती है, बेरोजगारी बढ़ सकती है और कई लोग तय समय से पहले नौकरी छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं।
- इसका असर केवल मरीज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार की आय कम हो सकती है और इसका आर्थिक प्रभाव समाज पर भी पड़ता है।
- यह अध्ययन बताता है कि अर्ली-ऑनसेट डिमेंशिया का सामाजिक और आर्थिक नुकसान कई साल पहले से शुरू हो जाता है।