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अगले साल तक दूसरी सबसे बीमारी बन जाएगी डिप्रेशन, कहीं आप भी तो नहीं हैं शिकार, ऐसे करें पहचान

Thu, 02 Jan 2020 07:40 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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depression
कभी पढ़ाई का प्रेशर, कभी काम का दबाव तो कभी प्यार या रिश्ते में धोखा मिलना, ऐसे में व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। डिप्रेशन में जाने की कोई उम्र निर्धारित नहीं होती है। किशोर, युवा, प्रौढ़ उम्र की किसी भी अवस्था में यह हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन आगाह कर चुका है कि अगले साल यानी कि 2020 तक डिप्रेशन यानी कि अवसाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी बीमारी बन जाएगी। कहीं आप भी तो डिप्रेशन में नहीं? यहां जानें इसके लक्षण: 
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डिप्रेशन
उदासी, आत्मविश्वास की कमी
अकसर मन में खालीपन और उदासी महसूस होना डिप्रेशन की निशानी हो सकती है। अगर खुद से नफरत होने लगे और ऐसा लगने लगे कि इस दुनिया में लोगों के लिए आपकी अहमियत नहीं रह गई है, तो यह डिप्रेशन के लक्षण हैं।
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depression
नींद नहीं आना
कभी कभी नींद नहीं आना गंभीर बात नहीं है, लेकिन आपको लंबे समय से अनिंद्रा की शिकायत है, रातों को अक्सर नींद नहीं आती है तो समझ लेना चाहिए कि आप किसी डिप्रेशन में हैं।

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बिस्तर नहीं छोड़ना
अनिंद्रा से इतर कभी-कभी अतिनिंद्रा भी होने लगती है। कभी-कभी है तो ठीक, लेकिन अक्सर जब रात भर सोने के बावजू सुबह बिस्तर छोड़ने का मन न करे तो इसे अनदेखा न करें। यह डिप्रेशन के लक्षण हो सकते हैं। 
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Depression
किसी चीज पर फोकस नहीं कर पाना
तनाव की स्थिति में आप किसी एक चीज पर फोकस नहीं कर पाते हैं। आप आसानी से किसी जरुरी काम के प्रति भी एकाग्रचित नहीं हो पाते हैं। रोज के कामों में भी आपकी एकाग्रता भंग होने लगे तो इसे डिप्रेशन का लक्षण समझा जाता है। 
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depression - फोटो : depression
आलस्य होना और मूड खराब होना
अगर किसी जरुरी काम में भी आप हद से ज्यादा आलस्य दिखा रहे हैं या फिर काम करने में नर्वसनेस या तनाव महसूस कर रहे हैं। बिना किसी बात के मूड खराब रहता हो या फिर अक्सर लगने लगे कि गड़बड़ होने वाला है तो यह डिप्रेशन का लक्षण हो सकता है। 
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depression - फोटो : depression
गलत कदम उठाने का ख्याल आना 
अगर किसी बात को लेकर ऐसा लगने लगे कि इस दुनिया में आपके लिए कुछ नहीं बचा हो और यह जीवन बेकार लगने लगे, लगने लगे कि अब जिंदा रहने का कोई कारण नहीं बचा है, तो इसे बहुत गंभीर माना जाता है। डिप्रेशन के ऐसे गंभीर लक्षण दिखे तो तुरंत मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक से मिलना चाहिए। 
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Fight and Win
दृढ़ निश्चय करें और डिप्रेशन को मात दें
अक्सर लोगों के जीवन में डिप्रेशन आ जाता है। इससे हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि इस स्थिति से लड़ना चाहिए। यह एक कठिन लड़ाई है, लेकिन यकीन मानिए कि नामुमकिन नहीं है। समय रहते इसका निवारण खोजने की कोशिश करें। इसके लिए मेडिकल रीहैबिलिटेशन और डॉक्टरी इलाज की भी सहायता ली जा सकती है।
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