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Alert: कुछ घंटे का स्ट्रेस भी पड़ सकता है भारी, शरीर में शुरू हो जाती हैं ये गड़बड़ियां

Sat, 09 May 2026 08:15 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वैसे तो मानसिक तनाव होना शरीर के लिए सामान्य माना जाता है। यह शरीर की स्वाभाविक प्रक्रिया है जो हमें चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करती है। लेकिन जब यही तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो यह धीरे-धीरे पूरे शरीर को प्रभावित करने लगता है।
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स्ट्रेस की समस्या का असर - फोटो : Amarujala.com/AI
क्या आप भी स्ट्रेस-एंग्जाइटी का शिकार हैं? अक्सर मानसिक तनाव बना रहता है, कुछ काम करने का मन नहीं होता और उलझन बनी रहती है? ये स्थिति सिर्फ मेंटल हेल्थ को ही नहीं प्रभावित करतीं, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक हो सकती हैं।

काम के दबाव, रिश्तों की उलझन और आर्थिक चिंताओं ने स्ट्रेस-एंग्जाइटी जैसी समस्या को काफी आम बना दिया है। युवा और बच्चे भी इसका शिकार देखे जा रहे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया की बढ़ती लत ने स्थिति को और खराब कर दिया है। ये सभी कारण हमारे दिमाग को कभी भी पूरी तरह शांत नहीं होने देते। 

अगर आप इन समस्याओं का शिकार हैं तो तुरंत डॉक्टरी सलाह लें। क्या आप जानते हैं कि थोड़े समय के लिए भी स्ट्रेस लेना आपके पूरे शरीर के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला हो सकता है?
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स्ट्रेस के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
ज्यादा तनाव हो सकता है खतरनाक

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि वैसे तो मानसिक तनाव होना शरीर के लिए सामान्य माना जाता है। यह शरीर की स्वाभाविक प्रक्रिया है जो हमें चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करती है। लेकिन जब यही तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो यह धीरे-धीरे पूरे शरीर को प्रभावित करने लगता है।
 
  • लंबे समय तक रहने वाला तनाव शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन के स्तर को बढ़ा देता है। 
  • कई अध्ययनों में पाया गया है कि हाई कोर्टिसोल हार्ट से लेकर ब्रेन, पाचन तंत्र और इम्यून सिस्टम सभी के लिए खतरनाक हो सकता है।
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हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Freepik.com
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अक्सर हमें यह एहसास ही नहीं होता कि हमारा शरीर अंदर ही अंदर तनाव के कारण प्रभावित हो रहा है। छोटी-छोटी समस्याएं जैसे सिरदर्द, नींद की कमी, थकान या चिड़चिड़ापन संकेत हो सकते हैं कि आपका शरीर स्ट्रेस से जूझ रहा है।

आइए जानते हैं कि कुछ घंटे ही स्ट्रेस में रहने से क्या-क्या दिक्कतें हो सकती हैं?

ब्लड प्रेशर और दिल की सेहत पर असर

कुछ घंटे का भी तनाव आपके ब्लड प्रेशर को बढ़ाने वाला हो सकता है। 
 
  • अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, तनाव की स्थिति में शरीर फाइट मोड में चला जाता है। इससे हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। 
  • क्रॉनिक स्ट्रेस हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग दोनों का जोखिम बढ़ा देता है।
  • स्ट्रेस के दौरान कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन हार्मोन बढ़ जाते हैं, जिससे रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं और दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। 
  • लंबे समय तक ऐसा होने पर दिल की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

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इम्युनिटी की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
कमजोर हो जाता है इम्यून सिस्टम 

स्ट्रेस में रहना आपकी इम्युनिटी के लिए भी खतरनाक है। अध्ययनों से पता चलता है कि लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।
 
  • मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ने से शरीर में इन्फ्लेमेशन बढ़ जाता है।
  • शरीर को संक्रमण से बचाने वाले व्हाइट ब्लड सेल्स की कार्यक्षमता कम हो जाती है। इससे शरीर में संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है।
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पेट की बीमारियों का खतरा - फोटो : adobe stock images
नींद और पाचन पर असर

क्या आप जानते हैं कि स्ट्रेस में रहना आपके पाचन स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक है?
 
  • स्ट्रेस के दौरान शरीर पाचन प्रक्रिया को धीमा कर देता है, जिससे एसिडिटी, गैस, कब्ज और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • तनाव में लोग ज्यादा या कम खाना शुरू कर देते हैं, जिससे पाचन और मेटाबॉलिज्म दोनों प्रभावित होते हैं।
  • पाचन के अलावा स्ट्रेस सीधे दिमाग को भी प्रभावित करता है। इससे एंग्जायटी और डिप्रेशनका खतरा बढ़ जाता है।
  • अध्ययन में पाया गया है कि स्ट्रेस की स्थिति दिमाग के उस हिस्से को भी प्रभावित करती है जो याददाश्त और सीखने से जुड़ा होता है। इससे याददाश्त कमजोर हो सकती है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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