Side Effect Of Eating Analog Paneer: हाल ही में उत्तर प्रदेश समत कई राज्यों में एनालॉग यानी कि बिना दूध वाला पनीर बैन किया गया है। इसकी क्या वजह है और इसके सेवन से शरीर को क्या नुकसान पहुंचता है, आज ह इसी बारे में आपको डिटेल जानकारी देंगे।
विज्ञापन
1 of 7
नकली पनीर खाने से हो सकती हैं ये बड़ी परेशानियां
- फोटो : AI
Side Effect Of Eating Analog Paneer: पनीर प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत माना जाता है, लेकिन बाजार में मिलने वाला हर पनीर असली दूध से बना हो, यह जरूरी नहीं। इन दिनों एनालॉग पनीर को लेकर कई राज्यों में सख्ती की जा रही है। एनालॉग पनीर पारंपरिक दूध से बने पनीर के बजाय दूसरे गैर-डेयरी फैट, स्टार्च और अन्य सामग्री से तैयार किया जा सकता है।
FSSAI ने भी साफ किया है कि ऐसे चीज एनालॉग को पनीर के नाम से बेचना नियमों का उल्लंघन है। इसी के चलते हाल में उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर के खिलाफ कार्रवाई और प्रतिबंध की खबरें सामने आई हैं।
ऐसे में यह जानना जरूरी है कि एनालॉग पनीर क्या है, असली पनीर से यह कैसे अलग है और इसे खाने को लेकर चिंता क्यों जताई जा रही है। इस खबर में जानिए एनालॉग पनीर से जुड़े 5 बड़े नुकसान और इससे बचने के तरीके।
विज्ञापन
2 of 7
नकली पनीर खाने से हो सकती हैं ये बड़ी परेशानियां
- फोटो : AI
पहले जानें कि एनालॉग पनीर क्या होता है?
एनालॉग पनीर ऐसा उत्पाद है जो पारंपरिक पनीर की तरह दिखता और इस्तेमाल होता है, लेकिन इसमें दूध के बजाय वनस्पति फैट, स्टार्च या दूसरे गैर-डेयरी तत्वों का इस्तेमाल किया जा सकता है। समस्या तब बढ़ती है जब इसे ग्राहक को असली पनीर बताकर बेचा जाता है। FSSAI ने इसी तरह की गलत लेबलिंग पर सख्ती की है। आइए अब खबर में आगे जानते हैं इसके नुकसान
विज्ञापन
3 of 7
नकली पनीर खाने से हो सकती हैं ये बड़ी परेशानियां
- फोटो : AI
1. पाचन संबंधी परेशानी
एनालॉग पनीर में दूध की जगह अलग तरह के वसा, स्टार्च और दूसरी सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे उत्पाद हर व्यक्ति के लिए आसानी से पचने वाले हों, यह जरूरी नहीं है। ज्यादा मात्रा में खाने पर कुछ लोगों को पेट भारी लगना, गैस, पेट फूलना, अपच या एसिडिटी जैसी परेशानी हो सकती है। खासकर अगर इसे पहले से ही तले-भुने या मसालेदार खाने के साथ खाया जाए, तो पाचन संबंधी दिक्कत बढ़ सकती है।
4 of 7
नकली पनीर खाने से हो सकती हैं ये बड़ी परेशानियां
- फोटो : AI
2. ज्यादा वसा और कैलोरी
कई एनालॉग पनीर उत्पादों में वनस्पति वसा का इस्तेमाल किया जाता है। उत्पाद में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और उसकी मात्रा के आधार पर इसमें वसा और कैलोरी की मात्रा अलग-अलग हो सकती है। अगर कोई व्यक्ति इसे नियमित रूप से और ज्यादा मात्रा में खाता है, तो उसकी कुल कैलोरी और वसा की खपत बढ़ सकती है। इसलिए खरीदते समय पैकेट पर पोषण संबंधी जानकारी और सामग्री जरूर देखें।
विज्ञापन
5 of 7
नकली पनीर खाने से हो सकती हैं ये बड़ी परेशानियां
- फोटो : AI
3. पोषण की कमी
असली पनीर दूध से तैयार होता है और इसमें प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व मिलते हैं। वहीं एनालॉग पनीर का पोषण प्रोफाइल उसमें इस्तेमाल की गई सामग्री पर निर्भर करता है। इसलिए एनालॉग पनीर को हमेशा असली दूध से बने पनीर के बराबर पोषण वाला उत्पाद नहीं माना जा सकता। अगर कोई व्यक्ति प्रोटीन या कैल्शियम के लिए पनीर को अपनी डाइट में शामिल करता है, तो उसे उत्पाद की पोषण संबंधी जानकारी पर ध्यान देना चाहिए।
विज्ञापन
6 of 7
नकली पनीर खाने से हो सकती हैं ये बड़ी परेशानियां
- फोटो : AI
4. दिल की सेहत को लेकर चिंता
कुछ एनालॉग उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली वसा की मात्रा अधिक हो सकती है। अगर किसी व्यक्ति के भोजन में पहले से ही संतृप्त वसा की मात्रा ज्यादा है और वह लंबे समय तक ऐसे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करता है, तो यह उसकी संपूर्ण हृदय-स्वस्थ आहार के लिए अच्छा नहीं माना जाता। इसलिए एनालॉग पनीर को नियमित भोजन का हिस्सा बनाने से पहले उसमें मौजूद वसा की मात्रा और खाने की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है।
नकली पनीर खाने से हो सकती हैं ये बड़ी परेशानियां
- फोटो : AI
5. खाद्य सुरक्षा का जोखिम
एनालॉग पनीर से जुड़ी बड़ी चिंता तब पैदा होती है, जब इसकी सही जानकारी ग्राहक को नहीं दी जाती या उत्पाद खाद्य सुरक्षा मानकों के मुताबिक तैयार और सुरक्षित तरीके से संग्रहित नहीं किया जाता। गलत तरीके से रखे गए किसी भी खाद्य पदार्थ में दूषित होने का खतरा हो सकता है। इसलिए बिना लेबल, संदिग्ध गुणवत्ता या अनजान स्रोत से मिलने वाले पनीर को खरीदने से बचें। पैकेट वाला उत्पाद लेते समय सामग्री, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि और एफएसएसएआई से जुड़ी जानकारी जरूर जांचें।
---------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।