शुभांशु शुक्ला धरती पर आ रहे हैं वापस
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धरती पर लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को क्या दिक्कतें होती हैं?
मेडिकल रिपोर्टस से पता चलता है माइक्रोग्रैविटी के बाद दोबारा से गुरुत्वाकर्षण में आने के बाद थकान, चलने में कठिनाई होने के साथ और शरीर का बैलेंस बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं होता। इसके अलावा माइक्रोग्रैविटी में, मांसपेशियां उस तरह से भार सहन नहीं कर पातीं, जैसा कि वे पृथ्वी पर करती हैं। इसके परिणामस्वरूप, अगले कुछ महीनों तक शुभांशु को मसल्स अटॉर्फी की दिक्कत भी हो सकती है। मसल्स अटॉर्फी में मांसपेशी के ऊतकों का क्षय हो जाता है और ये बहुत पतले हो जाते हैं।
वापस लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को अपनी मांसपेशियां कमजोर लग सकती हैं, जिससे खड़े होना, चलना और संतुलन बनाना शुरू में काफी मुश्किल हो सकता है।
नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री लेरॉय चियाओ ने एक रिपोर्ट में बताया था कि धरती पर वापस लौटने के बाद लंबे समय तक चलने में परेशानी होती रहती है क्योंकि शरीर का संतुलन बनाना कठिन होता है। अंतरिक्ष यात्रियों को यात्रा के लंबे समय के बाद तक "बेबी फीट" जैसा अनुभव होता है। अंतरिक्ष में महीनों बिताने के बाद सख्त त्वचा उतर जाती है और पैर बहुत नरम और कोमल हो जाते हैं। जब तक पैरों में फिर से सख्त त्वचा नहीं बन जाती, तब तक चलना काफी कष्टदायक हो सकता है।