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Shubhanshu Shukla: धरती पर वापसी के बाद महीनों तक अंतरिक्ष यात्रियों को बनी रह सकती हैं ये स्वास्थ्य समस्याएं

Tue, 15 Jul 2025 09:32 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • शुभांशु शुक्ला और अन्य सदस्यों को अंतरिक्ष में सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण वातावरण के साथ तालमेल बिठाने में कुछ दिन लगे, अब धरती पर वापस आने पर उनके शरीर को पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव के साथ सामंजस्य बिठाने में भी कुछ समय लग सकता है। इस तरह के परिवर्तनों का इंसानी शरीर पर भी कई प्रकार से नकारात्मक असर होता है।
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आईएसएस में भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला - फोटो : PTI
Shubhanshu Shukla Return To Earth: इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर 18 दिन बिताने के बाद, भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला आज (15 जुलाई को) धरती पर लौट रहे हैं। ग्रेस नामक स्पेस ड्रैगन यान, चार सदस्यीय दल के साथ सोमवार शाम करीब 4.45 बजे अंतरराष्ट्रीय स्पेश स्टेशन से अनडॉक हुआ था, जो मंगलवार दोपहर लगभग 3 बजे कैलिफोर्निया के तट पर उतरेगा।

18 दिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर रहने के दौरान उन्होंने करीब 60 प्रयोग किए, जिनमें से सात प्रयोग इसरो के थे। शुभांशु अपने साथ 263 किलो वैज्ञानिक सामान लेकर धरती पर लौट रहे हैं, जिससे भविष्य में अंतरिक्ष कार्यक्रमों को बड़ी मदद मिल सकती है। 

पहले शुभांशु शुक्ला और अन्य सदस्यों को अंतरिक्ष में सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण वातावरण के साथ तालमेल बिठाने में कुछ दिन लगे, अब धरती पर वापस आने पर उनके शरीर को पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव के साथ सामंजस्य बिठाने में भी कुछ समय लग सकता है। इस तरह के परिवर्तनों का इंसानी शरीर पर कई प्रकार से नकारात्मक असर होता है। 

आइए इसी बारे में आगे विस्तार से समझते हैं।
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स्पेस स्टेशन में शुभांशु शुक्ला - फोटो : PTI
आइए समझते हैं कि धरती पर वापस लौटने के बाद शुभांशु और उनकी टीम को किस तरह की स्वास्थ्य सबंधित दिक्कतें हो सकती हैं और इसका विशेषज्ञों की टीम किस प्रकार से ध्यान रखेगी?
 

अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद क्या हुआ?

अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद बातचीत के दौरान शुभांशु ने बताया था कि लो-गैव्रिटी वाले वातावरण में ढलने में शुरुआती कुछ दिनों में उन्हें काफी कठिनाई हुई। 

चार सदस्यीय दल की एकमात्र सदस्य कमांडर पैगी व्हिटसन, जिन्होंने पहले अंतरिक्ष और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर समय बिताया था, उन्होंने कहा कि वह अंतरिक्ष के सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण वातावरण के साथ पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण की तुलना में कहीं बेहतर तालमेल बिठा लेती हैं।
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शुभांशु शुक्ला की आज धरती पर वापसी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
अब आइए जानते हैं कि धरती पर वापसी के बाद यात्रियों को किन स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है और इनका विशेषज्ञों की टीम कैसे ध्यान रखेगी?

लैंडिंग के बाद क्या होगा?

रिपोर्ट्स के अनुसार, शुभांशु शुक्ला को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में पुनः प्रवेश करने के बाद 7 दिनों के अनिवार्य रिहैविलेशन से गुजरना होगा। इसके तहत अंतरिक्ष यात्रियों के शरीर को वापस पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में ढालने का प्रयास किया जाता है। इस दौरान अंतरिक्ष यात्रियों के कई मेडिकल टेस्ट भी किए जाते हैं जिससे उनके शारीरिक स्थिति की आकलन किया जा सके।

आईएसएस में रहने के दौरान, शुभांशु शुक्ला में ऑर्थोस्टेटिक इंटालरेंस के गंभीर लक्षण दिखाई देने की खबरें आईं थी, जो एक गंभीर स्वास्थ्य स्थिति है जिसमें सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण के दौरान ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में कठिनाई महसूस होती है। धरती पर वापसी के बाद ब्लड प्रेशर और हृदय स्वास्थ्य से संबंधित कई जांच किए जाएंगे। 
 

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शुभांशु शुक्ला धरती पर आ रहे हैं वापस - फोटो : PTI
धरती पर लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को क्या दिक्कतें होती हैं?

मेडिकल रिपोर्टस से पता चलता है माइक्रोग्रैविटी के बाद दोबारा से गुरुत्वाकर्षण में आने के बाद थकान, चलने में कठिनाई होने के साथ और शरीर का बैलेंस बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं होता। इसके अलावा माइक्रोग्रैविटी में, मांसपेशियां उस तरह से भार सहन नहीं कर पातीं, जैसा कि वे पृथ्वी पर करती हैं। इसके परिणामस्वरूप, अगले कुछ महीनों तक शुभांशु को मसल्स अटॉर्फी की दिक्कत भी हो सकती है। मसल्स अटॉर्फी में मांसपेशी के ऊतकों का क्षय हो जाता है और ये बहुत पतले हो जाते हैं।

वापस लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को अपनी मांसपेशियां कमजोर लग सकती हैं, जिससे खड़े होना, चलना और संतुलन बनाना शुरू में काफी मुश्किल हो सकता है।

नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री लेरॉय चियाओ ने एक रिपोर्ट में बताया था कि धरती पर वापस लौटने के बाद लंबे समय तक चलने में परेशानी होती रहती है क्योंकि शरीर का संतुलन बनाना कठिन होता है। अंतरिक्ष यात्रियों को यात्रा के लंबे समय के बाद तक "बेबी फीट" जैसा अनुभव होता है। अंतरिक्ष में महीनों बिताने के बाद सख्त त्वचा उतर जाती है और पैर बहुत नरम और कोमल हो जाते हैं। जब तक पैरों में फिर से सख्त त्वचा नहीं बन जाती, तब तक चलना काफी कष्टदायक हो सकता है।
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शुभांशु शुक्ला और टीम - फोटो : ANI
स्वास्थ्य संबंधित इन समस्याओं का भी खतरा

धरती पर वापसी के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को कुछ महीनों तक और भी कई समस्याएं बनी रह सकती हैं।
  • अंतरिक्ष में ग्रैविटी कम होने के कारण हड्डियों का घनत्व और मांसपेशियों की समस्या हो सकती है। वापस लौटने के बाद लंबे समय तक इससे संबंधित दिक्कतें परेशान करने वाली हो सकती हैं।
  • अंतरिक्ष यात्रियों की हड्डियां कमजोर और भंगुर हो जाती हैं। यही कारण है कि वापस लौटने पर फ्रैक्चर होने या इससे संबंधित कई दिक्कतें बनी रह सकती हैं।
  • अंतरिक्ष में रहने के कारण हृदय, मस्तिष्क और संचार प्रणाली भी प्रभावित होती है। अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी के कारण मस्तिष्क में तरल पदार्थ की मात्रा बढ़ने लगती है। इससे सुनने की क्षमता में कमी, दृष्टि की कमजोरी और सेरेब्रल एडिमा यानी मस्तिष्क में सूजन होने की दिक्कत भी हो सकती है।
  • अंतरिक्ष में स्पेस रेडिएशन के कारण अंतरिक्ष यात्रियों में दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं जैसे कैंसर, डिजनरेटिव डिजीज और तंत्रिका तंत्र से संबंधित समस्याओं का खतरा भी रहता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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