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डेंटल हेल्थ: रूट कैनाल से जुड़े जरूरी सवालों का जवाब, कब इसकी जरूरत और कैसे होता है इलाज? डॉक्टर ने बताया

Thu, 05 Nov 2026 07:14 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Root Canal: रूट कैनाल एक डेंटल प्रक्रिया है, जिसमें संक्रमित दांत के अंदर मौजूद पल्प को हटाकर दांत को साफ और सील किया जाता है। गहरी कैविटी, दांत में दरार, संक्रमण जैसी समस्याओं में इसकी जरूरत पड़ सकती है। समय पर इलाज कराने से प्राकृतिक दांत को बचाने में मदद मिलती है।
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रूट कैनाल - फोटो : Amarujala.com/AI
क्या आपके भी दांतों में अक्सर दर्द रहता है, बार-बार घरेलू उपायों या दवाओं से ये ठीक तो हो जाता है पर समस्या फिर से वापस आ जाती है? अगर हां तो सावधान हो जाइए। कहीं आपके दांतों या मसूड़ों में कोई गंभीर समस्या तो नहीं है?

आमतौर पर दांतों में दर्द होने पर ज्यादातर लोग इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसी समस्याओं में खुद से पेनकिलर लेना या कुछ घरेलू नुस्खों का सहारा लेना सबसे आम है। लेकिन जब दांतों में संक्रमण या कोई दूसरी दिक्कत होने पर सिर्फ सामान्य दवा से काम नहीं चलता। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से मिलकर समस्या को समझना और इसका सही इलाज कराना सबसे जरूरी माना जाता है।

दांतों के इलाज की बात आते ही अक्सर आपने रूट कैनाल के बारे में सुना होगा। इसका मुख्य उद्देश्य खराब या संक्रमित दांत को निकालने के बजाय उसे बचाना होता है। पर सवाल ये है कि इसकी  जरूरत कब होती है और क्या ये प्रक्रिया बहुत दर्द वाली है? आइए इस बारे में जान लेते हैं।
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दांतों की समस्याएं - फोटो : Adobe stock Images
पहले जानिए रूट कैनाल ट्रीटमेंट क्या होता है?

डेंटिस्ट डॉ अनूपमा सिंह बताती हैं, दांत के अंदर एक नरम हिस्सा होता है, जिसे पल्प कहते हैं। इसमें नसें, रक्त वाहिकाएं और कनेक्टिव टिश्यू मौजूद होते हैं। जब दांत में गहरी सड़न, चोट या दरार के कारण इस हिस्से में संक्रमण हो जाता है, तो इस तरह की समस्याओं को ठीक करने के लिए रूट कैनाल की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि किन लोगों को इसकी जरूरत है ये डॉक्टर आपके दांत की स्थिति देखकर तय करते हैं।
 
  • रूट कैनाल में संक्रमित पल्प को हटाकर दांत के अंदर की जगह को साफ किया जाता है। इसके बाद उसे फिलिंग करके सील कर दिया जाता है, ताकि दोबारा संक्रमण न हो।
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दांतो में दर्द हो तो क्या करें? - फोटो : Amarujala.com/AI
कब जरूरी हो जाता है रूट कैनाल?

डॉ बताती हैं, दांतों-मसूड़ों में संक्रमण की स्थिति में रूट कैनाल एक मददगार तरीका माना जाता है जिसकी मदद से दांतों को बचाया जा सकता है। 
 
  • दांतों में गहरी सड़न होने पर ये सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। जब कैविटी दांत की बाहरी परत को पार करके अंदर के पल्प तक पहुंच जाती है, तो इससे संक्रमण हो सकता है। ऐसे में रूट कैनाल की जरूरत पड़ सकती है।
  • अगर दांत में तेज दर्द रहता हो और गर्म-ठंडा खाने पर लंबे समय तक दर्द बना रहे, तो यह पल्प में सूजन या संक्रमण का संकेत हो सकता है।
  • किसी दुर्घटना या चोट के कारण दांत टूट जाए या उसमें गहरी दरार आ जाए, तो बैक्टीरिया अंदर पहुंचकर संक्रमण पैदा कर सकते हैं। इसमें भी रूट कैनाल की मदद ली जाती है।
  • दांत की जड़ के आसपास पस जमा होने को डेंटल एब्सेस कहा जाता है। इसमें दर्द, सूजन और कभी-कभी बुखार भी हो सकता है। इस समस्या को ठीक करने के लिए भी रूट कैनाल किया जाता है।
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दांतों को कैसे स्वस्थ रखें? - फोटो : Amarujala.com/AI
रूट कैनाल कैसे किया जाता है?
 
डॉक्टर बताती हैं, रूट कैनाल करने से पहले दांत की जांच और एक्स-रे किया जाता है ताकि सही स्थिति का अंदाजा हो सके। इसके बाद लोकल एनेस्थीसिया देकर प्रभावित हिस्से को सुन्न किया जाता है।फिर दांत में छोटा सा रास्ता बनाकर संक्रमित पल्प को निकाला जाता है। दांत की जड़ों के अंदर की नलियों को साफ करके उन्हें फिलिंग के साथ सील कर दिया जाता है।
कई मामलों में लोगों को एक से ज्यादा बार रूट कैनाल की जरूरत हो सकती है। 
 
  • दांत ज्यादा कमजोर हो गए हों तो उस पर कैप लगाने की भी जरूरत पड़ सकती है, ताकि प्राकृतिक दांत को सुरक्षित रखा जा सके।

क्या रूट कैनाल में बहुत दर्द होता है?

डॉ अनूपमा कहती हैं, अक्सर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि रूट कैनाल बहुत दर्दनाक होता है। आजकल लोकल एनेस्थीसिया की मदद से इलाज के दौरान दर्द को काफी हद तक कंट्रोल कर लिया जाता है। इलाज के बाद कुछ दिनों तक हल्का दर्द या संवेदनशीलता हो सकती है, जो अपने आप कम होती जाती है। रूट कैनाल दांतो को बचाए रखने का सबसे अच्छा तरीका है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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