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कोरोनो जांच के लिए खुद नमूना लेना ज्यादा सुरक्षित, इस तरीके से कम होगा संक्रमण का खतरा: शोध

Tue, 16 Jun 2020 12:28 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना की जांच के लिए नमूना लेते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच सबसे पहली और बड़ी चुनौती इसकी जांच करना है। अच्छी बात यह है कि भारत में पहले की अपेक्षा जांच की रफ्तार तेज हुई है। कोरोना की जांच में स्वास्थ्यकर्मी या लैबकर्मी मुख्यत: नाक से स्वाब(नमूना) लेते हैं। इस संबंध में अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध में बताया गया है कि स्वास्थ्यकर्मियों की बजाय खुद से ही लिया गय नमूना अधिक सटीक और सुरक्षित होता है। 'जर्नल ऑफ दि अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन' में प्रकाशित शोध के मुताबिक, ऐसा करने से संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। 
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नमूना लेता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
30 लोगों पर शोध अध्ययन
  • अमेरिका के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने दावा किया कि कोरोनो जांच के लिए स्वास्थ्यकर्मियों के बजाय खुद से नाक से लिया गया नमूना अधिक सटीक होता है। 30 लोगों पर हुए इस शोध अध्ययन में यह भी दावा किया गया है कि ऐसा करने से स्वास्थ्यकर्मियों में संक्रमण का खतरा नहीं होता है। पूर्व में कोरोना वायरस से संक्रमित इन लोगों ने नमूना लेने के तरीके को बताने वाले शॉर्ट वीडियो देखने और दिशानिर्देश पढ़ने के बाद जांच के लिए खुद अपना नमूना लिया था। 
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Coronavirus Test - फोटो : Social Media
स्वयं नमूने एकत्र करने देना चाहिए
  • स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि नाक से लिए गए नमूने का अध्ययन करना मौजूदा समय में नाक में ऊपरी हिस्से से लिए जा रहे नमूने से ज्यादा आसान है।शोधकर्ताओं ने कहा कि कोरोना के लक्षण वालों या संक्रमण के संदिग्धों को स्वयं नमूने एकत्र करने देना चाहिए। इसके कई फायदे हैं। 

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कोरोना की जांच (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
  • समय और पैसे की बचत होगी
शोधकर्ताओं ने कहा कि नमूना एकत्र करने के लिए बड़े पैमाने पर किट बांटे जा सकते हैं, इससे ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच संभव होगी। 
  • जो लोग किट का इस्तेमाल करेंगे, उन्हें प्रयोगशाला तक जाने की जरूरत नहीं होगी। 
  • घर से अस्पताल या लैब जाने के दौरान अन्य लोगों के संक्रमण का खतरा नहीं होगा।
  • नमूने लेने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के संक्रमित होने का खतरा कम होगा।
  • स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) की भी बचत होगी। 
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जांच के लिए नमूना लेता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
क्षमता तुरंत बढ़ाने की जरूरत
  • स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और शोध टीम के सदस्य यवोन्ने माल्डोनाडो ने कहा कि वायरस संक्रमण फैलने की रफ्तार कम करने के लिए हमें जांच की क्षमता तुरंत बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लक्षण वाले या संदिग्ध लोग अपने घर में या अपनी कार में नमूना एकत्र करने की प्रक्रिया कर सकता है। इससे स्वास्थ्यकर्मियों के संक्रमित होने का खतरा कम होगा और ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच हो पाएगी। धिक से अधिक लोग जांच के लिए नमूना जमा करा सकेंगे। 
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तापमान जांच के लिए कतार में खड़े लोग (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
ऐसे किया गया शोध अध्ययन
  • जिन प्रतिभागियों पर यह शोध अध्ययन हुआ, उनके मार्च में ही स्टैनफोर्ड स्वास्थ्य केंद्र में कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी। शोध अध्ययन के दौरान माल्डोनाडो और उनकी टीम ने घर पर रह रहे हर मरीज से फोन से संपर्क किया और उन्हें खुद नमूना एकत्र करने के लिए लिखित दिशानिर्देश भेजा और इसके साथ ही प्रक्रिया को समझाने के लिए एक शॉर्ट वीडियो भी भेजा। 
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कोरोना की जांच के लिए नमूने एकत्र करते स्वास्थ्य कर्मी(File Photo) - फोटो : PTI
एक जैसी रही रिपोर्ट
  • मरीजों को जांच के लिए स्टैनफोर्ड स्वास्थ्य केंद्र बुलाया गया, जहां उनसे कहा गया कि वे खुद ही अपने नाक से नमूना एकत्र करें। शोधकर्ताओं ने बताया कि चिकित्सकों ने इसके बाद इन संक्रमितों के गले और नाक से अतिरिक्त नमूने लिए। इस तरह जमा हुए तीनों नमूनों की जांच की गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि 30 में से 29 प्रतिभागियों के तीनों नमूनों की जांच रिपोर्ट एक जैसी रही। 

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Coronavirus Test - फोटो : Social Media
खुद से लिया गया नमूना ज्यादा सटीक
  • शोधकर्ताओं के मुताबिक 11 प्रतिभागियों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव रही, जबकि 18 प्रतिभागियों की रिपोर्ट कोरोना निगेटिव आई। वहीं, एक प्रतिभागी की खुद से एकत्र किए गए नमूने में संक्रमण की पुष्टि हुई जबकि चिकित्सकों द्वारा संग्रहित अन्य दोनों नमूनों की रिपोर्ट निगेटिव आई। 

पॉजिटिव रिपोर्ट कितने दिन बाद?
  • शोधकर्ताओं की रुचि यह भी जानने में थी कि पहली बार लक्षण सामने आने के कितनों दिनों बात तक संदिग्ध की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आती है। अध्ययन के प्रतिभागियों के मुताबिक, प्रायोगिक जांच के लिए आने से चार से 37 दिनों पहले तक उनमें ऐसे लक्षण नजर आए थे। 
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कोरोना वायरस की जांच(फाइल फोटो) - फोटो : PTI
प्रो. माल्डोनाडो ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि संक्रमित व्यक्ति आखिर कितने दिनों तक संक्रमित होता है और उसके घर में संक्रमण की परिपाटी क्या है। उन्होंने कहा कि यह सूचना स्वास्थ्यकर्मियों के लिए मानक दिशानिर्देश बनाने में सहायक होगी। जैसे कि कोरोना मरीजों को कितने दिनों तक क्वारंटीन में रखना चाहिए, परिजनों को या सहकर्मियों को कबतक मिलना-जुलना सुरक्षित हो...वगैरह के लिए भी दिशानिर्देश तैयार किया जा सकेगा। 
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