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Health Tips: सेडेंटरी लाइफस्टाइल के कारण जानलेवा समस्याओं का खतरा, इन अंगों पर होता है सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव

Sat, 14 Jan 2023 07:00 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सेंडेंटरी लाइफस्टाइल के नुकसान - फोटो : istock
सेडेंटरी लाइफस्टाइल यानी कि निष्क्रिय जीवनशैली को स्वास्थ्य विशेषज्ञ गंभीर रोग कारकों में से एक मानते हैं। लंबे समय तक बैठे रहने या अधिकतर समय लेटे रहने की आदत के अलावा दिनचर्या में व्यायाम की कमी के कारण जीवनशैली की निष्क्रियता और इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। अध्ययनकर्ता इसे गंभीर हृदय रोग और कुछ स्थितियों में हार्ट अटैक-स्ट्रोक, डायबिटीज की जटिलताओं, मोटापा और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए प्रमुख कारक के तौर पर मानते हैं। सेडेंटरी लाइफस्टाइल के कारण जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस तरह से लाइफस्टाइल में गड़बड़ी के कारण गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ता जा रहा है, इसे देखते हुए सभी लोगों को शारीरिक सक्रियता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। दिनचर्या में योग-व्यायाम को जरूर शामिल करें। सेडेंटरी लाइफस्टाइल का जोखिम बच्चों से लेकर युवाओं तक सभी के लिए नुकसानदायक है, इसके खतरे को लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।

आइए जानते हैं कि निष्क्रिय जीवनशैली किस प्रकार से शरीर के अंगों के लिए समस्याकारक है और इससे बचाव के लिए क्या किया जाना चाहिए?
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शारीरिक निष्क्रियता के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : istock
गतिहीन जीवनशैली के दुष्प्रभाव

शोधकर्ताओं ने पाया कि गतिहीन जीवनशैली आपमें कई प्रकार के स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ाने का कारण हो सकती है। इसके कारण कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है जो जानलेवा तक हो सकती हैं। डॉक्टर्स कहते हैं, मौजूदा समय की ज्यादातर बीमारियों के लिए  सेडेंटरी लाइफस्टाइल को प्रमुख कारक के तौर पर देखा जा रहा है। इससे मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, कुछ प्रकार के कैंसर, हृदय रोग के जोखिम प्रमुख हैं।
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गंभीर रोगकारक है शारीरिक निष्क्रियता - फोटो : Pixabay
समय से पहले मृत्यु का खतरा

अगर आप लंबी जिंदगी चाहते हैं तो शारीरिक निष्क्रियता को कम करने के लिए प्रयास बहुत आवश्यक हैं। इसे समय से पहले मृत्यु के प्रमुख जोखिम कारक के तौर पर भी जाना जाता है। एक अध्ययन के आंकड़ों के विश्लेषण में वैज्ञानिकों ने पाया कि गतिहीन जीवनशैली वाले लोगों की औसत आयु, नियमित योग-व्यायाम करने वालों की तुलना में कम होती है। गतिहीन जीवनशैली वालों में हार्ट अटैक का जोखिम अधिक देखा गया है जो समय से पहले मृत्यु का कारण बन सकती है।

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तनाव-अवसाद की बढ़ती समस्या - फोटो : istock
मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर

गतिहीन जीवनशैली का मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। 10,381 प्रतिभागियों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि गतिहीन जीवनशैली वाले लोगों में समय के साथ अवसाद की समस्या विकसित होने का खतरा अधिक हो सकता है। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने पाया कि शारीरिक सक्रियता कम होने से खुशी बढ़ाने वाले हार्मोन्स का स्राव भी कम हो जाता है, जिसके कारण आपका मूड प्रभावित रहता है।
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फिटनेस को लेकर रहें अलर्ट - फोटो : Pixabay
शरीर को रखें फिट और सक्रिय

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों के लिए नियमित रूप से व्यायाम-योग करने की आवश्यकता है। शोध से पता चला है कि व्यायाम और खेल सहित अन्य शारीरिक गतिविधियों को दिनचर्या का हिस्सा बनाने से हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा और समय से पहले मृत्यु के जोखिम को कम किया जा सकता है। सभी वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 मिनट के व्यायाम जरूर करना चाहिए। 



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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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