वैश्विक स्तर पर हृदय रोगों का खतरा काफी तेजी से बढ़ता हुआ रिपोर्ट किया जा रहा है। हृदय रोगों को कुछ दशक पहले तक उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारियों के तौर पर जाना जाता था, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इसके मामले 40 से भी कम उम्र के लोगों में देखे जा रहे हैं। कई लोगों की कम उम्र में हार्ट अटैक के कारण मौत भी हो गई है, विशेषज्ञ इसे बड़े खतरे के तौर पर देख रहे हैं। हृदय रोगों के बारे में लोगों को जागरूक करने और इसके बढ़ते गंभीर मामलों के वैश्विक जोखिम को कम करने के उद्देश्य के साथ हर साल 29 सितंबर को वर्ल्ड हार्ट डे मनाया जाता है।
हृदय रोगों के बढ़ते जोखिम के कारणों के समझने के लिए किए जा रहे एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बड़ा दावा किया है। वैज्ञानिकों ने लोगों को सचेत करते हुए बताया है कि पृथ्वी के तापमान में वृद्धि और ग्लोबल वार्मिंग को हृदय रोगों के जोखिम के तौर पर पाया गया है और इसके और भी बदतर होने के संकेत हैं।
इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने हार्ट फेलियर वाले रोगियों में शरीर के वजन और वातावरण में बढ़ते तापमान के बीच के संबंध को समझने की कोशिश की है। वैज्ञानिकों की टीम का कहना है कि जिस तरह से समय के साथ तापमान में वृद्धि दर्ज की जा रही है, इसके काफी गंभीर परिणाम हो सकते हैं, विशेषकर यह हृदय रोगों के जोखिम को काफी बढ़ाने वाली स्थिति है। ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है। आइए इस अध्ययन के बारे में आगे विस्तार से समझते हैं।