भारतीय वैज्ञानिकों ने गठिया की दवा सल्फापायरीडाइन के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए मरीजों को दवा देने का नया तरीका खोजा है। पंजाब स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार सल्फापायरीडाइन गठिया (रूमटॉइड आर्थराइटिस) की तीसरी सबसे पुरानी दवा है जो अब भी इस्तेमाल होती है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक इस दवा के सेवन से जी मिचलाना, उल्टी आना, त्वचा पर चकत्ते पड़ना, चक्कर आना, बेचैनी और पेट में दर्द जैसे दुष्प्रभाव सामने आते हैं। अब शोधकर्ताओं ने मरीजों के शरीर के प्रभावित हिस्से तक सीधे दवा पहुंचाने का तरीका खोज निकाला है।