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Cancer: कैंसर के खिलाफ लड़ाई में वैज्ञानिकों ने किया कमाल, बना ली '100% प्रभाविकता' वाली वैक्सीन

Mon, 08 Sep 2025 11:42 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • रूस ने कैंसर के खिलाफ लड़ाई के लिए एक नई और अति प्रभावी वैक्सीन तैयार कर लेने की जानकारी दी है।
  • जानकारियों के मुताबिक ये एक एमआरएनए-आधारित वैक्सीन है जो कैंसर रोगियों के लिए वरदान साबित हो सकती है। नैदानिक परीक्षणों में इसे 100% प्रभावकारिता वाला और सुरक्षात्मक पाया गया है। 
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कैंसर के खिलाफ वैक्सीन - फोटो : amarujala.com
Enteromix Cancer Vaccine: कैंसर मौजूदा समय की सबसे तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। ये वैश्विक स्तर पर मृत्यु का प्रमुख कारण है, हर साल लाखों लोगों की कैंसर से मौत हो जाती है। बदलती लाइफस्टाइल, जंक फूड्स, धूम्रपान-शराब और वायु प्रदूषण के कारण कैंसर का जोखिम लगातार बढ़ता जा रहा है।

आधुनिक चिकित्सा और नई तकनीकों ने पहले की तुलना में इस रोग के खतरे को कम तो किया है साथ ही इसका इलाज भी अब आसान हुआ है, हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्क्रीनिंग और उपचार की पहुंच कठिन होने के कारण ये बीमारी और इससे होने वाली मौतें अब भी चिंता का कारण बनी हुई हैं।

नई वैक्सीन, लक्षित थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी जैसी आधुनिक उपचार पद्धतियां कैंसर के उपचार को आसान बनाने में मदद कर रही हैं। इसी क्रम में रूस ने कैंसर के खिलाफ लड़ाई में एक नई और अति प्रभावी वैक्सीन तैयार कर लेने की जानकारी दी है। संघीय चिकित्सा और जैविक एजेंसी (एफएमबीए) की प्रमुख वेरोनिका स्क्वोर्त्सोवा के अनुसार, कैंसर के लिए वैज्ञानिकों की टीम ने एक प्रभावी वैक्सीन तैयार कर ली है। कई वर्षों के प्रीक्लिनिकल परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद अब ये उपयोग के लिए तैयार पाई गई है।
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कैंसर के बढ़ते मामले - फोटो : Adobe stock photos
कैंसर की नई वैक्सीन- एंटरोमिक्स

वैक्सीन को लेकर साझा की गई जानकारियों के मुताबिक ये एक एमआरएनए-आधारित वैक्सीन है जो कैंसर रोगियों के लिए वरदान साबित हो सकती है। नैदानिक परीक्षणों में इसे 100% प्रभावकारिता वाला और सुरक्षात्मक पाया गया है। 

एंटरोमिक्स नामक वैक्सीन ने अपने नैदानिक परीक्षणों में बड़े ट्यूमर वाले रोगियों के आकार को कम करने और कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करके में प्रभाविकता दिखाई है जिसने इस खतरनाक जानलेवा रोग के इलाज को लेकर नई उम्मीद दी है। रूस के राष्ट्रीय चिकित्सा अनुसंधान रेडियोलॉजिकल केंद्र ने एंगेलहार्ट इंस्टीट्यूट ऑफ मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (ईआईएमबी) के सहयोग से यह वैक्सीन विकसित की है।
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कैंसर से बचाव के लिए वैक्सीन - फोटो : Adobe Stock
कैंसर के खिलाफ पहली एमआरएन वैक्सीन

स्थानीय रूसी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस वैक्सीन को अब केवल स्वास्थ्य मंत्रालय से अंतिम मंजूरी मिलने का इंतजार है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक एंटरोमिक्स, उसी एमआरएनए तकनीक पर आधारित पहली कैंसर वैक्सीन है जिसका कोविड-19 वैक्सीन में सफलतापूर्वक  इस्तेमाल किया गया है। अगली पीढ़ी की इम्यूनोथेरेपी समाधान के रूप में देखी जा रही इस वैक्सीन को विशेष रूप से कैंसर कोशिकाओं को लक्षित करके उन्हें सटीकता से नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे दुनियाभर के लाखों कैंसर रोगियों को नई उम्मीद मिल सकती है।

एंटेरोमिक्स एक इंट्रामस्क्युलर इंजेक्शन है और रूस के कई ऑन्कोलॉजी केंद्रों में इसका प्रारंभिक नैदानिक उपयोग शुरू हो चुका है।

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कैंसर के उपचार को लेकर बढ़ी उम्मीद - फोटो : Adobe Stock
ट्रायल्स में देखे गए अच्छे परिणाम

मेडिकल रिपोर्ट से पता चलता है कि इसका मुख्य लक्ष्य कोलोरेक्टल कैंसर है पर ये फेफड़े, स्तन या अग्नाशय के कैंसर के रोगियों के लिए भी काफी प्रभावी हो सकती है। वंशानुगत कैंसर सिंड्रोम के उच्च जोखिम वाले और वे रोगी जो कीमोथेरेपी-प्रतिरोधी हो गए हैं या जिनपर कीमोथेरेपी का भी असर नहीं हो रहा है उन्हें भी इस टीके से लाभ मिल सकता है।

इस टीके का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि रोगियों पर परीक्षण के दौरान इसके किसी भी गंभीर दुष्प्रभाव की सूचना नहीं मिली है। 
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कैंसर का इलाज होगा आसान - फोटो : Freepik.com
कई चीजें बनाती हैं इस वैक्सीन को खास

विशेषज्ञों की टीम ने बताया कि खास बात ये है कि इस वैक्सीन को हर रोगी के लिए उनके व्यक्तिगत आरएनए के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है जो इसकी प्रभाविकता को और भी बढ़ा देती है। वैक्सीन के पहले संस्करण का इस्तेमाल कोलोरेक्टल कैंसर के इलाज के लिए किया जाएगा, बाद में इसे अन्य प्रकार के कैंसर के लिए भी प्रयोग में लाया जाएगा। फिलहाल इसके मंजूरी के लिए इंतजार किया जा रहा है।




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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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