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Sputnic V: पहली कोरोना वैक्सीन पर हुआ बड़ा खुलासा, दस्तावेजों से सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

Thu, 13 Aug 2020 10:57 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus Vaccine - फोटो : Twitter@NewsAtIllinois
रूस ने दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन बनाने का दावा किया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपनी बेटी को भी वैक्सीन लगाए जाने की पुष्टि करते हुए मंगलवार को वैक्सीन की स्वीकृति की घोषणा की थी। वैक्सीन के पंजीकरण से पहले से ही तमाम सवाल उठाए जा रहे हैं। ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी आदि देशों और विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैज्ञानिक वैक्सीन पर आपत्ति जता चुके हैं। अब इसके पंजीकरण के दौरान पेश किए गए दस्तावेजों से कई खुलासे हुए हैं। दस्तावेजों के अनुसार, वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर पूरी क्लीनिकल स्टडी हुई ही नहीं। 
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Coronavirus Vaccine - फोटो : Twitter@RusEmbUSA
  • डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रायल के दौरान 42 दिन में केवल 38 वॉलंटियर्स को वैक्सीन की खुराक दी गई, जबकि ट्रायल के तीसरे चरण पर कोई जानकारी सामने नहीं आई है। रूस का दावा था कि वैक्सीन के कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं देखे गए हैं, जबकि पंजीकरण के दौरान प्रस्तुत किए गए दस्तावेज बताते हैं कि 38 में से 31 लोगों में 144 तरह के साइडइफेक्ट दिखे। 
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Russia Vaccine - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन का आरोप है कि रूस ने वैक्सीन तैयार करने के लिए तय दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया, ऐसे में इस वैक्सीन की सफलता पर विश्वास करना मुश्किल है। केवल डब्ल्यूएचओ ही नहीं, कई देशों के विशेषज्ञ इस वैक्सीन पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि दिशानिर्देशों को नजरअंदाज कर वैक्सीन लाना सही नहीं है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा। रूस ने तमाम आरोपों से किनारा करते हुए वैक्सीन के सफल होने की बात कही है। 

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay
रूस के रक्षा मंत्रालय का दावा है कि वैक्सीन के ट्रायल के दौरान वॉलेंटियर्स में बेहतर इम्यूनिटी पैदा हुई है और निगेटिव साइड इफेक्ट नहीं हुए हैं।
  • वहीं दस्तावेजों के मुताबिक सच्चाई कुछ और है। जिन लोगों को वैक्सीन दी गई, उनमें शरीर का तापमान बढ़ना, बुखार, शरीर में दर्द जैसी परेशानियां देखी गईं। शरीर के जिस हिस्से में टीका लगाया गया, वहां खुजली और सूजन की समस्या हुई। वहीं, सिरदर्द, डायरिया, गले में सूजन, भूख न लगने और थकान जैसे साइडइफेक्ट वॉलेंटियर्स में कॉमन थे। 
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कोरोना वायरस वैक्सीन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : पीटीआई
सवाल यह भी है: 
  • रूस के रक्षा मंत्रालय का दो दिन पहले तक ये कहना था कि हम वैक्सीन की रेस में दूसरों से कई महीने आगे चल रहे हैं। इसी महीने में बड़े स्तर पर तीन और ट्रायल किए जाएंगे। और फिर अचानक 11 अगस्त को पंजीकरण के बाद राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि वैक्सीन से जुड़े सभी जरूरी ट्रायल पूरे हो गए हैं। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
रूस ने अबतक वैक्सीन के जितने भी ट्रायल किए हैं, उससे जुड़ा साइंटिफिक डाटा प्रस्तुत नहीं किया। तीसरे चरण का ट्रायल किया या नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं है।
  • इन्हीं संशयों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रवक्ता क्रिस्टियन लिंडमियर ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा था कि तीसरे चरण का ट्रायल किए बगैर ही अगर किसी वैक्सीन के उत्पादन के लिए लाइसेंस जारी कर दिया जाता है, तो यह खतरनाक स्थिति है। दस्तावेजों के मुताबिक, जो भी ट्रायल हुए हैं वो मात्र 42 दिन के अंदर पूरे हो गए हैं, जबकि यह एक लंबी प्रक्रिया होती है।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
रूसी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि वैक्सीन सुरक्षित है, लेकिन इसका आधार क्या है?
  • दुनियाभर में तमाम वैक्सीन कैंडिडेट्स के बारे में डेटा, प्रभाव और अहम जानकारियां साझा की जा रही है, लेकिन रूसी वैक्सीन में मामले में ऐसा नहीं है। ट्रायल से जुड़े बयान ही सामने आए हैं। वैक्सीन के ट्रायल के परिणाम साइंटिफिक जर्नल में प्रकाशित नहीं कराए गए। डब्ल्यूएचओ ने कहा है, वैक्सीन उत्पादन के लिए दिशानिर्देश तय हैं, लेकिन रूस ने इसका पालन नहीं किया है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media/PTI
रूसी सरकार और वैक्सीन तैयार करने वाले संस्थान के बयान में अंतर
  • वैक्सीन तैयार करने वाले गामेलिया नेशनल रिसर्च सेंटर ने कहा था कि वैक्सीन देने के बाद बुखार आ सकता है, लेकिन इसे पैरासिटामॉल की टेबलेट देकर ठीक आसानी किया जा सकता है। लेकिन मंगलवार को रूसी सरकार ने बयान दिया कि ट्रायल में अब  कोई साइड इफेक्ट नहीं दिखा। राष्ट्रपति पुतिन का कहना था कि उनकी बेटी को वैक्सीन की पहली डोज दी गई तो शरीर का तापमान पहले एक डिग्री बढ़ा फिर कम हो गया। उन्होंने दावा किया है कि उनकी बेटी के शरीर में एंटीबॉडीज बढ़ी हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • दस्तावेज में बताया गया है कि वैक्सीन के साइड इफेक्ट केवल बुखार तक ही सीमित नहीं है। रशिया की न्यूज एजेंसी फोटांका की रिपोर्ट कहती है कि वॉलंटियर्स के शरीर में दिखने वाले साइड इफेक्ट की लंबी लिस्ट है। वहीं, इस पर अब गामालेया रिसर्च सेंटर का कहना है कि इतने कम लोगों पर हुई रिसर्च के आधार पर यह कह पाना मुश्किल है कि स्पष्टत: कौन सा साइड इफेक्ट दिखेगा।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • दस्तावेजों के मुताबिक, 38 वॉलंटियर्स पर वैक्सीन का ट्रायल हुआ, जिनमें 144 तरह के साइड इफेक्ट देखे गए। ट्रायल के 42 वें दिन भी 38 में से 31 वॉलंटियर्स कई तरह के साइड इफेक्ट से जूझ रहे थे। वहीं, 27 तरह के साइड इफेक्ट ऐसे भी हैं, जिनकी वजह वैक्सीन बनाने वाले संस्थान को भी समझ नहीं आ रही है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
  • राष्ट्रपति पुतिन ने मंगलवार को अपनी बेटी का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वैक्सीन का डोज लेने के बाद बेटी में काफी मात्रा में एंटीबॉडीज बनीं। जबकि दस्तावेजों के मुताबिक, वैक्सीन की डोज देने के बाद वॉलंटियर्स में औसत स्तर से भी कम एंटीबॉडीज बनीं। ऐसे तमाम संदेहास्पद दावे हैं, जिनकी सच्चाई कुछ और है। इन्हीं कारणों से विशेषज्ञ इस वैक्सीन पर सवाल उठा रहे। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सवाल उठा रहे दुनियाभर के विशेषज्ञ 
  • यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के प्रोफेसर फ्रांसुआ बैलक्स का कहना है कि दिशानिर्देशों को नजरअंदाज कर रूस का वैक्सीन लाना गलत और शर्मनाक फैसला है। बड़े स्तर पर लोगों को वैक्सीन लगाना उनकी सेहत के साथ खिलवाड़ होगा। अमेरिका और ब्रिटेन ने भी इस वैक्सीन पर सवाल उठाया है। ब्रिटेन ने तो यहां तक कह दिया कि वह इस वैक्सीन को अपने देश में इस्तेमाल नहीं करेगा।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
  • जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्री जेंस स्पान ने भी वैक्सीन पर सवाल उठाया है। उनके मुताबिक, रूसी वैक्सीन की पर्याप्त जांच नहीं की गई। इसे लोगों को देना सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। वैक्सीन सबसे पहले बने, यह जरूरी नहीं है, जरूरी है कि यह सुरक्षित हो। मालूम हो कि डब्ल्यूएचओ ने अपनी वेबसाइट पर क्लीनिकल ट्रायल से गुजर रहीं 25 वैक्सीन की सूची दी है, जबकि 139 वैक्सीन अभी प्री-क्लीनिकल स्टेज में हैं।
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