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Covid-19: क्या सर्दी का मौसम आते ही दोबारा बढ़ने लगेगा संक्रमण? WHO की इस चेतावनी पर ध्यान देने की जरूरत

Sat, 03 Sep 2022 02:54 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना संक्रमण से सावधानी बरतने की आवश्यकता - फोटो : Pixabay
कोरोना महामारी को ढाई साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अबतक इससे जुड़े कई सवाल किसी पहेली से कम नहीं हैं। यह महामारी कब खत्म होगी, क्या मौसम के आधार पर संक्रमण के मामले बढ़ने लगते हैं? ऐसे कई सवाल अब भी लोगों के मन में हैं, जिनका अध्ययनों से भी कोई ठोस जवाब नहीं मिल पाया है। कुछ ही दिनों के बाद देश में शरद ऋतु की शुरुआत होने वाली है, ऐसे में एक बार फिर से यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या  सर्दी का मौसम आते ही कोरोना के मामले और इसकी गंभीरता बढ़ने लगेगी?

पिछले दो साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि सितंबर-अक्तूबर तक कंट्रोल में रहने वाला संक्रमण नवंबर-दिसंबर के महीने में रफ्तार पकड़ने लगता है।

संक्रमण की प्रकृति को जानने के लिए हुए कई अध्ययनों में इस बात पर जरूर जोर दिया गया है कि कोरोना मौसम आधारित संक्रमण नहीं है, यानी कि अध्ययनों की मानें तो जरूरी नहीं है कि ठंड के मौसम में इसका खतरा बढ़ जाता है, हालांकि देश के रिकॉर्ड इन रिपोर्ट्स पर सोचने को मजबूर करते हैं। इस बीच  विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी एक सम्मेलन में  चेतावनी दी है कि संक्रमण के नए मामलों में मौजूदा गिरावट के बावजूद, आने वाले महीनों में ठंड के मौसम में एक बार फिर से संक्रमण के बढ़ने की आशंका है। आइए जानते हैं कि आखिर किस आधार पर इस तरह का दावा किया जा रहा है, क्या हम आने वाले दिनों में फिर से संक्रमण में उछाल देखने जा रहे हैं?
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डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस एडनॉम घेब्रेसियस - फोटो : ANI
क्या कहता है डब्ल्यूएचओ?

इसी हफ्ते संवाददाताओं से एक बातचीत के दौरान डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेसियस ने कहा कि विश्व स्तर पर कोविड -19 से मौत के मामलों में जरूर कमी देखी जा रही है। हालांकि कई देशों में ठंड का मौसम आ रहा है, ऐसे में आने वाले महीनों में एक बार फिर से संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है। इसको लेकर सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। पहले भी ठंड के मौसम में संक्रमण के मामलों में इजाफा देखने को मिला है।
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नए वैरिएंट्स को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत - फोटो : Pixabay
नए वैरिएंट्स बढ़ा रहे हैं चिंता

कोरोना के नए वैरिएंट्स को लेकर चिंता जाहिर करते हुए डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा कि ओमिक्रॉन के मौजूदा सब-वैरिएंट, पहले के वैरिएंट्स के मुकाबले अधिक संक्रामकता वाले हैं। इनसे और भी खतरनाक वैरिएंट्स के उभरने का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर अभी भी अधिक जोखिम वाले लोगों में टीकाकरण कवरेज बहुत कम है, खासकर कम आय वाले देशों में यह समस्या अधिक देखी जा रही है। इसके कारण संक्रमण के बढ़ने और वायरस में म्यूटेशन के साथ नए खतरों के उभरने का संकट बना हुआ है, जिसको लेकर सभी को विशेष सतर्कता बरतनी होगी। कोविड के मामले भले ही कम हो गए हैं पर, संक्रमण खत्म नहीं हुआ है इस बात का सभी को ध्यान रखना चाहिए।

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कोरोना का सर्दियों में बढ़ सकता है खतरा - फोटो : iStock
ठंड के मौसम में बढ़ जाता है संक्रमण का खतरा

मौसम आधारित कोरोनावायरस के संक्रमण को लेकर नेचर जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में कैलिफोर्निया स्थित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजिस्ट डेविड रेलमैन कहते हैं, सर्दी के मौसम में कोरोना के अधिक संक्रामक होने के मामले देखे गए हैं। इन्फ्लूएंजा जैसे श्वसन संक्रमण का कारण बनने वाले वैरिएंट्स  की संक्रामकता प्रकृति सर्दियों के मौसम में बदल जाती है। प्रयोगशाला अध्ययनों से पता चलता है कि सार्स-सीओवी-2  वायरस भी ठंड और शुष्क परिस्थितियों में अधिक संक्रामकता का कारण बन सकता है।
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नए वैरिएंट्स की संक्रामकता दर अधिक - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

शोधकर्ताओं का कहना है कि फिलहाल कोरोना के जिस प्रकार से अति संक्रामक वैरिएंट्स के मामले देखने को मिलते रहे हैं, वह भले ही हल्के लक्षणों वाले हों पर फिर भी हम सभी को इसके खतरे को लेकर सावधानी बरतने की आवश्यकता है। अगर संक्रमण के मामलों पर रोक नहीं लगाई जाती है तो इन वैरिएंट्स में और भी म्यूटेशन हो सकता है, जिससे और भी गंभीर वैरिएंट्स आने का खतरा हो सकता है।

इस तरह के संकट से बचाव के लिए सभी लोगों को लगातार कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते रहना जरूरी है। भले ही आपका वैक्सीनेशन हो चुका है, कोविड से बचाव के उपायों का पालन करते रहें। 


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नोट:
यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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