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Malaria Risk: बारिश में मलेरिया का खतरा, बच्चे होते हैं सबसे ज्यादा शिकार; डॉक्टरों ने बताए शुरुआती संकेत

Fri, 03 Jul 2026 08:04 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मलेरिया पूरी तरह से रोकी जा सकने वाली बीमारी है। यदि माता-पिता इसके शुरुआती संकेतों को पहचान लें, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं और समय पर डॉक्टर से संपर्क करें, तो बच्चों को गंभीर स्थिति से बचाया जा सकता है।
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मलेरिया का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
बारिश का मौसम गर्मी से राहत दिलाने वाला होता है, लेकिन इन दिनों में सेहत को लेकर सावधानी बहुत जरूरी हो जाती है। बारिश और जगह-जगह जलजमाव के कारण मच्छर जनित रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है। यही कारण है कि इन दिनों में डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं। 

मलेरिया की बीमारी वैसे तो किसी को भी हो सकती है। पर बच्चों में इसका खतरा सबसे ज्यादा देखा जाता रहा है। बच्चे खेलते समय बाहर ज्यादा समय बिताते हैं, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी पूरी तरह विकसित नहीं होती और कई बार वे अपने लक्षण ठीक से बता भी नहीं पाते। यही वजह है कि बच्चों में मलेरिया की पहचान देर से होती है और बीमारी तेजी से गंभीर रूप ले सकती है। बच्चों के अलावा गर्भवती महिलाओं के लिए भी इस बीमारी को जानलेवा माना जाता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अच्छी बात ये है कि मलेरिया पूरी तरह से रोकी जा सकने वाली बीमारी है। यदि माता-पिता इसके शुरुआती संकेतों को पहचान लें, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं तो बच्चों में इस बीमारी के खतरे को काफी कम किया जा सकता है।
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मच्छरों से होने वाली बीमारियां - फोटो : Freepik.com
बच्चों में मलेरिया का खतरा

अध्ययनों से पता चलता है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों में मलेरिया का खतरा वयस्कों की तुलना में अधिक माना जाता है। इसका मुख्य कारण उनकी विकसित होती इम्युनिटी है, जो संक्रमण से प्रभावी ढंग से लड़ने में अभी पूरी तरह सक्षम नहीं होती। 
 
  • यदि बच्चा पहली बार मलेरिया परजीवी के संपर्क में आता है, तो बीमारी तेजी से गंभीर हो सकती है। 
  • कुपोषित बच्चों या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, उनमें जोखिम और बढ़ जाता है। 

अगर आपके घर के आसपास गंदा पानी जमा रहता है, साफ-सफाई की कमी है तो ये स्थितियां आपमें भी इस बीमारी के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
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मलेरिया का खतरा - फोटो : Freepik.com
बच्चों में मलेरिया की पहचान कैसे करें?

डॉक्टर कहते हैं, मलेरिया की शुरुआत सामान्य वायरल बुखार जैसे लक्षणों के साथ होती है।
  • इसके अलावा बच्चे को तेज बुखार, ठंड लगने-कंपकंपी, अत्यधिक पसीना आने, सिरदर्द और कमजोरी जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं।
  • छोटे बच्चों में चिड़चिड़ापन, लगातार रोना, दूध न पीना या सुस्ती भी संकेत हो सकता है कि शरीर स्वस्थ नहीं है।
  • यदि आप ऐसी जगहों पर रहते हैं जहां मलेरिया का खतरा ज्यादा है, तो इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 

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मलेरिया के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
क्या हो सकते हैं इसके खतरे?

यदि मलेरिया का इलाज समय पर न मिले तो बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। 
 
  • बच्चे में मलेरिया के कारण दौरे पड़ने, बेहोशी, सांस लेने में परेशानी, किडनी-लिवर पर भी असर हो सकता है।
  • गंभीर संक्रमण में शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। छोटे बच्चों में यह स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। 
  • अधिकांश मामलों में समय पर इलाज शुरू होने पर बच्चा पूरी तरह ठीक हो जाता है। हालांकि दवा का पूरा कोर्स करना बेहद जरूरी है।
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मच्छरों से बचाव जरूरी - फोटो : Freepik.com
बच्चों को मलेरिया से कैसे बचाएं?

मलेरिया से बचाव के लिए मच्छरों को पनपने से रोकना और मच्छरों से बचाव करना सबसे जरूरी माना जाता है।
 
  • बच्चों को रात में मच्छरदानी के अंदर सुलाएं। पूरी बांह के कपड़े पहनाएं और मच्छरों को भगाने वाले तरीके अपनाएं।
  • घर के आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले, टायर और टंकियों की नियमित सफाई करें। 
  • खिड़कियों पर जाली लगाएं और घर के आसपास स्वच्छता बनाए रखें। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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