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पेट की गड़बड़ी: बार-बार दस्त हो रहे हैं? हर बार फूड पॉइजनिंग नहीं, ये भी हो सकते हैं कारण

Thu, 29 Oct 2026 05:36 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Recurrent Diarrhea: बार-बार दस्त होने की वजह केवल फूड पॉइजनिंग नहीं है। संक्रमण, लैक्टोज इनटॉलरेंस, दवाओं के दुष्प्रभाव और आंतों की बीमारियां के कारण भी ये समस्या हो सकती हैं। जानिए दस्त के दौरान ओआरएस का सही इस्तेमाल, डिहाइड्रेशन के संकेत और किन लक्षणों में डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना जरूरी है?
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दस्त की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
डायरिया या दस्त की दिक्कत होना काफी आम है। आमतौर पर खान-पान और पाचन में गड़बड़ी के कारण ये समस्या होती है। दस्त के कारण शरीर से भारी मात्रा में पानी निकल जाता है, जिससे डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है, जो आपकी दिक्कतों को और भी बढ़ा सकती है।

बार-बार दस्त होने पर अक्सर लोग मान लेते हैं कि ये फूड पॉइजनिंग की दिक्कत है। दूषित भोजन या पानी के कारण तो ये दिक्कत होती ही है, लेकिन हर बार यही कारण हो ये जरूरी नहीं है। वायरस, बैक्टीरिया और परजीवी के अलावा कुछ दवाएं, खाद्य पदार्थों को पचाने में परेशानी और आंतों से जुड़ी कुछ बीमारियां भी दस्त का कारण बन सकती हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, दिन में तीन या उससे अधिक बार पतला या तरल मल आना या सामान्य आदत से अधिक बार पतला मल आने को दस्त माना जाता है। बार-बार दस्त होने पर सबसे बड़ा खतरा शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी यानी डिहाइड्रेशन है।

आइए जानते हैं कि फूड पॉइजनिंग के अलावा और किन-किन वजहों से आपको दस्त की दिक्कत हो सकती है?
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दस्त की दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण

आंतों में संक्रमण को दस्त का सबसे आम कारण माना जाता है। दूषित पानी, अधपका भोजन, अस्वच्छ तरीके से तैयार खाना और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से कुछ संक्रमण फैल सकते हैं। वायरस, बैक्टीरिया और परजीवी तीनों दस्त की समस्या बढ़ाने वाले हो सकते हैं। यही कारण है कि दस्त के साथ अगर पेट दर्द, उल्टी, बुखार या कमजोरी जैसे लक्षण हो रहे हों तो उन्हें अनदेखा नहीं करना चाहिए।
 
  • कुछ लोगों को दूध में मौजूद लैक्टोज पचाने में परेशानी होती है। ऐसे लोगों में दूध या कुछ डेयरी उत्पाद लेने के बाद दस्त, गैस और पेट फूलने जैसे लक्षण हो सकते हैं। इसे लैक्टोज इनटॉलरेंस कहा जाता है।
  • कुछ अन्य खाद्य पदार्थ भी कुछ लोगों में दस्त की समस्या बढ़ा सकते हैं। 
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पाचन की दिक्कतों के कारण दस्त - फोटो : adobe stock images
दवाओं के कारण भी हो सकती है ये परेशानी

क्या आप जानते हैं कि कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव के कारण भी आपको दस्त की दिक्कत हो सकती है? 
 
  • कुछ एंटीबायोटिक, मैग्नीशियम वाले एंटासिड जैसी दवाओं से दस्त हो सकते हैं। एंटीबायोटिक लेने के बाद कुछ मामलों में आंतों के सामान्य माइक्रोबायोम में बदलाव हो सकता है, जिससे पाचन में गड़बड़ी और दस्त की समस्या हो सकती है।
  • अगर किसी दवा के बाद दस्त शुरू हुए हैं, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी दें। निर्धारित दवा खुद से बंद न करें और बिना सलाह दस्त रोकने वाली दवा न लें।

आंतों से जुड़ी बीमारियों के कारण दस्त

बार-बार या लंबे समय तक दस्त होने के पीछे इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस), सीलिएक डिजीज या आंतों की सूजन से जुड़ी बीमारियां भी हो सकती हैं। यदि दस्त बार-बार लौट रहे हों, वजन घट रहा हो या मल में खून आ रहा हो, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
 
  • आईबीएस जैसी समस्याएं सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाली हो सकती हैं, यही कारण है कि सभी लोगों को इसके लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देते हुए इलाज कराना जरूरी है।
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पेट की समस्याएं और दस्त - फोटो : Adobe stock
दस्त होने पर क्या करें?

बार-बार दस्त के दौरान शरीर से भारी मात्रा में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स निकल जाते हैं। डिहाइड्रेशन की समस्या आपकी दिकक्तों के गंभीर बना सकती है, यही कारण है कि दस्त होते ही ओआरएस का घोल लेना शुरू कर दें। स्तनपान करने वाले बच्चे को स्तनपान जारी रखें और भोजन पूरी तरह बंद न करें।
 
  • दस्त के साथ अत्यधिक सुस्ती, पानी न पी पाने, मल में खून या तेज पेट दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर की मदद लें। 
  • छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में विशेष सावधानी जरूरी है।
  • डिहाइड्रेशन की स्थिति ब्लड प्रेशर वाले मरीजों के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकती है, इसलिए दस्त या उल्टी होने पर तुरंत शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति करने वाली चीजें पिएं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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