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माता-पिता रहें अलर्ट: बच्चों में जानलेवा हो सकती है निमोनिया की समस्या, आपका बच्चा भी तो नहीं है शिकार?

Thu, 29 Oct 2026 05:35 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Pneumonia In Children: निमोनिया बच्चों के फेफड़ों में होने वाला संक्रमण है, जो वायरस, बैक्टीरिया या फंगस से हो सकता है। छोटे बच्चों में तेजी से सांस चलने, छाती में जकड़न और दूध-पानी न पी पाना जैसे संकेत होते हैं। जानिए टीकाकरण-स्तनपान और बचाव के जरिए जोखिम कैसे कम करें?
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निमोनिया की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : Amarujala.com/AI
सर्दी-जुकाम और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं बच्चों में काफी आम हैं। आमतौर पर ये परेशानियां खुद से या फिर हल्की-फुल्की दवाओं से आसानी से ठीक हो जाती हैं, पर बच्चों में लगातार बनी रहने वाली इन दिक्कतों के अनदेखा  नहीं किया जाना चाहिए। कई बार छोटे बच्चों में ये निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती हैं।

आंकड़ों से पता चलता है कि निमोनिया दुनियाभर में बच्चों में संक्रमण से मौत का सबसे बड़ा संक्रामक कारण है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों की कुल मौतों में से 14-16% से ज्यादा मौतें निमोनिया की वजह से होती हैं। मसलन हर साल 6 से 7.40 लाख से ज्यादा बच्चों की जान इस बीमारी के कारण चली जाती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, निमोनिया वायरस, बैक्टीरिया या फंगस तीनों के कारण हो सकता है। बच्चों को इस खतरनाक संक्रमण से बचान के लिए सभी माता-पिता को अलर्ट रहना चाहिए।
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बच्चों में निमोनिया की दिक्कत - फोटो : Freepik.com
बच्चों में निमोनिया क्यों होता है?

निमोनिया फेफड़ों का संक्रमण है। इसमें फेफड़ों की छोटी वायु थैलियों में तरल पदार्थ या पस जमा हो जाता है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है। यह वायरस, बैक्टीरिया या कुछ मामलों में फंगस के संक्रमण से हो सकता है। छोटे बच्चों में रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस (आरएसवी), न्यूमोकोकल बैक्टीरिया और दूसरे संक्रमण इसका जोखिम बढ़ाने वाले हो सकते हैं।
 
  • पांच साल से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया का खतरा ज्यादा देखा जाता रहा है। 
  • कुपोषण, इम्युनिटी में कमजोरी, समय से पहले जन्म और कुछ पहले से मौजूद बीमारियां इसका जोखिम बढ़ा सकती हैं।
  • घर में लकड़ी, कोयले या गोबर जैसे ईंधन से निकलने वाला धुआं, भीड़भाड़ और खराब वेंटिलेशन भी बच्चों के श्वसन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। 
  • इसलिए बचाव के लिए सिर्फ दवा नहीं, बल्कि बच्चे के आसपास का वातावरण और पोषण भी महत्वपूर्ण हैं। 
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सर्दी-खांसी की समस्या - फोटो : Freepik.com
बच्चों में निमोनिया की पहचान क्या है?

छोटे बच्चों में वैसे तो श्वसन समस्याएं होना काफी आम हैं, पर खांसी और बुखार के साथ तेज सांस चलने या सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं निमोनिया के संकेत हो सकती हैं। छोटे बच्चों में सांस लेते समय छाती का निचला हिस्सा अंदर धंसना गंभीर संकेत माना जाता है जिसे लेकर सभी लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए।
 
  • यदि बच्चा दूध या पानी नहीं पी पा रहा, बहुत सुस्त है या सांस लेने में गंभीर परेशानी है, तो तुरंत अस्पताल ले जाएं।
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बच्चों में निमोनिया की समस्या - फोटो : Freepik.com
बच्चों को निमोनिया से कैसे बचाएं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, बच्चों में निमोनिया के मामले गंभीर और जानलेवा हो सकते हैं। इसलिए सभी माता-पिता को निमोनिया से बचाव के लिए सावधान रहने की सलाह दी जाती है। कुछ सामान्य से उपाय निमोनिया के जोखिमों को कम करने में मदद कर सकते हैं। 

सभी बच्चे को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार टीके लगवाएं। न्यूमोकोकल, खसरा और काली खांसी से बचाव के टीके निमोनिया से संबंधित कुछ संक्रमणों का जोखिम कम करने में मदद करते हैं।
 
  • जन्म के पहले छह महीने तक केवल स्तनपान कराएं। इसके बाद उपयुक्त पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखना जरूरी है।
  • बच्चे के आसपास धुआं न होने दें। खाना पकाने में स्वच्छ ईंधन और उचित वेंटिलेशन का इस्तेमाल करें।
  • हाथ धोने, खांसते-छींकते समय मुंह ढकने और बीमार लोगों के निकट संपर्क को कम करने से भी बच्चों को इस संक्रमण से बचाया जा सकता है।
  • निमोनिया के लक्षण दिखते ही तुरंत बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाएं। समय पर इलाज होने से जटिलताओं को कम किया जा सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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