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ICMR Report: अचानक दिल का दौरा पड़ने के पीछे क्या है वजह, गैर संक्रमितों में भी देखा गया जोखिम

Sun, 25 Jun 2023 05:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले - फोटो : iStock
पिछले दो साल का डेटा देखें तो पता चलता है कि वैश्विक स्तर पर सडेन हार्ट अटैक के मामलों में भारी उछाल आया है। चिंताजनक बात ये है कि इसके सबसे ज्यादा शिकार 25-44 के आयुवर्ग वाले लोग हो रहे हैं, जिन्हें कुछ दशकों पहले तक हृदय रोगों के जोखिमों से काफी सुरक्षित माना जाता रहा था। पार्टी में डांस करते, काम करते-करते अचानक आए हार्ट अटैक के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। पर आखिर इसकी असली वजह क्या है? हार्ट अटैक इतना कॉमन क्यों होता जा रहा है, इसे समझने के लिए शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में बड़ा खुलासा किया है।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के विशेषज्ञों ने हाल ही में किए एक अध्ययन में बताया कि कोविड-19 के बाद सडेन हार्ट अटैक के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। संक्रमण के दुष्प्रभावों के कारण कम उम्र के लोग भी इसके शिकार रहे हैं। कोविड के शिकार या जिन्हें संक्रमण नहीं भी हुआ उनमें भी इसका जोखिम देखा जा रहा है।
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हार्ट अटैक के कारण - फोटो : istock
कोरोना ने हृदय-फेफड़ों को किया प्रभावित

हार्ट अटैक के कारणों को जानने के लिए शोधकर्ताओं ने दिल के दौरे से मरने वाले 100 से अधिक लोगों की जांच की। इसमें पाया गया कि हार्ट अटैक के शिकार ज्यादातर वे लोग हुए, जो महामारी के दौरान संक्रमण की चपेट में आए थे। शवों की एमआरआई जांच में कोरोना के कारण हृदय-फेफड़ों की समस्याओं के बारे में पता चला। इसके पहले के अध्ययनों में भी यह स्पष्ट किया गया था कि कोरोना वायरस हृदय के लिए समस्याएं बढ़ा रहा है।
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कोरोना हृदय और फेफड़े दोनों को क्षति पहुंचाता है। - फोटो : iStock
कोरोना का हृदय पर दुष्प्रभाव

दिसंबर 2022 में हुए एक शोध में वैज्ञानिकों की टीम ने बताया कि कोरोना, हृदय और फेफड़े दोनों को क्षति पहुंचाता है। वायरस आमतौर पर फेफड़ों को प्रभावित करता है लेकिन यह हृदय की गंभीर समस्याओं को भी जन्म दे सकता है। वायरस के कारण होने वाली फेफड़ों की क्षति के कारण हृदय की मांसपेशियों तक ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाता है, जिसके कारण हृदय के ऊतकों को नुकसान पहुंचाता है।

इसके अलावा धमनियों पर भी कोरोना के दुष्प्रभावों के बारे में अलर्ट किया गया था, जो सीधे तौर पर हृदय की गंभीर समस्याओं का कारक है।

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कोरोना ने लोगों को गंभीर रूप से संक्रमित किया - फोटो : iStock
महामारी की प्रतिकूल परिस्थितियों ने बढ़ाया जोखिम

आईसीएमआर की रिपोर्ट में कहा गया कि कोरोना वायरस ने लोगों को गंभीर रूप से संक्रमित किया, इसके कारण होने वाली थकान-कमजोरी के चलते लोगों में शारीरिक निष्क्रियता बढ़ी और खान-पान में गड़बड़ी भी देखी गई, ये सभी हार्ट अटैक के जोखिमों को बढ़ाने वाली स्थितियां हैं।

इसके अलावा जो लोग संक्रमण से सुरक्षित रहे फिर भी हार्ट अटैक के शिकार हुए उनमें इसका प्रमुख कारण लंबे समय तक बैठना और उस हिसाब से व्यायाम या शारीरिक निष्क्रियता में कमी देखी गई। लॉकडाउन की परिस्थितियों में व्यायाम या शारीरिक मेहनत की कमी आई जिसने लोगों की सेहत को प्रभावित किया।
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वैक्सीनेशन के दुष्प्रभाव? - फोटो : ANI
वैक्सीनेशन से बढ़ाया जोखिम?

कुछ रिपोर्ट्स कहते हैं, कोविड वैक्सीनेशन के दुष्प्रभावों ने भी हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा दिया है। हालांकि आईसीएमआर की जांच में इसका संबंध नहीं पाया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि कोरोना के हृदय पर होने वाले दुष्प्रभावों को लेकर पहले के अध्ययनों में भी पुष्टि की गई है हालांकि वैक्सीनेशन के कारण यह बढ़ा है, ऐसा नहीं कहा जा सकता है।

इससे संबंधित अध्ययन की विस्तृत रिपोर्ट अगले दो हफ्तों में सामने आने की उम्मीद है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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