गैस-एसिडिटी होने पर क्या करें?
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क्या कहते हैं डॉक्टर?
अमर उजाला से बातचीत में इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर विकास कुमार कहते हैं, रैनिटिडीन को लेकर लंबे समय से विवाद है। भारत में ये बैन तो नहीं है पर हम मरीजों को ये दवा प्रिस्क्राइब नहीं कर रहे हैं। इस दवा की जगह पर हम फैमोटिडाइन और सिमेटिडीन दवा लिखते हैं। ये दवाएं भी रैनिटिडीन की तरह एच2-रिसेप्टर ब्लॉकर हैं जो गैस-एसिडिटी कम करने में मदद करती हैं। पैंटोप्राजोल भी अच्छा विकल्प है। सबसे अच्छी बात इन्हें सुरक्षित पाया गया है।
रैनिटिडीन की जगह पर फैमोटिडाइन और सिमेटिडीन थोड़ी महंगी जरूर हो सकती हैं और ये भी हो सकता है कि इसका असर देर से हो, पर सेहत को खतरा नहीं रहता।
गैस या एसिडिटी की समस्या से बचने और हर बार दवा पर निर्भर होने के बजाय लाइफस्टाइल-खानपान में बदलाव सबसे ज्यादा असरदार होता है।
- खाने के तुरंत बाद न लेटें और ज्यादा मसालेदार, तेल वाले और प्रोसेस्ड फूड् कम खाएं।
- छोटे-छोटे अंतराल में खाना खाएं और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी पेट की एसिडिटी को नियंत्रित करने में मदद करता है।
- प्राकृतिक उपाय जैसे अदरक, सौंफ, और छाछ भी हल्की एसिडिटी में राहत दे सकते हैं।
- नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण भी एसिड रिफ्लक्स को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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स्रोत:
Toxicological Profile for N-Nitrosodimethylamine (NDMA).
FDA Requests Removal of All Ranitidine Products (Zantac) from the Market
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