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Pulmonary Hypertension: हाइपरटेंशन की इस समस्या में त्वचा का रंग पड़ जाता है नीला, जा सकती है जान

Thu, 17 Aug 2023 03:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फेफड़ों में होने वाली समस्याएं - फोटो : iStock
हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को शरीर में कई प्रकार की गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाता है। इससे हार्ट अटैक से लेकर स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है। लाइफस्टाइल में गड़बड़ी को हाइपरटेंशन की बढ़ती समस्या का प्रमुख कारण माना जाता रहा है।

हाइपरटेंशन की स्थिति और इसके जोखिमों को लेकर तो हम सभी जानते हैं पर क्या आपने पल्मोनरी हाइपरटेंशन के बारे में सुना है? स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यह बीमारी तेजी से बढ़ती जा रही है, जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।

पल्मोनरी हाइपरटेंशन भी उच्च रक्तचाप का ही एक प्रकार है जो फेफड़ों और हृदय के दाहिने हिस्से की धमनियों को प्रभावित करता है। पल्मोनरी हाइपरटेंशन के एक प्रकार जिसे पल्मोनरी आर्टरियल हाइपरटेंशन कहा जाता है, इसमें फेफड़ों में रक्त वाहिकाएं संकुचित, अवरुद्ध या क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इस तरह की स्थिति के कारण फेफड़ों के माध्यम से रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है, जिसके कई तरह के दुष्प्रभाव हैं।
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पल्मोनरी हाइपरटेंशन के जोखिम - फोटो : iStock
पल्मोनरी हाइपरटेंशन का बढ़ता जोखिम

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पल्मोनरी हाइपरटेंशन कुछ लोगों में गंभीर और जानलेवा भी हो सकती है, ऐसे में इसके खतरे को लेकर सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है। जिस तरह से हमारी लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी की समस्या बढ़ती जा रही है, इन रोगों का जोखिम भी बढ़ रहा है।

इससे बचाव के लिए जरूरी है कि हम निरंतर प्रयास करते रहें जिससे इसके जोखिमों को कम किया जा सके। 
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पल्मोनरी हाइपरटेंशन की समस्या - फोटो : istock
क्यों होती है पल्मोनरी हाइपरटेंशन की समस्या?

पल्मोनरी हाइपरटेंशन की समस्या विकसित होने के कई कारण हो सकते हैं। इसमें लाइफस्टाइल और आहार से संबंधित दिक्कतों के अलावा कुछ प्रकार के अंतर्निहित कारण जैसे जन्मजात हृदय रोग, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर, लिवर के रोग (सिरोसिस), फेफड़ों में रक्त के थक्के बनने जैसे स्थितियां शामिल हैं। 

सामान्यतौर पर फेफड़ों में रक्त वाहिकाओं के माध्यम से हृदय के बाईं ओर आसानी से रक्त प्रवाहित होता है लेकिन फेफड़ों की धमनियों को लाइन करने वाली कोशिकाओं में परिवर्तन के कारण धमनी की दीवारें संकीर्ण, कठोर, सूज सकती हैं। ये परिवर्तन फेफड़ों के माध्यम से रक्त के प्रवाह को धीमा कर देते हैं, जिससे इस गंभीर रोग होने का खतरा कम हो सकता है।

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त्वचा के रंग में बदलाव की स्थिति - फोटो : iStock
पल्मोनरी हाइपरटेंशन के लक्षणों को जानिए

पल्मोनरी हाइपरटेंशन की स्थिति शरीर में कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। आमतौर पर इसके लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं और बीमारी बढ़ने के साथ इसका अधिक होने लग जाता है।
  • व्यायाम करते समय सांस की तकलीफ होना।
  • शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने के कारण त्वचा का रंग नीला या भूरा होना। 
  • त्वचा के रंग के आधार पर इन परिवर्तनों को आसानी से देखा जा सकता है।
  • सीने में दबाव या दर्द महसूस होना। 
  • चक्कर आना या बेहोशी होना। 
  • दिल की धड़कन का बढ़ना और अधिक थकान महसूस होते रहना।
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फेफड़ों को स्वस्थ रखने के करें उपाय - फोटो : iStock
पल्मोनरी हाइपरटेंशन का इलाज और बचाव

पल्मोनरी हाइपरटेंशन का कोई इलाज नहीं है, हालांकि लक्षणों को सुधारने और इसके जोखिमों को कम करके जीवन की गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए दवाइयों और कुछ प्रकार की थेरेपी की मदद ली जा सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाल में कुछ प्रकार के बदलाव की स्थिति इस रोग के जोखिमों को कम करने में मददगार हो सकती है।

साबुत अनाज, फल और सब्जियां, लीन मीट और कम वसा वाले डेयरी उत्पादों से भरपूर स्वस्थ आहार का सेवन करना हाइपरटेंशन के खतरे को कम कर सकता है। इसके अलावा जितना संभव हो उतना सक्रिय रहें और वजन नियंत्रित करें। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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