पैथोलॉजिकल ड्रॉपी आइलिड-टोसिस
- फोटो : Freepik.com
पैथोलॉजिकल ड्रॉपी आइलिड-टोसिस की समस्या
मेडिकल की भाषा में इसे पैथोलॉजिकल ड्रॉपी आइलिड के नाम से जाना जाता है। यह तंत्रिकाओं में क्षति, अंतर्निहित चिकित्सा स्थितियों या स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं के कारण हो सकता है।
एक रिपोर्ट के अनुसार ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के नेत्ररोग विभाग में हर महीने लगभग 100 मरीज इसी तरह की दिक्कत के साथ आ रहे हैं, इनमें बच्चे भी शामिल हैं। नेत्ररोग विभाग के अध्यक्ष कृष्ण कुलदीप गुप्ता ने बताया कि पलकों का कम उठना, आखों की सुंदरता तो खराब करता ही है, साथ ही देखने की क्षमता भी प्रभावित करता है।
देखने की क्षमता पर पड़ सकता है असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, टोसिस की समस्या कई मामलों में स्थाई हो सकती है। कुछ लोगों में इसे जन्मजात भी माना जाता है। डॉक्टर बताते हैं कि स्थिति की गंभीरता के आधार पर, झुकी हुई ऊपरी पलकें पुतली को बाधित कर सकती हैं, इससे देखने की क्षमता पर भी असर हो सकता है। अधिकांश मामलों में ये स्थिति स्वाभाविक रूप से या कुछ उपचार-थेरेपी से ठीक हो जाती है, हालांकि कुछ स्थितियों में इसे ठीक करने के लिए सर्जरी कराने की जरूरत हो सकती है।