फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Health Alert: नॉनवेज खाते हैं तो जरूर पढ़िए ये खबर, कहीं आप भी न हो जाएं कैंसर का शिकार?

Sat, 26 Apr 2025 07:39 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शोधकर्ताओं की एक टीम ने हालिया अध्ययन में बताया कि अच्छी सेहत के लिए शाकाहारी भोजन, प्लांट बेस्ड आहार खाना अधिक लाभकारी हो सकता है। चिकन-मटन या अन्य पशुओं से पर आधारित डाइट कई प्रकार से सेहत को क्षति पहुंचाने वाली हो सकती है, इससे कैंसर का जोखिम हो सकता है।
विज्ञापन
1 of 4
नॉन वेज खाते हैं तो जान लीजिए ये बातें - फोटो : Freepik.com
हमारा खान-पान कैसा होना चाहिए, नॉनवेज या वेज? इसपर लंबे समय से चर्चा होती रही है। अलग-अलग अध्ययनों के अलग-अलग निष्कर्ष हैं। कुछ शोध प्लांट बेस्ड आहार को सेहत के लिए विशेष लाभप्रद मानते हैं, जबकि कुछ अध्ययन आयरन और प्रोटीन की आवश्यकताओं को पूर्ति के लिए पशु आधारित भोजन के सेवन की सलाह देते हैं।

अगर आपके भी मन में ये सवाल बना रहता है कि सेहत को ठीक रखने के लिए क्या खाना चाहिए- नॉनवेज या वेज तो हालिया अध्ययन में इसका जवाब मिल गया है।

शोधकर्ताओं की एक टीम ने अध्ययन में बताया कि अच्छी सेहत के लिए शाकाहारी भोजन, प्लांट बेस्ड आहार खाना अधिक लाभकारी हो सकता है। चिकन-मटन या अन्य पशुओं से पर आधारित डाइट कई प्रकार से सेहत को क्षति पहुंचाने वाली हो सकती है। इतना ही नहीं ज्यादा चिकन खाने से कैंसर का खतरा बढ़ने को लेकर भी सावधान किया गया है। 
विज्ञापन

2 of 4
मांस-चिकन खाने से होने वाले नुकसान - फोटो : freepik.com
ज्यादा चिकन खाने से हो सकता है गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर

इटली में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के शोधकर्ताओं की एक टीम ने नियमित रूप से चिकन खाने और पाचन तंत्र के कैंसर के बीच संबंधों का खुलासा किया है।

न्यूट्रिएंट्स जर्नल में प्रकाशित इस रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने कहा कि मटन की तुलना में भले ही चिकन (मुर्गा) खाने को लाभकारी माना जाता रहा है, पर अगर आप अक्सर चिकन भी खाते हैं तो ये सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे पेट के कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों की टीम ने 20 साल की अवधि में इटली में रहने वाले 4,869 वयस्कों के स्वास्थ्य संबंधी डेटा का विश्लेषण किया। शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रति सप्ताह 300 ग्राम से अधिक पोल्ट्री (चिकन) खाने वाले लोगों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर और इसके कारण समय से पहले मृत्यु की आशंका अधिक थी। 
विज्ञापन

3 of 4
पाचन तंत्र के कैंसर का खतरा - फोटो : adobe stock images
मटन ही नहीं चिकन भी नुकसानदायक

पिछले अध्ययनों में कहा जाता रहा है कि रेड मीट (मटन) खाने की तुलना में पोल्ट्री (मुख्य रूप से चिकन) खाना अधिक स्वास्थ्यवर्धक है क्योंकि इससे हृदय रोग और कुछ प्रकार के कैंसर होने का जोखिम कम होता है। लेकिन अब इस नवीनतम शोध से पता चलता है कि नियमित रूप से अगर आप चिकन खाते हैं तो इससे जानलेवा कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है।

इस शोध के दौरान प्रतिभागियों ने अपने खाने की आदतों के बारे में प्रश्नावली भरी थी। उनकी स्वास्थ्य स्थिति का मूल्यांकन मेडिकल हिस्ट्री और क्षेत्रीय डेटाबेस का उपयोग करके किया गया। शोधकर्ताओं ने जिन कारकों पर ध्यान दिया उनमें से एक यह था कि प्रतिभागियों ने कितनी बार रेट मीट या चिकन खाई।

इस आधार पर दो ग्रुप में बांटे गए लोगों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों ने चिकन का सेवन अधिक किया उनमें भविष्य में कैंसर का खतरा भी अधिक देखा गया।
विज्ञापन

4 of 4
नॉन वेज खान पान को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : freepik.com
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

शोधकर्ता कहते हैं, अध्ययन के निष्कर्ष अलर्ट करने वाले हैं लेकिन इसको और विस्तार से समझने के लिए आगे अधिक शोध की आवश्यकता है।

उदाहरण के लिए, अभी तक यह निर्धारित नहीं हो पाया है कि क्या मृत्यु की बढ़ी हुई दर सीधे पोल्ट्री खाने के कारण थी या इस बात से संबंधित थी कि इसे कैसे पकाया गय, इसे कैसे तला गया आदि। अध्ययन में कुछ स्वास्थ्य और जीवनशैली कारकों जैसे प्रतिभागियों की शारीरिक गतिविधि-वजन कैसे कारकों को भी अभी और विस्तार से समझने की जरूरत है।




--------------
स्रोत और संदर्भ

Does Poultry Consumption Increase the Risk of Mortality for Gastrointestinal Cancers? A Preliminary Competing Risk Analysis

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें