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PNES Alert: मिर्गी जैसे लक्षण पर मिर्गी नहीं, जानिए क्या है बिहार-पूर्वांचल में बढ़ रही ये रहस्यमयी बीमारी

Sat, 07 Mar 2026 03:32 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पूर्वांचल और बिहार के करीब 10 से अधिक जिलों में महिलाओं और बच्चों में साइकोजेनिक सिंड्रोम का खतरा बढ़ता जा रहा है। वाराणसी के बीएचयू अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग में हाल के दिनों में इसके मरीजों की संख्या बढ़ गई है। आइए जान लेते हैं क्या है ये बीमारी?
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मिर्गी जैसे लक्षणों वाली बीमारी - फोटो : Adobe Stock
डायबिटीज, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर जैसी क्रॉनिक बीमारियों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर को लेकर भी अलर्ट कर रहे हैं, जो मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और तंत्रिकाओं को प्रभावित करती है और लोगों में अपंगता का खतरा हो सकता है।

पूर्वांचल और इससे सटे बिहार के कुछ जिलों से साइकोजेनिक सिंड्रोम के बढ़ते मामलों की खबर सामने आ रही है। बनारस स्थित बीएचयू अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग में हर महीने इस बीमारी के शिकार 150-200 परिवार पहुंच रहे हैं, रोगियों में छोटे बच्चों से लेकर महिलाएं और वयस्क सभी शामिल हैं। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. विजयनाथ मिश्रा ने बताया कि दो साल पहले तक सप्ताह में 10-20 मरीज आते थे, लेकिन पिछले एक वर्ष में यह संख्या बढ़कर 50 तक पहुंच गई है।

साइकोजेनिक सिंड्रोम आखिर है क्या और इसके कारण किस तरह की समस्याओं का खतरा रहता है, आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं।
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क्या है साइकोजेनिक सिंड्रोम? - फोटो : Adobe Stock Photo
बढ़ते मामलों को लेकर अलर्ट

रिपोर्ट के अनुसार पूर्वांचल के  देवरिया, मऊ, सोनभद्र, मिर्जापुर, गाजीपुर, जौनपुर सहित इससे सटे बिहार के कई जिलों जैसे भभुआ, सासाराम, औरंगाबाद, कैमूर, बक्सर से भी मरीज बीएचयू में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

आमतौर पर इस रोग में मरीजों में मिर्गी की तरह शरीर में कंपन या ऐंठन जैसे लक्षण देखे जाते हैं, पर ये मिर्गी होता नहीं है। मेडिकल की भाषा में इसे पीएनईएस (साइकोजेनिक नॉन-एपिलेप्टिक सिंड्रोम) या फंक्शनल सीजर भी कहा जाता है।

मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की समस्या आपके नर्वस सिस्टम का एक फिजिकल रिएक्शन की वजह से होती है। इसे मनोवैज्ञानिक विकार के तौर पर देखा जाता है।
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मिर्गी जैसे लक्षणों वाली ये समस्या है क्या? - फोटो : Adobe Stock
साइकोजेनिक नॉन-एपिलेप्टिक सिंड्रोम के कारण क्या हैं?

साइकोजेनिक सिंड्रोम की समस्या क्यों होती हैं, इसके लिए कई कारणों को जिम्मेदार पाया जाता है। कुछ मामलों में इसमें जेनेटिक्स भी भूमिका हो सकती है। ये मनोवैज्ञानिक कारणों की वजह से भी हो सकता है।

आमतौर पर भावनाओं को समाझने और जाहिर करने में मुश्किल होने या स्ट्रेस देने वाली चीजों पर ठीक से रिस्पॉन्स न देने वालों में इसका खतरा अधिक होता है। कोई मेंटल हेल्थ समस्याएं भी इस तरह के दौरों को ट्रिगर कर सकती है। 
 

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साइकोजेनिक सिंड्रोम की पहचान कैसे की जाती है? - फोटो : iStock
साइकोजेनिक सिंड्रोम में क्या-क्या दिक्कतें होती हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, परिवार में कलह के कारण होने वाले मानसिक आघात या फिर सिर में लगी चोट की वजह से भी कई लोगों में साइकोजेनिक नॉन-एपिलेप्टिक सिंड्रोम का खतरा हो सकता है। मिर्गी जैसे झटकों के अलावा आपको कई तरह की दिक्कतें होने लगती हैं।
 
  • पूरे शरीर में कंपन हो सकता है, जो मिर्गी में आम है।
  • आपके अंगों में मरोड़ या झटके आ सकते हैं। 
  • आंखें बंद होने पर कोई प्रतिक्रिया न होना। 
  • होश में न रहना या अजीब तरह से हाथ-पैरों का हिलना
  • सिर का तेजी से एक तरफ कंपन होना या हिलते रहना।
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कैसे क्या जाता है इस समस्या का इलाज? - फोटो : Adobe stock
इस रोग को कैसे ठीक किया जाता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, साइकोजेनिक सिंड्रोम में आमतौर पर मनोवैज्ञानिक थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है।

कॉगनेटिव बिहेवियर थेरेपी (सीबीटी) को इस समस्या में काफी प्रभावी माना जाता है। मरीजों की साइकोलॉजिकल काउंसिलिंग भी की जाती है। लक्षणों को ठीक करने के लिए डॉक्टर कुछ दवाओं की भी सलाह दे सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कुछ स्थितियों में पीएनईएस आपकी पूरी जिंदगी पर असर डाल सकता है। लेकिन सही डायग्नोसिस और इलाज से लक्षणों को ठीक किया जा सकता है। अक्सर लोग इस समस्या को मिर्गी मानकर झाड़-फूंक और इलाज कराते रहते हैं जिससे समस्या का सही कारण पता नहीं चल पाता और दिक्कतें बढ़ने लगती हैं।




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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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