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Health Alert: एसिडिटी से राहत देने वाली ये दवा डैमेज कर सकती है किडनी और लिवर, विशेषज्ञों ने किया सावधान

Sat, 13 Jun 2026 07:39 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रोटॉन पंप इनहिबिटर्स ऐसी दवाएं हैं जो पेट की परत में मौजूद "प्रोटॉन पंप" को ब्लॉक करके एसिड के उत्पादन को कम करती हैं। ओमेप्राजोल, पैंटोप्राजोल, लैंसोप्राजोल और एसोमेप्राजोल इस वर्ग की प्रमुख दवाएं हैं। इन्हें गैस्ट्रोएसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज पेट के अल्सर, बार-बार होने वाली एसिडिटी और कुछ विशेष दवाओं के कारण होने वाले पेट के नुकसान से बचाने के लिए दिया जाता है।
 
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गैस की गोली कहीं बढ़ा न दे मुश्किलें - फोटो : Amarujala.com/AI
खान-पान में गड़बड़ी के अलावा कम होती शारीरिक गतिविधियों ने लोगों में गैस-एसिडिटी की समस्या को काफी आम कर दिया है। जो लोग ज्यादा मसालेदार चीजें खाते हैं, देर से डिनर करते हैं और खाने के तुरंत बाद सो जाते हैं उनमें एसिडिटी की समस्या अधिक देखी जाती रही है।

हार्टबर्न, एसिडिटी, गैस अपच होते ही अक्सर लोग पास के मेडिकल स्टोर से लेकर गैस की गोली खा लेते हैं। ये दवाएं तुरंत आराम तो दे देती हैं पर क्या आप जानते हैं कि दीर्घकालिक रूप में ये गोलियां ऐसी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती हैं, जो जानलेवा भी मानी जाती हैं। 

हाल ही में अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने जानकारी दी थी कि कुछ कॉमन गैस की गोलियां जैसे रैनिटिडीन, आपकी सेहत के लिए इतनी खतरनाक हो सकती हैं कि इनसे कैंसर तक का खतरा रहता है। इन्हीं खतरों को देखते हुए यूके-यूएस और सिंगापुर जैसे कई देश पहले से ही इसे बैन कर चुके हैं।

इसी क्रम में विशेषज्ञों की टीम ने बताया कि एसिड रिफ्लक्स की कुछ दवाएं आपकी किडनी और लिवर के लिए भी मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकती हैं। लंबे समय तक इनका इस्तेमाल लिवर-किडनी फेलियर का भी कारण बन सकता है।
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गैस-एसिडिटी से परेशान रहते हैं आप? - फोटो : Freepik.com
प्रोटॉन पंप इनहिबिटर्स दवाओं से किडनी को खतरे

मेडिकल रिपोर्ट्स में विशेषज्ञों की टीम ने प्रोटॉन पंप इनहिबिटर्स (पीपीआईएस) दवाओं के समूह को सेहत के लिए काफी हानिकारक बताया है। अध्ययन में पाया गया कि इन दवाओं का लंबे समय तक सेवन करने से किडनी फेलियर का खतरा कई गुना बढ़ सकता है।
 
  • प्रोटॉन पंप इनहिबिटर्स दवाओं को कई ब्रांड के नाम से बेचा जाता है। ये दुनियाभर में सबसे ज्यादा लिखी जाने वाली दवाओं में से एक हैं।
  • अमेरिका में लगभग 10 प्रतिशत वयस्क हार्टबर्न, एसिड रिफ्लक्स और गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (जीईआरडी) जैसी समस्याओं के लिए इन दवाओं का इस्तेमाल करते हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन डिएगो के स्कैग्स स्कूल ऑफ फार्मेसी एंड फार्मास्युटिकल साइंसेज के शोधकर्ताओं ने एक रिपोर्ट में बताया कि पीपीआईएस दवाएं लेने वाले लोगों में किडनी संबंधी बीमारियों का खतरा उन लोगों की तुलना में काफी ज्यादा पाया गया, जो एसिडिटी की दूसरी दवाएं (जैसे हिस्टामिन-2 रिसेप्टर एंटागोनिस्ट) लेते थे।
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प्रोटॉन पंप इनहिबिटर्स दवाओं के खतरे - फोटो : Freepik.com
अध्ययन में क्या पता चला?

अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और फार्मेसी के प्रोफेसर डॉ. रूबेन अबाग्यान कहते हैं, अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के डेटा से हमें इसके संभावित दुष्प्रभावों को जानने में मदद मिलती है, जो सामान्य क्लीनिकल ट्रायल में सामने नहीं आते। क्लीनिकल ट्रायल अक्सर सीमित समय तक चलते हैं और उनमें प्रतिभागियों की संख्या तथा विविधता भी कम होती है।
 
  • अध्ययन में शोधकर्ताओं ने केवल उन मरीजों को चुना जो सिर्फ पीपीआई दवाएं ले रहे थे और कोई अन्य दवा नहीं ले रहे थे। इस तरह अध्ययन में लगभग 43,000 मरीज शामिल किए गए।
  • वहीं दूसरी ओर लगभग 8,000 ऐसे मरीजों का समूह बनाया गया जो केवल हिस्टामिन-2 रिसेप्टर ब्लॉकर दवाएं ले रहे थे और कोई अन्य दवा नहीं ले रहे थे। 
  • दोनों समूहों में किडनी से जुड़ी समस्याओं के मामलों का विश्लेषण किया गया, जिसके परिणाम काफी चौंकाने वाले थे। 

किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा

शोधकर्ताओं ने पाया कि केवल पीपीआईएस  लेने वाले मरीजों में 5.6 प्रतिशत ने किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याओं की शिकायत की। जबकि केवल एच2 ब्लॉकर लेने वाले मरीजों में यह आंकड़ा मात्र 0.7 प्रतिशत था।
 
  • जब शोधकर्ताओं ने आंकड़ों को और गहराई से देखा तो पाया कि पीपीआईएस लेने वाले मरीजों में क्रॉनिक किडनी डिजीज की आशंका 28.4 गुना अधिक थी। 
  • इसी तरह एक्यूट किडनी इंजरी का खतरा 4.2 गुना और एंड-स्टेज रीनल डिजीज का खतरा 35.5 गुना अधिक था।
  • अध्ययन में यह भी सामने आया कि पीपीआईएस लेने वाले लोगों में शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स (जैसे सोडियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम) के असंतुलन की समस्या भी अधिक देखी गई।
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गैस की दवा और कैंसर का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
लिवर की बीमारियों का भी खतरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, पीपीआईएस कई मरीजों के लिए बेहद जरूरी दवाएं हो सकती हैं। फिर भी शोधकर्ताओं का मानना है कि इस अध्ययन के परिणाम डॉक्टरों को अधिक सतर्क रहने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। खासकर उन मरीजों के मामले में, जिन्हें पहले से किडनी रोग या इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का खतरा है। 

इससे पहले साल 2017 में प्रकाशित एक अध्ययन में संकेत मिले थे कि पीपीआईएस दवाएं चूहों और इंसानों दोनों में क्रॉनिक लिवर डिजीज के जोखिमों को भी बढ़ा सकती हैं। 


रैनिटिडाइन दवाओं को लेकर भी किया गया सावधान

अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने रैनिटिडाइन दवाओं से कैंसर के खतरे को लेकर सावधान किया था। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि रैनिटिडीन के साथ सबसे बड़ा खतरा ये है जब आप इसे स्टोर करते हैं तो इसमें एक केमिकल बनना शुरू हो जाता है। इसे एन-नाइट्रोसोडाइमिथाइलएमीन (एनडीएमए) कहा जाता है।

अध्ययनों में पाया गया है कि ये एक अत्यधिक विषैला और संभावित कार्सिनोजेन (कैंसर पैदा करने वाला रसायन) है। कई देश इसके इस्तेमाल को प्रतिबंधित तक कर चुके हैं पर भारत में अब भी ये ओवर-द-काउंटर प्रयोग में लाया जा रहा है।  


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स्रोत:
1. Analysis of postmarketing safety data for proton-pump inhibitors reveals increased propensity for renal injury, electrolyte abnormalities, and nephrolithiasis

2. FDA Requests Removal of All Ranitidine Products (Zantac) from the Market

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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