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जानना जरूरी: घर-परिवार की जिम्मेदारियों में अपनी सेहत से न करें समझौता, महिलाओं के लिए जरूरी हैं ये सात टेस्ट

Tue, 13 Oct 2026 06:52 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Women's Health Screening: महिलाओं को स्वस्थ रहने के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच पर ध्यान देना चाहिए। पीसीओएस, डायबिटीज, सर्वाइकल-ब्रेस्ट कैंसर और प्रसव के बाद मानसिक स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग महत्वपूर्ण हो जाती है। सही समय पर जांच से बीमारियों की पहचान में मदद मिल सकती है।
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महिलाओं की सेहत - फोटो : Amarujala.com/AI
लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी के कारण कई तरह की क्रॉनिक बीमारियां तेजी से बढ़ती जा रही हैं। कम उम्र में ही लोग डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को कम उम्र से ही हेल्थ चेकअप कराते रहने की सलाह देते हैं।

डॉक्टर कहते हैं, सभी महिलाओं को अपनी सेहत को लेकर और भी अलर्ट रहने की जरूरत है। महिलाएं आमतौर पर घर-परिवार और काम की जिम्मेदारियां निभाते हुए अक्सर अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। कभी लगातार थकान को काम का दबाव समझ लिया जाता है, तो कभी पीरियड्स की अनियमितता, वजन बढ़ने या शरीर में दर्द को सामान्य मानकर छोड़ दिया जाता है। लेकिन शरीर में होने वाले ये बदलाव कई बार किसी बीमारी के शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं। 

इस तरह के जोखिमों को समझने और इसके खतरे को कम करने में नियमित हेल्थ चेकअप मददगार हो सकता है। 
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महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याएं - फोटो : Freepik.com
सेहत का ध्यान रखें सभी महिलाएं

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, डायबिटीज, सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर के साथ हार्मोन्स से जुड़ी समस्याओं का समय रहते पता चल जाए, तो इनके कारण होने वाली जटिलताओं को इलाज के माध्यम से कम किया जा सकता है।  यही वजह है कि स्वस्थ महसूस करने के बावजूद नियमित हेल्थ चेकअप कराते रहना जरूरी है।

अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि किस तरह से हार्ट और कई बीमारियों के लक्षण महिला-पुरुषों में अलग-अलग हो सकते हैं। आइए जान लेते हैं कि महिलाओं को अपनी सेहत को ठीक रखने के लिए कौन से सात टेस्ट कराते रहने चाहिए?
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महिलाओं में डायबिटीज के मामले - फोटो : Adobe Stock
डॉक्टर कहते हैं, सभी महिलाओं को अपनी सेहत के लिए समय निकालना जरूरी है। आपको कौन-सी जांच कब करवानी है, आपकी उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और व्यक्तिगत जोखिमों का आकलन करके डॉक्टर इसके बारे में सलाह देते हैं। इसलिए नियमित जांच करवाएं और शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज न करें।

पीसीओएस की जांच
  • पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) के कारण पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं। इसे अब पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीएमओएस) के नाम से जाना जाता है। इसमें पीरिएड्स के अलावा मुंहासे, वजन बढ़ने और चेहरे पर बाल आने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। समय पर पहचान से लक्षणों को नियंत्रित करने और इंफर्टिलिटी जैसी समस्याओं से बचाव में भी मदद मिल सकती है।

डायबिटीज की जांच
  • जिन महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज हुई थी, उन्हें आगे भी ब्लड शुगर की जांच करवानी चाहिए। इससे भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम का पता लगाने में मदद मिलती है।

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ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम - फोटो : Adobe Stock
सर्वाइकल कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर की स्क्रीनिंग
 
  • एचपीवी टेस्ट और पैप स्मीयर की मदद से गर्भाशय के मुंह में वायरस या असामान्य कोशिकाओं का पता लगाया जा सकता है। इससे कैंसर से पहले होने वाले बदलावों की पहचानने में मदद मिलती है। इसी तरह मैमोग्राफी स्तनों में ऐसे असामान्य बदलावों का पता लगाने में मदद करती है, जिन्हें हाथ से महसूस करना मुश्किल हो सकता है। नियमित जांच से बीमारी को बढ़ने से पहले रोका जा सकता है।

हार्मोन संबंधी जांच
 
  • पीरियड्स की अनियमितता, लगातार थकान, वजन में बदलाव और नींद की परेशानी होने पर डॉक्टर हार्मोन या थायरॉइड संबंधी जांच की सलाह दे सकते हैं।
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मेंटल हेल्थ की समस्या - फोटो : Freepik.com
कोलोरेक्टल कैंसर स्क्रीनिंग
  • स्टूल टेस्ट और कोलोनोस्कोपी के जरिए बड़ी आंत और मलाशय में कैंसर और असामान्य बदलावों का पता लगाया जा सकता है।

प्रसव के बाद मानसिक स्वास्थ्य की जांच
  • बच्चे के जन्म के बाद लगातार उदासी, बेचैनी, अत्यधिक चिंता या रोजमर्रा के कामों में परेशानी महसूस होने पर मानसिक स्वास्थ्य की जांच जरूरी हो सकती है। महिलाओं में प्रसव के बाद डिप्रेशन होने का खतरा बढ़ जाता है यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ मेंटल हेल्थ के लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देते रहने की सलाह देते हैं।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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