Pregnancy Cravings: कई अध्ययनों में सामने आया है कि गर्भावस्था के दौरान दो लोगों जितना भोजन नहीं, बल्कि दो गुना अधिक पौष्टिक और संतुलित भोजन करना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान अचानक किसी खास चीज को खाने की तीव्र इच्छा होने लगती है। विशेषज्ञ इसे ‘क्रेविंग’ कहते हैं। वैसे तो यह एक सामान्य अनुभव है, लेकिन हर क्रेविंग को पूरा करना सही नहीं होता, खासकर गर्भावस्था के दौरान। ऐसे में जरूरी है कि आप अपनी क्रेविंग्स को समझें।
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गर्भावस्था में बार-बार कुछ खास खाने की इच्छा क्यों होती है?
- फोटो : AI
क्यों होती है क्रेविंग?
गर्भावस्था में प्रोजेस्टेरोन, एस्ट्रोजन और ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन जैसे हार्मोंन के स्तर में तेजी से बदलाव होते हैं। ये मस्तिष्क के उन हिस्सों को प्रभावित करते हैं, जो भूख, स्वाद और गंध को नियंत्रित करते हैं। इसलिए कभी मीठा, कभी नमकीन या तीखा खाने की इच्छा होने लगती है। इसके अलावा भ्रूण के विकास के लिए शरीर को आयरन, कैल्शियम, फोलिक एसिड, प्रोटीन और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों की भी अधिक आवश्यकता होती है। कुछ मामलों में चॉकलेट की इच्छा मैग्नीशियम की कमी और अत्यधिक नमकीन खाने की इच्छा सोडियम की जरूरत का संकेत देती है। वहीं मिट्टी, चॉक या बर्फ जैसी अखाद्य चीजें खाने की इच्छा, जिसे ‘पाइका’ कहा जाता है, अक्सर आयरन की कमी से जुड़ी होती है। इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।
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हर क्रेविंग को पूरा करना जरूरी नहीं
गर्भावस्था के दौरान शरीर का मेटाबॉलिज्म और ब्लड शुगर स्तर लगातार बदलता रहता है। ऐसे में बार-बार जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, चिप्स, मिठाइयों या अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन तेजी से वजन बढ़ा सकता है। इससे गर्भावधि मधुमेह (गेस्टेशनल डायबिटीज), हाई ब्लड प्रेशर और प्रसव संबंधी जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही ऐसे खाद्य पदार्थ आवश्यक पोषक तत्वों की जगह लेते हैं, जिससे मां और शिशु दोनों में पोषण की कमी हो सकती है। इसलिए इस दौरान यह समझना जरूरी है कि यह वास्तविक भूख है या क्रेविंग। असली भूख पौष्टिक भोजन से शांत होती है, जबकि क्रेविंग किसी विशेष स्वाद से।
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क्रेविंग होने पर चुनें बेहतर विकल्प
क्रेविंग को दबाने के बजाय समझदारी से संतुलित करना बेहतर होता है। मीठा खाने की इच्छा होने पर फल, खजूर, किशमिश या सीमित मात्रा में शहद जैसे प्राकृतिक विकल्प चुनें। तली-भुनी चीजों की जगह भुने मखाने, नट्स या रोस्टेड स्नैक्स बेहतर विकल्प हैं। दिन भर में छोटे-छोटे संतुलित भोजन लेने से ब्लड शुगर नियंत्रित रहता है और अचानक क्रेविंग्स कम होती हैं। पर्याप्त पानी पीना, हल्का व्यायाम करना और डॉक्टर द्वारा बताए गए आयरन, फोलिक एसिड व अन्य सप्लीमेंट्स समय पर लेना भी जरूरी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर गर्भवती महिला को अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ की सलाह से व्यक्तिगत डाइट प्लान अपनाना चाहिए, ताकि मां और शिशु दोनों का स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।
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डॉक्टर से कब करें बात
यदि मिट्टी, चॉक या अन्य अखाद्य चीजें खाने की इच्छा हो, क्रेविंग इतनी ज्यादा हो कि संतुलित भोजन प्रभावित होने लगे या आपको अपनी डाइट और वजन को लेकर चिंता हो, तो डॉक्टर से सलाह लें। गर्भावस्था में पोषण की जरूरत हर महिला की स्वास्थ्य स्थिति और गर्भावस्था के चरण के अनुसार अलग होस सकती है, इसलिए व्यक्तिगत डाइट प्लान डॉक्टर या योग्य पोषण विशेषज्ञ की सलाह से बनाना बेहतर होता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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