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Pregnancy and Water Break: प्रसव के पहले दिखें ये संकेत तो हो जाइए सतर्क

Wed, 09 Nov 2022 02:25 PM IST
स्वाति शैवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गर्भवस्था में चाहिए खास देखभाल - फोटो : social media
गर्भावस्था के नौ महीनों के कुशलता से निकलने और स्वस्थ बच्चे के जन्म के लिए होने वाली माँ सहित पूरा परिवार हर जतन करता है। पौष्टिक भोजन से लेकर आराम करने और माँ को तनाव रहित रखने के लिए तमाम प्रयास होते हैं। मां बन जाने तक का सफर और सही व सुरक्षित प्रसव कई सारे उतार-चढ़ाव से होकर गुजरता है। बच्चा पूरे नौ माह सुरक्षित रहे और साथ ही उसकी रक्षा करने, पोषण देने वाली पानी की थैली अर्थात एमनियोटिक फ्लूड से भरी थैली भी सुरक्षित रहे यह आवश्यक होता है। 

बच्चे को सुरक्षित रखने वाली पानी की इस थैली के अचानक फट जाने की स्थिति कई कारणों से बन सकती है। जिसे सामान्य बोलचाल में वॉटर ब्रेक होना भी कहा जाता है। यह स्थिति मन को अचानक घबराहट और आशंका से भर देती है कि कहीं बच्चे को कुछ हो न जाए? खासकर पहली बार माँ बन रही किसी महिला के लिए यह अनुभव परेशानी का कारण भी बन सकता है। 
लेकिन घबराने की बजाय इस स्थिति को समझने और सही कदम उठाने की आवश्यकता होती है। जानिए कुछ बातें इसी संबंध में। 
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शिशु के लिए महत्वपूर्ण गर्भ के भीतर की थैली - फोटो : istock
महत्वपूर्ण पानी की थैली 

एमनियोटिक फ्लूड से भरी थैली गर्भ में बच्चे के आस पास गर्म, सुरक्षित और आरामदायक वातावरण का निर्माण करती है और पूरे नौ महीने बच्चे के विकास व उसके मूवमेंट्स में मदद करती है। इसके साथ ही यह थैली अम्बिलिकल कॉर्ड यानी गर्भनाल के लिए भी कुशन की तरह काम करती है ताकि उसे कोई नुकसान न पहुंचे। बच्चा इस पानी में तैरते हुए अपनी स्थिति बदलता रहता है और हाथ-पैर चलाता रहता है। इसलिए ही इस थैली का बने रहना इतना महत्वपूर्ण होता है।
 
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प्रसव पीड़ा के संकेत को समझें
जब फट जाती है थैली 

द्रव्य से भरी यह थैली आमतौर पर तब फटती है जब शरीर बच्चे को प्राकृतिक तरीके से जन्म देने के लिए तैयार होता है। इस स्थिति में थैली से पानी योनिद्वार के द्वारा बाहर आ जाता है। पानी के बाहर निकलने की यह प्रक्रिया प्रसव के कुछ समय पूर्व भी हो सकती है और प्रसव के दौरान भी। इस स्थिति में माँ की गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) भी फैलने और सिकुड़ने लगती है ताकि बच्चा सामान्य तरीके से बाहर आ सके। गर्भाशय ग्रीवा की यह प्रक्रिया संकुचन कहलाती है। सामान्य प्रसव यानी नॉर्मल डिलीवरी के दौरान डॉक्टर इस स्थिति पर नजर बनाये रखते हैं और फिर समय आने पर लेबर रूम में ले जाते है। 

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अचानक सामने आती है वॉटर ब्रेक होने की स्थिति
अचानक थैली का फटना 
 

यह स्थिति तब बनती है जब गर्भाशय ग्रीवा का संकुचन शुरू भी नहीं होता। इस स्थिति को प्री लेबर रप्चर ऑफ़ मेमब्रेन्स कहा जाता है। अध्ययनों की मानें तो 9 माह पूरे कर चुकीं करीब 10 प्रतिशत महिलाओं में लेबर इसी तरह शुरू होता है। कई बार यह थैली लेबर स्टार्ट होने के कुछ समय बाद भी फट सकती है। थैली के फटने को लेकर असमंजस भी इसलिए ही बनता है क्योंकि हर महिला के लिए यह अनुभव अलग होता है और ऐसे में किसी भी एक की राय सब पर लागू नहीं की जा सकती।
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बच्चे के लिए हो सकता है खतरा
इसलिए ध्यान रखें 

द्रव्य से भरी इस थैली का फटना और सही समय पर डॉक्टर के पास न पहुंच पाना शिशु के जीवन के लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है। कई बार इस स्थिति में बच्चे की जान को भी खतरा हो सकता है। इसलिए डॉक्टर बार बार आपको इस स्थिति पर नजर रखने को कहते हैं। घबराने की बजाय या किसी से भी घरेलू सलाह लेने की बजाय इस समय सीधे डॉक्टर के पास जाना जरूरी होता है ताकि बच्चे को सुरक्षित बाहर लाने और माँ को भी तकलीफ से बचाने में मदद मिल सके। 
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लापरवाही से गंभीर हो सकती है समस्या
यह भी हो सकते हैं कारण 

कुछ महिलाओं में समय से पहले द्रव्य की इस थैली के फटने की स्थिति भी बन सकती है। इसे प्रीटर्म प्रीलेबर रप्चर ऑफ मेंब्रेन्स (पीपीआरओएम) कहा जाता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं-
 
  • गर्भवती का वजन बहुत कम होना (अंडरवेट) 
  • धूम्रपान या शराब 
  • पहली बार की प्रेग्नेंसी में इसी स्थिति का होना 
  • पहले से यूटीआई (यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन) का होना जिसका इलाज न हुआ हो 
  • प्रेग्नेंसी में किसी भी समय ब्लीडिंग का होना 
  • गर्भावस्था के समय सर्विक्स में कुछ समस्या का होना,आदि  
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तुरंत लें डॉक्टर की सलाह
इन लक्षणों पर दें ध्यान 

आवश्यक यह है कि इस थैली के फटने से संबंधित लक्षणों पर ध्यान दिया जाए, ताकि किसी भी मुश्किल स्थिति को बनने से रोका जा सके। यह लक्षण हर एक महिला के लिए अलग भी हो सकते हैं। ऐसे लक्षण जो यह बता सकते हैं कि थैली फट गई है, उनमें शामिल हैं-
 
  • अचानक ऐसा महसूस होना जैसे पेशाब छूट गई हो 
  • लगातार गीलेपन का एहसास बने रहना
  • धीमे धीमे पानी जाने का अनुभव होना 
  • पानी का लीक होना, फिर कुछ देर रुकना और फिर शुरू होना 
  • कई बार हल्के से बुलबुले के फूटने जैसा अनुभव भी हो सकता है 
  • यह पानी गंध रहित होता है यह ध्यान रखें कि इसमें से पेशाब जैसी गंध नहीं होती 
  • यदि थैली 23 वे हफ्ते के पहले ही फटने के संकेत मिलने लगें तो यह गंभीर खतरे का संकेत हो सकता है
  • इन सारी स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें 

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लक्षणों पर रखें ध्यान - फोटो : mirror
यह करें 

यदि आपको ऐसा अनुभव होता है कि पानी की थैली फट गई है तो तुरंत ये कदम उठाएं-
 
  • पैड पहन लें। इससे गीलेपन का अनुभव नहीं होगा।
  • टेम्पून का इस्तेमाल न करें।
  • तुरंत डॉक्टर या प्रशिक्षित दाई से सम्पर्क करें। 
  • कई बार द्रव्य की थैली फटी है या नहीं यह लक्षणों से पता नहीं चल पाता। ऐसे में डॉक्टर द्रव्य का सैंपल लेकर उसकी जांच कर सकते हैं। यह भी एक सामान्य प्रक्रिया है, इसे लेकर परेशान न हों।
  • अगर यह स्थिति ड्यू डेट (प्रसव की तय तारीख से पहले) से 3 हफ्ते पहले बन रही हो तो डॉक्टर आपको कुछ घंटे इंतज़ार करने को कह सकते हैं। हो सकता है कि यह लेबर शुरू होने का संकेत हो। यह भी हो सकता है कि डॉक्टर आपको लेबर शुरू होने के लिए कुछ प्रिस्क्राइब करें
     
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स्वस्थ शिशु के स्वागत की करें तैयारी - फोटो : istock
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 
 
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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