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Long Covid: कोविड रिकवरी के बाद ऐसे लक्षण फेफड़ों की खराबी का हो सकते हैं संकेत, न करें इन्हें अनदेखा

Sun, 13 Mar 2022 02:02 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोविड रिकवरी के बाद फेफड़ों से संबंधित समस्या - फोटो : iStock
Medically Reviewed By-
डॉ अवनीश कुंदन
श्वसन रोगों को विशेषज्ञ 
(गुरुग्राम)


कोरोनावायरस, संक्रमण के दौरान और ठीक होने के बाद भी लोगों के लिए बड़ी मुसीबतों का कारण बना हुआ है। कोविड रिकवरी के बाद कई तरह के लक्षणों का अनुभव होना कोई नई बात नहीं है, इस तरह की समस्या को लॉन्ग कोविड सिंड्रोम के तौर पर जाना जाता है। कई लोगों में इसके लक्षण कुछ दिनों से लेकर छह माह और एक साल तक भी बने रह सकते हैं। यही कारण है कि संक्रमण से ठीक होने के बाद भी लोगों को सेहत का विशेष ख्याल रखने की सलाह दी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक लॉन्ग कोविड के कुछ लक्षण गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का भी कारण बन सकते हैं, ऐसे में लक्षणों को लेकर लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए।

कोरोना के सबसे खतरनाक माने जा रहे डेल्टा वैरिएंट से संक्रमण के कारण लोगों को सांस से संबंधित कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा था। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि पोस्ट कोविड सिंड्रोम में भी कुछ लोगों को सांस फूलने की दिक्कत हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर संक्रमण से ठीक होने के बाद महीनों तक आपको सांस की दिक्कत हो रही है तो इस बारे में तुरंत डॉक्टर से सलाह ले लें। यह फेफड़ों के खराब होने का संकेत हो सकती है, जो गंभीर स्थितियों में जानलेवा भी हो सकती है। 
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लॉन्ग कोविड में सांस फूलने की दिक्कत - फोटो : iStock
लॉन्ग कोविड और सांस फूलने की समस्या
इसी समस्या को लेकर हाल ही में मेडिकल जर्नल इम्युनिटी में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों ने अलर्ट किया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि कोविड रिकवरी के बाद लंबे समय तक सांस फूलने की समस्या फेफड़ों की गंभीर बीमारियों या फेफड़ों के खराब होने की ओर इशारा हो सकता है। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि रिकवरी के लंबे समय बाद तक भी कमजोर इम्युनिटी वाले कुछ लोगों के फेफड़े संक्रामक वायरस से हुए नुकसान से पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाते हैं। इसके कारण सांस की समस्या हो सकती है।
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पोस्ट कोविड में हो सकती हैं गंभीर समस्याएं - फोटो : iStock
अध्ययन में क्या पता चला?
विशेषज्ञों की टीम ने इस अध्ययन के लिए सांस से संबंधित लॉन्ग कोविड रोगियों को शामिल किया। अध्ययन में शामिल सभी प्रतिभागियों में कोविड-19 के गंभीर लक्षणों की शिकायत थी और इसके लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा था। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि फेफड़ों के अंदर कौन सी प्रतिरक्षा कोशिकाएं सक्रिय हैं जो संक्रमण से ठीक होने के बाद सांस फूलने की समस्या का कारण बनती हैं? शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ लोगों के फेफड़े लंबे समय तक संक्रमण के प्रभाव से उबर नहीं पाते हैं। 

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फेफड़ों पर कोरोना संक्रमण का प्रभाव - फोटो : iStock
इस वजह से हो सकती है सांस फूलने की दिक्कत
नेशनल हार्ट एंड लंग इंस्टीट्यूट में प्रोफेसर और अध्ययन के लेखकों में से एक डॉ जेम्स हार्कर ने बताया कि रिकवरी के बाद भी लंबे समय तक सांस फूलना कोविड-19 के कारण उत्पन्न असामान्य प्रतिरक्षा कोशिकाओं की उपस्थिति को इंगित करता है। कई लोगों में यह समस्या देखी जा रही है। अगर सांस फूलने का समय पर इलाज किया जाए तो फेफड़ों की स्थिति में सुधार हो सकता है और आगे किसी भी नुकसान को रोका जा सकता है। इसके इसके लक्षणों को गंभीरता से लिए जाने की आवश्यकता है।
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लॉन्ग कोविड के लक्षणों को न करें अनदेखा - फोटो : iStock
क्या है विशेषज्ञ की सलाह?
इस संबंध में अमर उजाला से बातचीत में श्वसन रोगों को विशेषज्ञ डॉ अवनीश कुंदन बताते हैं, सांस फूलना, लॉन्ग कोविड के गंभीर लक्षणों में से एक है, इसे अनदेखा करना बड़ी समस्याओं को जन्म दे सकता है। फेफड़ों की कई बीमारियों को गंभीर स्थितियों में जानलेवा भी माना जाता है, ऐसे में सांस से संबंधित किसी भी लक्षण को अनदेखा करने की गलती न करें। संक्रमण से ठीक होने के बाद किसी असामान्य तरह की समस्या बने रहने की स्थिति में विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें।


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स्रोत और संदर्भ
Immuno-proteomic profiling reveals aberrant immune cell regulation in the airways of individuals with ongoing post-COVID-19 respiratory disease

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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