PMOS Treatment: जब भी किसी महिला को पीएमओएस की परेशानी होती है तो डॉक्टर उन्हें सबसे पहले वजन घटाने की सलाह देते हैं। ऐसा क्यों है और ऐसा न करने पर क्या होगा, हम यहां इसी बारे में बात करेंगे।
PMOS Treatment: पीएमओएस (PMOS) यानी पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवरी सिंड्रोम आज महिलाओं में तेजी से बढ़ती एक आम हार्मोनल समस्या बन चुकी है। इस स्थिति में शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे अनियमित पीरियड्स के साथ-साथ कई समस्याएं हो सकती हैं।
पीएमओएस से जूझ रही महिलाओं को डॉक्टर अक्सर वजन नियंत्रित करने की सलाह देते हैं, क्योंकि बढ़ा हुआ वजन इस समस्या को और गंभीर बना सकता है। लेकिन कई महिलाएं यह समझ नहीं पातीं कि वजन घटाना पीएमओएस मैनेजमेंट का अहम हिस्सा क्यों है। आइए जानते हैं कि पीएमओएस में वजन घटाना कितना जरूरी है और इसका शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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PMOS में वजन घटाना कितना जरूरी?
- फोटो : AI
पीएमओएस में वजन घटाना क्यों जरूरी है?
पीएमओएस में कई महिलाओं में इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या देखी जाती है। इसमें शरीर इंसुलिन हार्मोन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता, जिससे ब्लड शुगर बढ़ने लगता है और शरीर ज्यादा इंसुलिन बनाने लगता है। ज्यादा इंसुलिन एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) के स्तर को बढ़ा सकता है, जिससे पीएमओएस के लक्षण बढ़ सकते हैं।
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PMOS में वजन घटाना कितना जरूरी?
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वजन कम करने से शरीर में कई सकारात्मक बदलाव हो सकते हैं:
वजन नियंत्रित होने से एंड्रोजन हार्मोन का स्तर कम हो सकता है और ओव्यूलेशन बेहतर हो सकता है।
कई महिलाओं में वजन कम करने से मासिक धर्म चक्र में सुधार देखा जाता है।
स्वस्थ वजन गर्भधारण की संभावना को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
वजन कम होने से शरीर इंसुलिन को बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर पाता है।
पीएमओएस के साथ मोटापा टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है।
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वजन न घटाने पर क्या असर पड़ सकता है?
अगर पीएमओएस में बढ़ते वजन को नियंत्रित नहीं किया जाता, तो शरीर में हार्मोनल असंतुलन और मेटाबॉलिक समस्याएं बढ़ सकती हैं। अधिक वजन होने पर इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या ज्यादा गंभीर हो सकती है, जिससे शरीर में इंसुलिन का स्तर बढ़ने लगता है। इसका असर एंड्रोजन हार्मोन पर पड़ सकता है और पीएमओएस के लक्षण जैसे अनियमित पीरियड्स, ओव्यूलेशन में परेशानी, मुंहासे और चेहरे पर अनचाहे बालों की समस्या बढ़ सकती है।
वजन ज्यादा रहने से कई महिलाओं में पीरियड्स लंबे समय तक अनियमित रह सकते हैं, क्योंकि हार्मोन बैलेंस बिगड़ने के कारण अंडे बनने और रिलीज होने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसका असर गर्भधारण की क्षमता पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा वजन बढ़ने से थकान, मूड में बदलाव, तनाव और रोजमर्रा की गतिविधियों में परेशानी जैसी समस्याएं भी महसूस हो सकती हैं।
ध्यान रखें कि पीएमओएस को मैनेज करने के लिए वजन कम करना एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, लेकिन यह अकेला इलाज नहीं है। संतुलित आहार, नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद, तनाव कम करना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार लेना भी उतना ही जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।