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आज से शुरू करें ये काम, कम हो जाएगा भूलने की बीमारी का खतरा

Tue, 07 May 2019 03:02 PM IST
पंखुड़ी सिंह लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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किसी चीज को भूल जाना याददाश्त कमजोर होने की निशानी है लेकिन कभी-कभी ये बीमारी का रूप ले लेती जो किसी व्यक्ति को भरी पड़ सकता है। इस बीमारी को डिमेंशिया कहते हैं। अधिकतर बढ़ती उम्र में इस बीमारी का खतरा होता होता है। ये काफी गंभीर भी हो सकती है जिसमें व्यक्ति सिर्फ सामान ही नहीं रिश्ते और खुद की पहचान तक भूलने लगता है। हालांकि, कुछ ऐसी क्रियाएं हैं जिनकी मदद से इस बीमारी के खतरे को घटाया जा सकता है। 


 
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न्यूरोलॉजी जर्नल में पब्लिश एक स्टडी कहती है कि पढ़ना, कोई संगीत सीखना, गाना, कॉन्सर्ट में जाना, बागवानी, सिलाई-कढ़ाई या धार्मिक सेवाओं में भाग लेने से बुढ़ापे में डिमेंशिया से पीड़ित होने का जोखिम घट सकता है। इस स्टडी में स्वीडन की 800 महिलाओं को शामिल किया गया, जिनकी औसत आयु 47 साल थी। ये स्टडी 44 साल तक चली। 
 
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इन महिलाओं को दो ग्रुप में बांटा गया। एक ग्रुप उन महिलाओं का जो मेंटल और फिजिकल एक्टिविटीज में काफी सक्रिय थीं और दूसरा ग्रुप जो इन गतिविधियों में सक्रिय नहीं थीं। स्टडी के दौरान 194 महिलाएं डिमेंशिया से पीड़ित हुईं। इनमें से 102 महिलाओं को अल्जाइमर, 27 को वैस्कुलर डिमेंशिया और 41 महिलाएं मिक्स्ड डिमेंशिया से पीड़ित हुईं। स्वीडन की यूनिवर्सिटी ऑफ गॉथेनबर्ग की जेना नाजर ने कहा, 'इस स्टडी के नतीजे बताते हैं कि ये एक्टिविटीज बुढ़ापे में डिमेंशिया से बचाने और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य को संरक्षित करने में भूमिका निभाती हैं। 
 

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ये देखा गया कि मानसिक रूप से निष्क्रिय महिलाओं के मुकाबले सक्रिय महिलाओं को अल्जाइमर होने का खतरा 46 फीसदी कम रहा और डिमेंशिया होने का खतरा 34 फीसदी कम रहा। जो महिलाएं फिजिकली एक्टिव थीं उनमें शारीरिक रूप से निष्क्रिय महिलाओं की तुलना में डिमेंशिया का खतरा 52 फीसदी कम और मिक्स्ड डिमेंशिया का खतरा 56 प्रतिशत कम था।
 
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ये ऐसी बीमारियां हैं जो मस्तिष्क को प्रभावित करती हैं। जिससे मस्तिष्क के कुछ काम जैसे याददाश्त, किसी की बात समझना, किसी समस्या का हल सोचना, बोलना, ये क्षमताएं क्षीण होती जाती हैं और आदमी का दिमाग काम करना बंद कर देता है या सामान्य से कम काम करता है। इस मानसिक क्षीणता की गति धीमी भी हो सकती है या तेज भी हो सकती है।
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